- भाजपा ने चुनाव में बगावत करने पर पदाधिकारियों सहित कई को दिखा दिया बाहर का रास्ता
- समाजवादी पार्टी चुनाव में बगावत करने वालों पर कर रही रहम
- आगे पार्टी को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान
मुख्य संवाददाता |
बागपत: समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर मिशन 2022 की तैयारियों में जुटने का आह्वान तो कर रही है, लेकिन अपने दामन को दाग देने वालों पर कार्रवाई नहीं कर रही है। बागपत जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पार्टी के खिलाफ चलने वालों पर समाजवादी रहम कर रही है।
अगर ऐसे ही रहम किया गया और कार्रवाई नहीं हुई तो आगे कोई भी पदाधिकारी व कार्यकर्ता पार्टी की बगावत पर उतारू हो जाएगा और पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी को मजबूत करने और मिशन को फतह करने के लिए समाजवादी पार्टी को पहले ही बगावत करने वालों पर कार्रवाई करने की ओर कदम बढ़ाना चाहिए।
2022 में भाजपा से टक्कर लेने की तैयारी में समाजवादी पार्टी जुट तो गई है, लेकिन अपनी पार्टी में बैठे बगावत करने वाले नेताओं पर कार्रवाई करने में पीछे है। जब पार्टी अनुशासन से नहीं चलेगी तो क्या मिशन को पूरा कर पाएगी? भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनावी अखाड़े में उतरने पर पदाधिकारियों सहित कई नेताओं पर गाज गिरा दी थी और पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित करने की कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद कर दी गई।
रालोद जिलाध्यक्ष ने भी अपने नेताओं को चेतावनी दी थी कि वह अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के विरूद्ध काम करेंगे तो सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही यह भी चेतावनी दी थी कि पार्टी प्रत्याशी की खिलाफत करने पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक समाजवादी पार्टी ही ऐसी है जिसके नेताओं ने अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के विरूद्ध ही चुनाव में बिगुल बजा दिया था।
समाजवादी व रालोद का यहां जिला पंचायत चुनाव में गठबंधन नहीं होने के कारण वह एक दूसरे के आमने-सामने थे। रालोद ने भी एडी चोटी तक के जोर विजयी पाने में लगाए और समाजवादी ने भी 13 वार्डों पर प्रत्याशी उतारे थे। बाद में एक ओर प्रत्याशी वार्ड 18 से बबली देवी को समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिया था। यानी सपा ने 14 वार्डों पर चुनाव लड़ा है।
वार्ड 18 पर दो प्रत्याशियों ने समर्थित लिखकर चुनावी मैदान में समर्थन की अपील भी जनता से की। अब बेचारी जनता भी समझ नहीं पा रही थी कि आखिर समाजवादी से अधिकृत कौन है? क्योंकि यहां इस संबंध में गाइड लाइन ही जारी नहीं की गई थी।
इतना जरूर था कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर कोई चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे रोका न जाए और पदाधिकारी या कार्यकर्ता जो भी चुनाव लड़ने का इच्छुक है वह लड़ सकता है। भले ही सभी को चुनाव लड़ने की छूट थी और पार्टी समर्थित अलग से प्रत्याशी था, लेकिन इसमें समाजवादी नेताओं को पार्टी की एकजुटत पर फोकस करना चाहिए था। यह नहीं करना चाहिए था कि विपक्षी दल को समर्थन दे दिया जाए।
इससे जाहिर है कि कहीं न कहीं बगावत जरूर हुई है। अब चुनाव भी संपन्न हो गया और पार्टी को जो नुकसान होना था वह हो भी गया है। हालांकि इसका परिणाम दो मई को आ जाएगा। भले ही पार्टी प्रत्याशी को समर्थन अधिक मिल जाए या न मिले, लेकिन पार्टी को एकजुटता के साथ इस चुनाव में उपस्थिति दर्ज करानी थी।
क्योंकि इस चुनाव से 2022 के लिए एक संदेश जाता, लेकिन पार्टी नेताओं को यह अच्छा नहीं लगा और बगावत कर डाली। वार्ड 18 और 19 पर पार्टी के ही नेता ने रालोद का साथ दिया और समाजवादी की ओर से समर्थन का ऐलान किया। जबकि समर्थन का ऐलान जिलाध्यक्ष को करना चाहिए था, लेकिन जिलाध्यक्ष की बिना अनुमति को समर्थन दे दिया गया।
अगर समाजवादी इस पर जांच करे तो यह पार्टी के नियम के भी विपरीत होगा। क्योंकि जिलाध्यक्ष को ही प्रोटॉल है कि वह समर्थन का ऐलान कर सकते हैं। निजी तौर पर कोई भी समर्थन देने के लिए आजाद है, लेकिन पार्टी की ओर से समर्थन देना पार्टी की नीतियों के खिलाफ चलने का संदेश है। अब समाजवादी भी ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करने की बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है।
पार्टी हाईकमान को अगर 2022 में अपनी मजबूती पेश करनी है तो बागवत करने वालों पर चाबुक चलाना होगा। भाजपा, रालोद की तरह पहले ही बाहर का रास्ता दिखाना होगा। अन्यथा पार्टी के दागी नेता 2022 में पार्टी के लिए अधिक नुकसानदेह हो सकते हैं।
जनपद के सभी वार्डों की समीक्षा गहनता से करनी होगी और पार्टी के खिलाफ काम करने वालों की रिपोर्ट तैयार कर पार्टी मुखिया अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजनी होगी। जिलाधक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि सभी वार्डों की समीक्षा की जा रही है। सभी पार्टी नेताओं ने अपने प्रत्याशियों को विजयी बनाने में पूरजोर ताकत लगाई है। अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो इसकी रिपोर्ट हाईकमान को भेज दी जाएगी।
टीम चयन के लिए करनी होगी गहन समीक्षा
वर्ष 2017 के बाद से समाजवादी पार्टी का पूर्ण फोकस 2022 पर टिक गया था। हालांकि बीच में 2019 के लोकसभा पर भी पूर्ण फोकस रहा था, लेकिन अब 2022 मिशन के रूप में तय है। मिशन 2022 को फतह करने से पहले समाजवादी पार्टी को चुनावी मैदान में आखिरी तक टिकने वाले खिलाड़ियों को तैयार करना होगा। जो पहले ही मैदान में फिक्सिंग की तैयारी में हो, उन पर समीक्षा करनी होगी। फिक्सरों को पहले ही टीम से आउट करने से फायदा होगा। अन्यथा वह गहरा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

