- शासन के निर्देश पर शुरू की गई हैं जांच, तीन बार तलब की जा चुकी है आरोपियों की फाइल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भर्ती घोटाले को लेकर शासन के निर्देश पर शुरू की गई विजिलेंस जांच नगर निगम अफसरों के गले की फांस बन गई है। इस मामले में गर्दन फंसती देखकर निगम अफसर बजाय सहयोग के विजिलेंस जांच से भाग रहे हैं। निगम अफसरों को तीन बार रिमांडर भेजकर विजिलेंस के जांच अधिकारी आरोपी लिपिक धर्मेंद्र उर्फ धर्मेंश की फाइल तलब कर चुके हैं। इतना ही नहीं कई बार निगम और नगरायुक्त के कैंप कार्यालय के भी चक्कर काट चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर कहा जा रहा है कि विजिलेंस की जांच से आरोपी कर्मचारियों व अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है।
डा. प्रेम सिंह ने किया था खुलासा
नगर निगम के भर्ती घोटाले का खुलासा निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने किया था। साल 2006 से साल 2011 के बीच कुल 23 कर्मचारी गलत तरीके से भर्ती किए गए थे। इस मामले को लेकर तत्कालीन नगरायुक्त मणि प्रसाद मिश्रा व डीके सिंह ने भी कार्रवाई के लिए शासन को कई पत्र लिखे थे। इन पत्रों में भर्ती घोटाले के कर्मचारियों से वेतन के नाम पर जो धन उन्हें दिया गया उसकी रिकवरी तक की भी संस्तुति की गई है।
शासन और मंडलायुक्त के पत्र कर दिए गुम
भर्ती घोटाले को लेकर शासन और मंडलायुक्त स्तर से जो पत्र नगरायुक्त को प्रेषित किए गए भर्ती घोटाले के कर्मचारियों ने उन पत्रों तक को गायब कर दिया। ये तमाम ऐसे पत्र बताए जाते हैं जो नगरायुक्त को संबोधित किए गए हैं, लेकिन यह बात अलग है कि शासन व मंडलायुक्त के पत्र गुम कर दिए जाने की वजह से ये पत्र नगरायुक्त तक नहीं पहुंंच सके। जिसकी वजह से नगरायुक्त पूरे मामले से लंबे समय तक अनभिज्ञ बने रहे।
डा. प्रेम सिंह मिले थे नगरायुक्त से
मामले का भंडाफोड़ करने वाले पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह विगत दिनों मामले को लेकर नगरायुक्त मनीष बंसल से भी मिले थे। डा. सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी उन्होंने नगरायुक्त को दी है। उम्मीद है कि अब भर्ती घोटाले के आरोपियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सकेगा।
स्टेनो की भूमिका संदिग्ध
शासन व मंडलायुक्त के जो पत्र गायब किए गए हैं उनके पीछे नगरायुक्त के स्टेनो बताए जा रहे निगम कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध बतायी जा रही है। स्टेनो के पद पर खुद को जिस तरह से इस कर्मचारी ने प्रमोट कराया है वह भी जांच के दायरे में है। क्योंकि यह कर्मचारी खुद भर्ती घोटाले के चलते इस पद तक पहुंचा है। इतना ही नहीं उस पर अपने पुत्र को भी इसी प्रकार से निगम में भर्ती कराने का आरोप है।
विजिलेंस जांच बनी गले की फांस
भर्ती घोटाले में यूं तो कुल 23 निगम कर्मचारियों की सूची है, लेकिन शासन के निर्देश पर जो जांच विजिलेंस के साकेत स्थित कार्यालय के अधिकारियों ने शुरू की है उसमें धर्मेंद्र उर्फ धर्मेंश पुत्र पारसनाथ की पत्रावली तलब की गई है। पत्रावली के लिए विजिलेंस के जांच अधिकारी तीन बार नगरायुक्त को रिमांडर भी भेज चुके हैं। यह बात अलग है कि अभी तक उन्हें आरोपियों की पत्रावली निगम अफसर नहीं मुहैय्या करा रहे हैं।
ये कहना डा. प्रेम सिंह का
निगम के भर्ती घोटाले को परत दर परत सामने लाने वाले पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है। वेतन के नाम पर करोड़ों के राजस्व की हानि पहुंचाने का मामला है। इसकी तमाम जांच एजेंसियां गंभीरता से जांच करें। साथ ही जो भी निगम अधिकारी बचाव में रहे हैं उनकी भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

