Tuesday, March 10, 2026
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वाट्सऐप ग्रुप के सुप्रभात वीर

आज के डिजिटल युग में ‘आतंकवाद’ केवल सीमाओं पर नहीं होता, वह सुबह-सुबह आपके तकिए के नीचे रखे मोबाइल फोन में भी घुसपैठ करता है। इस आधुनिक आतंकवाद के सरगना हैं—’सुप्रभात वीर’। ये वे लोग हैं जिनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य सूर्योदय से पहले आपके फोन की घंटी बजाकर आपकी आत्मा को झकझोरना और आपकी नींद का सरेआम कत्ल करना है। हमारे मोहल्ले के ‘मक्खनलाल जी’ इस सेना के जनरल हैं। मक्खनलाल जी को रात में नींद आए न आए, पर सुबह चार बजे उनका ‘अंगूठा’ खुजलाने लगता है। वे बिस्तर से पैर नीचे उतारने से पहले ‘फॉरवर्ड’ बटन पर अंगूठा टिका देते हैं। उनके पास ऐसे चित्रों का जखीरा है जिसमें उगते हुए सूरज के पीछे से साक्षात ब्रह्मदेव प्रकट हो रहे होते हैं, या फिर ओस की बूंदों पर कोई बेचारा कीड़ा फिसल रहा होता है, और नीचे सुनहरे अक्षरों में लिखा होता है—‘सत्य ही शिव है, और शिव ही सुंदर है… शुभ प्रभात!’

इनकी कलाकारी का चरम तब दिखता है जब ये हिलते-डुलते जिफ चित्र भेजते हैं। एक ऐसा चमकता हुआ गुलाब का फूल, जो स्क्रीन पर ऐसे फड़फड़ाता है जैसे उसे अभी-अभी मिर्गी का दौरा पड़ा हो। उस फूल के ऊपर से कोई कृत्रिम तितली उड़ती हुई आती है और लिख देती है—‘आपका दिन मंगलमय हो!’ उस तितली की फड़फड़ाहट देखकर नींद तो क्या, मोहल्ले के कुत्तों का भौंकना भी बंद हो जाता है। इनके ग्रुप में कुछ ‘अनुगामी’ भी होते हैं। जैसे ही मक्खनलाल जी का बम फटता है, नीचे से चार-पांच ‘तथास्तु’ छाप लोग हाथ जोड़ने वाली इमोजी की झड़ी लगा देते हैं। देखते ही देखते आपके फोन की गैलरी में साढ़े तीन सौ गुलाब के फूल, अस्सी उगते सूरज और चौदह हजार साष्टांग दंडवत करते हुए बच्चे जमा हो जाते हैं। आपका फोन ‘हैंग’ होने लगता है, पर मक्खनलाल जी का उत्साह ‘अपडेट’ होता रहता है।

एक दिन मक्खनलाल जी ने हद कर दी। उन्होंने सुबह तीन बजे एक ऐसी फोटो भेजी जिसमें साक्षात यमराज भैंसे पर सवार थे और नीचे लिखा था—‘जागो! समय किसी का इंतजार नहीं करता। शुभ सवेरा!’ पूरे ग्रुप में हड़कंप मच गया। लोगों को लगा मक्खनलाल जी को ‘अंतिम बुलावा’ आ गया है। मोहल्ले के तीन उत्साही लड़के टॉर्च लेकर उनके घर पहुंच गए। खिड़की से झांका तो देखा मक्खनलाल जी खर्राटे मार रहे थे और फोन बगल में चार्जिंग पर लगा था।
सुबह जब उन्हें जगाया गया और यमराज वाली फोटो दिखाई गई, तो मक्खनलाल जी ने अपनी आंखें मलते हुए बड़े दार्शनिक अंदाज में कहा— ‘अरे भाई, वो तो गलती से यमराज वाली फोटो चली गई! मैं तो ‘वैराग्य’ पर ज्ञान देने वाला था। पर वैसे बुरा क्या है? यमराज को देखकर ही सही, कम से कम तुम लोग साढ़े तीन बजे ‘ब्रह्म मुहूर्त’ में बिस्तर से तो उठे! पुण्य मिलेगा सबको!’ अब पूरा मोहल्ला इस सोच में है कि मक्खनलाल जी को पुण्य दिलवाया जाए या सीधे यमराज के पास ‘पिकनिक’ पर भेजा जाए।

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