Friday, March 13, 2026
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सरकारी फाइलों में कैद प्रदीप का दिल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक सिपाही का दिल जांच के लिये अगस्त से भटक रहा है, लेकिन दिल का राज बताने के लिये कोई भी डाक्टर तैयार नहीं है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला, केजीएमसी और मेरठ मेडिकल कालेज में सिपाही का दिल जांच के लिये भेजा गया, लेकिन सभी ने अपने-अपने तर्क देते हुए जांच से मनाकर दिया। अब पुलिस परेशान है कि आखिर सिपाही की मौत का राज कहीं फाइलों में कैद न हो जाए। अब एसएसपी ने इस बारे में एसपी सिटी से रिपोर्ट मांगी है।

शामली का रहने वाला सिपाही प्रदीप कुमार पुलिस लाइन में तैनात था। अगस्त के पहले सप्ताह में वो छीपी टैंक में अपने दोस्त के घर आकर रुका था। सुबह नौ बजे के करीब वो शौच के लिये बाथरूम गया तो वहीं गिर पड़ा। जब उसके दोस्त ने उसे बाथरूम से निकाला तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शामली से आए परिजनों ने प्रदीप की मौत को लेकर हंगामा करते हुए उसके खास दोस्त पर ही शक करते हुए हत्या करने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने प्रथम दृष्टया इसे हार्ट अटैक से मौत माना था, लेकिन परिजनों के बार-बार बवाल करने के कारण पुलिस ने प्रदीप के शव का पोस्टमार्टम कराया और उसके दिल को जांच के लिये फॉरेंसिक लैब भेजने के आदेश दिये थे। मौके पर प्रदीप के दोस्त ने पुलिस को बताया था कि मौत से पहली वाली रात में प्रदीप ने उसके घर में काफी मात्रा में शराब का सेवन किया था।

आठ अगस्त को सरधना सीएचसी प्रभारी ने प्रदीप के दिल को लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। फॉरेंसिक लैब ने यह कहकर जांच करने से इंकार कर दिया कि उनकी लैब में लखनऊ रेंज के जनपदों की ही जांच की जाती है। लालकुर्ती थाने की पुलिस वहां से दिल को लेकर केजीएमसी लखनऊ ले गई और उनसे जांच के लिये अनुरोध किया, लेकिन वहां से यह कहकर मनाकर दिया गया कि उनके यहां इस तरह की जांच की सुविधा नहीं है।

प्रदीप का दिल लेकर सिपाही लखनऊ से मेरठ मेडिकल कॉलेज आया और प्रधानाचार्य से दिल की जांच कर यह जानने का अनुरोध किया कि क्या हार्ट अटैक के कारण मौत हुई है।

बताया जाता है मेरठ मेडिकल कालेज में यह कहकर इंकार कर दिया गया कि कॉलेज में इस तरह की जांच के लिये विशेषज्ञ नहीं है। हर जगह से निराश होने के बाद पुलिस के सामने यह चुनौती आ गई है कि आखिर इस दिल का किया जाए। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने एसपी सिटी विनीत भटनागर से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है।

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