जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने शनिवार को उस मस्जिद निर्माण स्थल पर पत्थर और ईंट रखी, जिसे वह अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनने वाला ढांचा बता रहे हैं। उनके इस कदम ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
अयोध्या के कई संतों और धर्माचार्यों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संतों का कहना है कि कबीर ने ऐसा कदम उठाकर 140 करोड़ भारतीयों का अपमान किया है। उनका कहना है कि जिस ऐतिहासिक व्यक्तित्व को वे एक आक्रमणकारी और लुटेरा मानते हैं, उसके नाम पर धार्मिक संरचना बनाना उचित नहीं है।
बाबरी मस्जिद–राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद निर्माण की पहल को राजनीतिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या विवाद अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और कोर्ट के फैसले का देशभर के मुसलमानों ने सम्मान किया है।
इकबाल अंसारी ने कहा, आज राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को लेकर कोई झगड़ा नहीं है। मामला खत्म हो चुका है। चुनाव शुरू भी नहीं हुए हैं और बंगाल में मंदिर–मस्जिद की राजनीति फिर शुरू कर दी गई। हमारा मानना है कि बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बननी चाहिए, क्योंकि बाबर कोई मसीहा नहीं था।
देश का माहौल खराब करने की कोशिश
वहीं, दंतधावन कुंड पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी ने कहा कि इस देश में अब बाबर के नाम पर किसी तरह का निर्माण नहीं होना चाहिए। देश तरक्की के रास्ते पर है, सनातन संस्कृति का पूरा विश्व में डंका बज रहा है। ऐसे समय में हुमायूं कबीर का यह कुत्सित प्रयास देश का माहौल खराब करने की कोशिश है।
किसी भी तरह के कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि धर्म और राष्ट्र के विरोध में किसी भी तरह के कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बाबर के नाम पर निर्माण करना राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है। ऐसा कृत्य करने वालों को संत समाज करारा जवाब देने के लिए तैयार है। हुमायूं कबीर को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी राजूदास ने कहा कि एक विधायक के द्वारा यह कृत्य करना दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के हिंदुओं को यह सोचना पड़ेगा नहीं तो देश हाथ से निकल जाएगा।

