जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: चुनाव आयोग आज विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रगति पर एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम निर्धारित समय से पीछे चल रहा है। ऐसे में आयोग इन राज्यों को समयसीमा बढ़ाने की अनुमति देने पर विचार कर सकता है। आयोग का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता उसकी प्राथमिकता है, इसलिए आवश्यक होने पर अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।
एसआईआर क्या है?
एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिहीन बनाना है। इसके तहत—
डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं,
मृत या दूसरे स्थान पर चले गए मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं,
18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए योग्य मतदाताओं को शामिल किया जाता है।
यह प्रक्रिया फर्जी मतदान की संभावनाएं कम करने में भी मददगार है। एसआईआर का पहला चरण बिहार से शुरू हुआ था। वर्तमान में दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें बूथ-स्तर अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है। कई बीएलओ शिक्षक या सरकारी कर्मचारी होने के चलते सीमित समय में पूरा कार्य करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
यूपी ने मांगा दो सप्ताह का अतिरिक्त समय
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि राज्य ने एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने के लिए चुनाव आयोग से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। उनका कहना है कि यह विस्तार इसलिए आवश्यक है ताकि मृत, स्थानांतरित और लापता मतदाताओं की प्रविष्टियों का दोबारा सत्यापन किया जा सके। उन्होंने बताया कि अब तक 99.24 प्रतिशत जनगणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। यूपी में एसआईआर 4 नवंबर से चल रहा है।
बंगाल में भी बढ़ी समयसीमा, अंतिम सूची फरवरी 2026 में
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के लिए भी एसआईआर की समयसीमा बढ़ा दी है। बड़े पैमाने पर जनगणना कार्य और मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की जरूरत को देखते हुए अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर अब 14 फरवरी 2026 कर दी गई है।

