Friday, May 15, 2026
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सफलता के लिए जरूरी है खुद की प्रतिभा को पहचानना 

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यूनान के प्रसिद्ध विद्वान डेमीक्रिट्स का जन्म 460  ईसा पूर्व में हुआ था। उनके जीवन से संबंधित एक कहानी अत्यंत प्रेरणादायी है। कहते हैं कि एक बार वे घूमते-घूमते अपने शहर में ही बहुत दूर निकल गए। सहसा उनकी नजर एक युवक पर पड़ी जो लकड़ियों के गट्ठर सिर पर उठाए पसीने से लथ-पथ अपनी राह पर चला जा रहा था। किशोर को इस तरह से बदहाली में देखकर डेमीक्रिट्स द्रवित हो उठा और उससे प्रश्न पूछा, ‘तुम लकड़ियों के इस गट्ठर का क्या करोगे?’ युवक ने सहज भाव से उत्तर दिया, ‘मेरे माता-पिता मुफलिसी में जीवन गुजारते हैं। उनका कष्ट मुझसे देखा नहीं जाता है। मैं इन लकड़ियों के गट्ठर को बेचकर अपने माता-पिता की गृहस्थी चलाने की उनकी जिम्मेदारी में उनकी सहायता करूंगा।’

डेमीक्रिट्स की जिज्ञासा यहीं नहीं थमी। उन्होंने फिर पूछा, ‘इसके अलावा और क्या-क्या काम करते हो तुम? युवक ने जवाब दिया, ’इन सभी कार्यों से फुर्सत पाने पर शेष समय मैं मन लगाकर अध्ययन करता हूं। मैंने डेमीक्रिट्स की विद्वत्ता और प्रसिद्धि के बारे में खूब सुन रखा है। मैं पढ़-लिखकर उनके जैसा ही विद्वान बनना चाहता हूं।’ मुसीबतों का अदम्य साहस के साथ सामना करते हुए युवक के संघर्ष और धैर्य को देखकर डेमीक्रिट्स की आंखें भर आर्इं। उनके पांव वहीं रुक गए और वे वहीं से वापस अपने घर लौट आए। विश्व इतिहास साक्षी है कि अथक मेहनत, सतत प्रयास और अदम्य धैर्य के बल पर वही युवक एक दिन यूनान का मशहूर दार्शनिक और प्रख्यात रेखागणितज्ञ बना, जिसे पूरी दुनिया पाइथागोरस के नाम से जानती है।

सच पूछिए तो हम सभी की कहानी उस किशोर पाइथागोरस से जरा भी अलग नहीं है जिनको अपने जीवन में बेशुमार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किंतु दुर्भाग्यवश हम धैर्य और हौसला नहीं रख पाते हैं। हम जीवन के कठिन परिस्थितियों के सामने हिम्मत हार जाते हैं और यही कारण है कि हम पाइथागोरस जैसे कामयाब नहीं हो पाते हैं, अपने सपने को साकार करने में असफल रह जाते हैं।

सच पूछिये तो जीवन में कामयाबी के लिए खुद की क्षमता में अटूट विश्वास, धैर्य और हौसलों का होना अनिवार्य होता है। हौसला का अर्थ साहस और अंग्रेजी में इसे ही करिज कहते हैं। हमारे पास किसी कार्य को करने का हौसला जितना अधिक होता है, उसमें कामयाब होने का चांस भी उतना ही अधिक होता है। साहस और आत्मविश्वास के अभाव में हम जीवन में बड़े-बड़े कार्य कर नहीं पाते हैं, हम जीवन में सफल होने का सपना भी नहीं देख पाते हैं।

खुद की प्रतिभा को पहचानिए

इस दुनिया में हर शख्स  किसी-न-किसी टैलेंट के साथ पैदा होता है, जिसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता है। किंतु दुर्भाग्यवश हमें अपनी इस स्ट्रेंथ का पता ही नहीं होता है और हम खुद की अद्भुत काबिलियत को जाया कर जाते हैं। इसके कारण सफलता हमसे दूर होती जाती है और हमारा हौसला टूटता जाता है। लिहाजा खुद को पहचानिए और खुद से यह प्रश्न पूछिये कि आपमें खास और अद्भुत क्या है जो  आपको औरों से अलग करता है और आपको विशिष्ट बनाता है। यह जीवन में कामयाब होने का सबसे अहम स्टेप है।

