- सरधना में एक लैब टैक्नीशियन के कंधों पर 39 गांवों का भार
- सरधना सीएचसी में स्टाफ के 11 लोग पॉजिटिव
- स्टाफ की कमी से जूझ रहा सरधना का अस्पताल
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: कोरोना वायरस ने लोगों पर कहर बरसा रखा है। महामारी के बीच स्टाफ की कमी उससे भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरधना सीएचसी के अंतर्गत आने वाले 39 गांव और एक बड़े कस्बे की कोराना जांच की जिम्मेदारी महज एक लैब टैक्नीशियन के कंधों पर है। जिसके कारण टेस्टिंग की गति बेहद धीमी है। एक दिन में एक ही गांव में कोरोना जांच हो पा रही है।
इसके अलावा अस्पताल स्टाफ की भरी कमी से जूझ रहा है। क्योंकि अस्पताल में दो चिकित्सक समेत स्टाफ के 11 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में हैं। ऐसे में सरधना सीएचसी संसाधन से ज्यादा स्टाफ की कमी झेल रहा है। जिससे संक्रमण को नियंत्रण करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कोरोना महामारी ने ग्रामीण इलाकों में कहर बरपा रखा है। गांवों में रोजाना आकस्मिक मौत हो रही हैं। जांच के अभाव में मौत का कारण भी नहीं पता चल पा रहा है। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इतने बेकाबू हालता को नियंत्रण करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में स्टाफ की कमी उससे भी बड़ा संकट खड़ा कर रही है।
सरधना सीएचसी के अंतर्गत 39 गांव और एक बड़ा कस्बा आता है। कहने को महामारी काबू करने के लिए अधिक से अधिक टेस्टिंग और इलाज की जरूरत है। मगर सरधना में 39 गांव की जिम्मेदारी महज एक लैब टैक्नीशियन पर है। तीन एलटी में से एक कोरोना संक्रमण की चपेट में है, जबकि दूसरा मेरठ अटैच किया गया है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
टेस्टिंग की हालत क्या है। कितनी भी तेजी के बाद एक गांव का नंबर एक महीने से पहले आने वाला नहीं है। इसके अलावा अस्पताल में भी मानों व्यव्स्थाओं का दम घुट रहा है। अस्पताल स्टाफ की बड़ी कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में दो चिकित्सक समेत स्टाफ के 11 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट मेें हैं। अस्पताल संसाधन से नहीं, बल्कि स्टाफ की कमी से लड़ रहा है।
ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण को काबू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वहीं इस संबंध में सरधना प्रभारी सीएचसी डा. राजेश कुमार का कहना है कि वर्तमान में अस्पताल में महज एक ही लैब टैक्नीशियन कार्यरत है। इस कारण एक दिन में एक ही गांव में टेस्टिंग हो पा रही है। अस्पताल में दो चिकित्सक समेत 11 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं। स्टाफ की कमी के चलते भी काफी दिक्कत सामने आ रही हैं।
39 दिन में एक गांव में रही टेस्टिंग
क्षेत्र में गांव-गांव टेस्टिंग की गति बढ़ाने के लिए खास जोर दिया जा रहा है। ताकि कोरोना की चपेट में आने वाले ग्रामीणों को समय पर इलाज देकर बचाया जा सके। मगर बीमारी जानने के लिए सबसे पहले जांच की जरूरत होती है। जो लैब टैक्नीशियन करता है। सरधना सीएचसी में वर्तमान में एक ही एलटी मैदान में डटे हुए है। जिसके चलते एक दिन में एक ही गांव में कोरोना जांच हो पा रही है। यानी एक गांव का नंबर एक महीने से पहले आनने का मतलब ही नहीं बनता है। स्टाफ की कमी महामारी को रोकने के लिए बड़ी चुनौती है।
अस्पताल में 11 लोग पॉजिटिव
सरधना सीएचसी खुद कोरोना की मार झेल रही है। अस्पताल में कुल 11 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं। जिनमें दो चिकित्सक भी शामिल हैं। ऐसे में स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध चलाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

