विशाल भटनागर |
मेरठ: खजाने को हर कोई संभाल कर रखता है, लेकिन क्या कभी सुना है कि कोई अखबारों के संग्रह को एक जगह एकत्रित करके रखें। वह भी सिर्फ एक -दो साल के नहीं बल्कि 50 साल से भी ज्यादा की अवधि के विभिन्न अखबारों को एकत्रित करना और उनकी केयर करना सुनने में थोड़ा अटपटा लगेगा, लेकिन इस अनोखी बात को सिद्ध कर रहे हैं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर स्थित राजा महेंद्र प्रताप लाइब्रेरी के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ जमाल अहमद सिद्दीकी। जिन्होंने वर्ष 1968 से लेकर अब तक के नेशनल से लेकर लोकल तक के सभी अखबारों के संग्रह को एक जगह एकत्रित किया है।
दरअसल, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर स्थित राजा महेंद्र प्रताप लाइब्रेरी काफी बड़ी लाइब्रेरी है। जिसमें विभिन्न छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं। छात्र-छात्राओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एवं डा. जमाल अहमद सिद्दीकी डिप्टी लाइब्रेरियन की पहल पर एक नई बिल्डिंग भी तैयार हुई है। जिसे पुरानी लाइब्रेरी के साथ ही जोड़ा जाएगा यह लाइब्रेरी बिल्कुल हाईटेक है।
जिसमें शोध से लेकर कांफ्रेंस तक हाईटेक है। वहीं, लाइब्रेरी परिसर में ही राजा महेंद्र प्रताप की मूर्ति भी बनाई गई है। जिसका जल्द ही मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल द्वारा अनावरण किया जाएगा। पुस्तकालय में लाखों की संख्या में पुस्तकें उपलब्ध है। इतना ही नहीं डिजिटल माध्यम से लॉकडाउन अवधि में लाखों किताबों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया गया।
इसके लिए लाइब्रेरी परिसर में अलग से विभाग बनाया गया है। जोकि डिजिटल लाइब्रेरी के तहत कार्य कर रहा है। बता दें कि अखबारों के माध्यम से आपातकाल से लेकर अब तक की राजनीति के प्रत्येक घटनाक्रम का भी अच्छे से अध्ययन किया जा सकता है।
लाखों नई-नई किताबों के साथ है अखबारों का संग्रह
विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में लाखों की संख्या में किताबें हैं। जिनका अध्ययन करते हुए छात्र छात्राएं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ साहित्य धार्मिक एवं अन्य प्रकार की किताबों से ज्ञान अर्जित करते हैं। जिससे कि वह अपने भविष्य को उज्जवल बना सकें, लेकिन कहीं ना कहीं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए छात्र-छात्राओं को अखबारों का भी सहारा लेना पड़ता है।
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए डिप्टी लाइब्रेरियन डा. जमाल अहमद सिद्दीकी ने किताबों के साथ-साथ अखबारों के संग्रह को भी बहुत अच्छे से संजोया हैं।
अब तक के प्रत्येक जनवाणी अखबार अलमारी में
दैनिक जनवाणी की शुरूआत से लेकर अब तक के सभी अखबार भी सामने की अलमारी में रखे नजर आएगे। डा. जमाल अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पुरानी खबर को लेकर जब कहीं भी शहर में अखबार नहीं मिलते। तब लोग सीसीएसयू की लाइब्रेरी में आते हैं, जिससे उनको मदद मिल सके, लेकिन लोगों को अन्य माध्यमों से ही अखबारों की वह खबर उपलब्ध कराई जाती है। कोई भी कॉपी नहीं दी जाती।
डा. जमाल अहमद सिद्दीकी का कहना है कि किताबें तो फिर भी आ जाएंगी, लेकिन यह अखबार नहीं मिल पाएंगे। यह अमानत है, इसे भविष्य के लिए संजोने के लिए वह डिजिटल प्लेटफार्म पर लाएंगे। ताकि सभी अखबार हमेशा के लिए सुरक्षित रहे।

