जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बिछुवे जितनी दूर कुंवारे पांव से…असंख्य श्रोताओं व पाठकों के दिल पर राज करने वाले वरिष्ठ कवि, शायर एवं साहित्यकार डा. कुंवर बेचैन का भी गुरुवार को कोरोना के चलते निधन हो गया। वह लंबे समय से संक्रमण से लड़ रहे थे। कुंवर बेचैन साहब ने कई विधाओं में साहित्य सृजन किया। कवितायें भी लिखीं, गजल, गीत और उपन्यास भी लिखे। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
अपनी युवावस्था मे ही चंदौसी से गाजियाबाद आकर उन्होंने एमएमएच कॉलेज को अपनी कर्म स्थली बनाया तथा यहीं से वो काव्य के क्षेत्र में प्रसिद्ध होते गये। कविता, गीत, गजल की दर्जनों पुस्तकों के रचयिता ने कुछ बरस पहले पांचाली महाकाव्य की रचना भी की थी।
डा. कुंवर बेचैन का मेरठ से नाता यूं तो उतना ही पुराना है जितना गाजियाबाद से पर एक मंचीय कवि के रूप में उन्होंने अपनी काव्य यात्राएं चंदौसी में रहते हुए ही प्रारंभ कर दी थीं। उस समय के हमारे यहां हिन्दी के अनन्य उपासक पूज्य विश्वंभर सहाय प्रेमी उनके साथ साथ डा. रघुवीर शरण मित्र, कैलाश चंद्र गौतम, भारत भूषण, ताराचंद्र हारीत उन युवा कुंवर से बहुत स्नेह रखते थे, साथ ही अपने कार्यक्रम मे उन्हें बुलाते थे।
डा. हरिओम पंवार बताते हैं कि विगत लगभग 45 वर्षों की काव्य यात्राओं में या इस जीवन में डा. साहब से न केवल मंच के रिश्ते रहे बल्कि वे सदा ही परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य की भूमिका में रहे। डा. पंवार के संयोजन में नौचंदी मेले का कवि सम्मेलन हो या देश में कहीं भी इनका संयोजन हुआ डा. कुंवर बेचैन कवियों की सूची में रहते ही थे।
1977-1978 के पश्चात साहित्यालोक संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डा. कुंवर बेचैन हमेशा रहते थे। यूं तो पूरे देश व दुनिया भर में डा. साहब को अनेक पुरस्कार, सम्मान मिले पर मेरठ में भी कुंवर को अनेक बार सम्मानित किया गया। प्रतिवर्ष होने वाले विशंभर सहाय प्रेमी सम्मान समारोह में भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। डा. साहब के असंख्य गीत श्रोताओं की जबान पर हैं जैसे जितनी दूर नयन से सपना, जितनी दूर अधर से हंसना, बिछुवे जितनी दूर कुंवारे पांव से, उतनी दूर पिया तुम मेरे गंव से, उनका बदली, बिजली, पवन का गीत बहुत मार्मिक था लो लोगों ने बहुत सराहा था।
डा. कुंवर के जाने से सम्पूर्ण काव्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई उनके निधन पर डा. हरिओम पंवार, डा. अजय प्रेमी, डा. रामगोपाल भारतीय, श्याम मोहन गुप्ता, सुमनेश सुमन आदि ने श्रद्धासुमन अर्पित किये। इस दौरान सत्यपाल सत्यम, तुषा शर्मा, ईश्वरचंद गंभीर, मनोज कुमार मनोज, ओंकार गुलशन, डा. सुबोध गर्ग, विजय प्रेमी, कृष्ण गोपाल कंसल, डा. सुधाकर आशावादी, पंडित आशुतोष आदि ने शोक प्रकट किया।

