Tuesday, March 10, 2026
- Advertisement -

बालेंद्र शाह भाारत से कैसे रखेंगे संबंध

32 1

हिमालय की उपत्यका में बसा देश नेपाल के आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की ऐतिहासिक जीत के नायक 35 वर्षीय बालेंद्र शाह (बालेन शाह) नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनने की राह में है। वह देश के पहले मधेशी प्रधानमंत्री तो होंगे ही साथ ही देश के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री होने का तमगा भी उनके सिर सजेगा। बालेंद्र शाह की पार्टी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा छू ली है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ रैपर से देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे बालेंद्र शाह के समक्ष अब नेपाली जनता की उन सभी आकांक्षाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी जिसे पूरा करने में के पी शर्मा ओली की सरकार पूरी तरह विफल रही। याद होगा कि गत वर्ष सितंबर में नेपाली युवाओं के नेतृत्व वाले जेन-जी विरोध प्रदर्शन के कारण ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। अब उम्मीद किया जाना चाहिए कि लंबे समय की अस्थिरता के बाद अब नेपाल को एक मजबूत और टिकाऊ बहुमत वाली स्थाई सरकार मिलेगी जो वहां की समस्याओं से निपटने में सफल होगी।

आज की तारीख में नेपाल में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार और भ्रष्टाचार का है। देश की एक-तिहाई युवा आबादी रोजगार की तलाश में विदेश जाने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के कारण देश की अर्थव्यवस्था रसातल में है। नेपाल की अर्थव्यवस्था मुख्य रुप से कृषि, पर्यटन और विदेश में काम कर रहे नागरिकों द्वारा भेजे गए रकम पर टिकी है। देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 50 फीसदी तक विदेशी मुद्रा भंडार का मुख्य स्रोत है। भारत में तकरीबन 50 से 60 लाख नेपाली नागरिक काम कर रहे हैं। नेपाल की लगभग 20 फीसदी आबादी अपनी आजीविका के लिए भारत पर निर्भर है। किंतु दुखद पहलू यह है कि विगत कुछ वर्षों में भारत-नेपाल के बीच संबंधों में खटास उत्पन हुआ है। केपी ओली के प्रधानमंत्री रहने के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। वर्ष 2020 में सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्ते तल्ख हुए हैं। याद होगा तब नेपाल ने नया नक्शा जारी करते हुए भारतीय इलाकों मसलन कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना हिस्सा बताया था। तब भारत ने कड़ा विरोध जताया था। अब मौंजू सवाल यह है कि नेपाल के नए प्रधानमंत्री बनने की राह में खड़े बालेंद्र शाह का भारत के प्रति रुख क्या होगा?

भारत के संदर्भ में उनके पुराने विचार बहुत उत्साहित करने वाले नहीं हैं। वे राजनीतिक मंचों के जरिए कई बार भारत विरोधी रुख प्रकट कर चुके हैं। वर्ष 2025 में एक पोस्ट में उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका सहित बड़ी शक्तियों की मुखर आलोचना की। उनके समर्थकों ने नेपाल के विस्तारित नक्शे जिसमें भारतीय क्षेत्र दिखाए गए थे, को बढ़ावा दिया और मेयर के तौर पर अपने कार्यालय में जगह दी। देखें तो 1806 की सुगौली संधि के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों में भी बालेंद्र शाह शामिल रहे हैं। कई भारतीय फिल्मों को लेकर भी उन्होंने कड़ी टिप्पणी की। देखना दिलचस्प होगा कि अगर देश की कमान बालेंद्र शाह के हाथ आती है तो भारत को लेकर उनका रुख क्या रहता है। लेकिन बालेंद्र शाह को इस कटु सच्चाई को समझना होगा कि नेपाल का भारत से ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंध रहा है। विगत दशकों में दोनों देशों के बीच कुछ मसलों पर दूरियां बढ़ी हैं जिसकी वजह से चीन को नेपाल के निकट जाने का मौका मिला। चीन द्वारा तिब्बत को हस्तगत किए जाने के बाद से ही भारत-चीन संबंधों में नेपाल की सामरिक स्थिति का महत्व बढ़ा है। यही कारण है कि चीन भारत के खिलाफ नेपाल को अपने पाले में खड़ा करने की हरसंभव कोशिश करता रहा है। वक्त आ गया है कि बालेंद्र शाह भारत से रिश्ते सुधारें और इस सच को स्वीकार करें कि नेपाल को लेकर भारत की भूमिका सदैव बड़े भाई की रही है।

वर्ष 2023 में जब नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड की भारत यात्रा हुई तब दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। इन समझौतों में नेपाल के शिरशा एवं जुलाघाट में दो पुल का निर्माण, मोतिहारी अमलेहगंज पाइपलाइन को चितवन तक ले जाने का प्रस्ताव, रुपईडीहा और नेपालगंज में एकीकृत जांच चौकियों का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन, पनबिजली में सहयोग, चितवन और झापा में नए स्टोरेज टर्मिनल, नेपाल के लोगों के लिए नए रेलमार्ग, अंतरदेशीय जलमार्ग सुविधा का प्रावधान, भारतीय रेल संस्थानों में नेपाली रेलकर्मियों को प्रशिक्षण, रामायण सर्किट से संबंधित परियोजानाओं में तेजी लाना इत्यादि प्रमुख रहा। बालेंद्र शाह संबंधों को और ऊंची उड़ान देंगे। लेकिन बदलते परिदृश्य पर गौर करें तो नेपाल में एक ऐसा वर्ग तैयार हो गया है जो अपने यहां चीन की दखलअंदाजी को बिल्कुल ही अनुचित नहीं मान रहा है। नेपाल में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को वहां के माओवादियों का खुला समर्थन हासिल है। यह भारत की संप्रभुता के लिए खतरनाक है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

कनाडा में भारतीयों के पढ़ाई के अवसर

अगर आप भी विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना...

तेजी से बढ़ती डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री

आज के समय में करियर बनाने के लिए डिजिटल...

वाट्सऐप ग्रुप के सुप्रभात वीर

आज के डिजिटल युग में 'आतंकवाद' केवल सीमाओं पर...

संभावित ऊर्जा संकट और भारत

इस्राइल और अमेरिका द्वारा संयुक्त तौर पर 28 फरवरी...

UP Cabinet: यूपी कैबिनेट ने 30 प्रस्तावों को दी मंजूरी, संपत्ति रजिस्ट्रेशन में नाम मिलान अनिवार्य

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ...
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here