जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने की घटनाओं और मरम्मत के दौरान पंखों से सड़क सुखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHI) ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर वायरल वीडियो साझा करते हुए लिखा, “भाजपाई तरक्की की नई हवा।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का कुछ दिन पहले ही उद्घाटन हुआ हो, उसे बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि मरम्मत वाले हिस्से को जल्दी सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पूरे मामले को और भी हास्यास्पद बनाता है। अखिलेश ने सवाल उठाया कि जब एक्सप्रेसवे उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही कई बार मरम्मत मांग रहा है, तो उस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम कौन उठाएगा।
20 दिनों में कई जगह धंसी सड़क
करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के बाद करीब 20 दिनों के भीतर कई स्थानों पर सड़क धंसने और सतह खिसकने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।
एनएचएआई की बड़ी कार्रवाई
लगातार शिकायतों के बाद एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर उनके मूल विभाग भेज दिया गया है।
इसके अलावा, पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आरोपपत्र जारी किया गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को दो वर्षों के लिए एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
आईआईटी खड़गपुर करेगी जांच
एनएचएआई के अनुसार, लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी तक पानी पहुंचने से कुछ हिस्सों में स्लिपेज की स्थिति बनी है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। इसके साथ ही पूरे एक्सप्रेसवे का लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से परीक्षण कराया जा रहा है।
मरम्मत तक नहीं लगेगा टोल
NHI ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत पर आने वाला लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी। मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली स्थगित रहेगी और इस अवधि में यात्रियों से कोई टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा। टोल राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से ही की जाएगी।
फिलहाल, एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने इस परियोजना को सियासी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही सड़क धंसने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