असफलताओं से घबराएं नहीं, सीखें 

जीवन में हर शख्स शिद्दत से सफल होना चाहता है और यही कारण है कि असफलता की स्थिति में वह घबरा जाता है। असफलता की स्थिति में उसे लगता है कि वह इस दुनिया का सबसे अयोग्य व्यक्ति है। इसके कारण सेल्फ-कॉन्फिडेंस का लेवल गिरता जाता है और हम सफल होने की कोशिश ही करना बंद कर देते हैं। इसीलिए यह आवश्यक है कि असफलता की स्थिति में हमें खुद का एनालिसिस करना चाहिए और यह पता करना चाहिए है कि सफल होने की दिशा में हमसे गलतियां कहां हो गर्इं हैं। जीवन में नाकामयाबी के बाद इस प्रकार के आत्मविश्लेषण से सफलता की राहें और आसान होती जाती हैं।

आप अद्भुत हैं, अपनी तुलना किसी और से मत कीजिए

खुद की तुलना किसी और से करना मानव स्वभाव है और इसमें कुछ भी विचित्र नहीं है। किंतु सोच की यह प्रवृत्ति सफलता के लिए अच्छी नहीं है। इस प्रकार की तुलना से हमारा आत्मविश्वास कमजोर पड़ता है और हम अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक साहस को जुटा नहीं पाते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखिये कि इस पूरी दुनिया में आपके जैसे दूसरा और कोई नहीं है, और यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

निगेटिव बातों से खुद को महफूज रखिए

जीवन के किसी भी डोमेन में कामयाबी इस बात पर सबसे अधिक निर्भर करती है कि हमारे सोच का तरीका कितना सकारात्मक है। खुद के बारे में निगेटिव सोच से हम मानसिक रूप से कमजोर पड़ते जाते हैं और नतीजा यह होता है कि सफल होने के लिए हम निरंतर प्रयास नहीं कर पाते हैं। हमारी ऊर्जा का क्षय होता जाता है। इसलिए यह जरुरी है कि हमें नकारात्मक बातों से बच कर रहना चाहिए। साथ ही ऐसे लोगों से भी बच कर रहना चाहिए जिनकी निगेटिव बातों से आपका कॉन्फिडेंस लेवल गिर जाता हो।

सेल्फ-डाउट से बचे रहिए, खुद को कम मत आंकिए 

खुद की काबिलियत में संदेह करने का मनोविज्ञान काफी हानिकारक होता है। इसके कारण हम खुद को अंडरएस्टीमेट करते हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है। सच पूछिए तो जीवन के किसी भी क्षेत्र में कामयाबी की राह में इससे बढ़कर दूसरी और कोई बड़ी बाधा नहीं होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि हमें खुद की काबिलियत में अडिग विश्वास होना चाहिए।

अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए समय-सीमा निर्धारित करें 

जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने के पश्चात उसकी प्राप्ति के लिए अथक प्रयास और कठिन परिश्रम करते रहना जरूरी होता है। लेकिन इससे भी अधिक अनिवार्य लक्ष्य प्राप्ति के लिए समय-सीमा अर्थात डेडलाइन को निर्धारित करना होता है। जब हम यह निर्धारित कर लेते हैं कि कोई विशेष लक्ष्य हमें एक निश्चित समय में प्राप्त कर लेना है तो इससे कोशिश में तीव्रता और मोमेंटम आता है, हम खुद को अधिक फोकस कर पाते हैं, कंसन्ट्रेट कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में मन का भटकाव भी नहीं होता है और हम अपने सपने को साकार करने की राह में बिना किसी बाधा के बड़ी तेजी से दौड़ते चले जाते हैं।
                                                                                                            -एसपी शर्मा


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