- स्वास्थ्य विभाग लाचार, कम दर्शा रहा मौतों की संख्या
ज्ञान प्रकाश |
मेरठ: कई दशकों में शायद पहली बार लोगो को दर्दनाक मंजरों से सामना करना पड़ रहा है। कोरोना ने सारे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। कोरोना से मौतों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट सिर्फ दहाई के अंदर ही सिमटी हुई है। शर्मनाक बात यह है कि निजी अस्पताल मौतों के आंकड़े नहीं दे रहे हैं।
कोरोना का जितना विकराल रूप दूसरी लहर में दिख रहा है, उतना पहली लहर में नहीं था। ऐसा कोई दिन नहीं जा रहा है। जब सूरजकुंड समेत सभी श्मशानघाट कोविड मरीजों के शव से न भरे दिखते हो। दो मई को न्यूटिमा अस्पताल में पांच कोविड मरीजों की मौत हुई थी, लेकिन सीएमओ की रिपोर्ट में यह संख्या नदारद थी। इसी तरह केएमसी अस्पताल में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। यह आंकड़े भी नदारद थे। मेडिकल कालेज में ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन 10 से अधिक मौतें हो रही है।
सीएमओ की रिपोर्ट ने पूरी तरह से मुंह मोड़ लिया है। हैरानी की बात यह है अब जो रिपोर्ट आ रही है। उसमें मौतों और संक्रमितों की संख्या ही गायब कर दी गई है। आखिर स्वास्थ्य विभाग मौतों के आंकड़ों को क्यों छुपा रहा है। यह किसी की समझ में नहीं आ रहा। गंगा मोटर कमेटी के आंकड़ों पर नजर डाले तो अकेले अप्रैल माह में ही 1500 से अधिक मौतें हुई है। मान लो इसमें अन्य बीमारियों से भी मौत हुई हो, लेकिन ऐसी कौन से बीमारी आयी जिसने एक बारगी लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया है।
स्वास्थ्य विभाग इसका खुलासा नहीं कर पाया। खुद सीएमओ डा. अखिलेश मोहन का यह कहना कितनी लाचारी प्रकट करता है कि निजी अस्पताल मौतों के आंकड़े नहीं दे रहे हैं। दुखद पहलू यह है कि 30 कोविड सेंटरों में लगातार हो रही मौतें भले ही सरकारी फाइलों में कैद न हो, लेकिन कब्रिस्तानों में कम पड़ रही मिट्टी और सूरजकुंड में चल रही वेटिंग दर्शा रही है कि स्वास्थ्य विभाग किस हद तक अपने सिस्टम में पूरी तरह फेल हो चुका है। 88 वर्षीय यामीन अहमद की यह टिप्पणी सटीक बैठती है कि आखिर इतनी लाशें किसकी आ रही है। सारे कब्रिस्तान भर गए और सरकार कह रही सब ठीक है।

