वर्तमान चुनावों में राजनीतिक पार्टियां लोगों के बुनियादी जरूरतो व मुद्दों पर प्रचार व चर्चा करने के बजाए जनमानस के मनोभावों व संवेगों के सहारे चुनाव जीतना चाहती हैं, वे भय, मुक्त के लालच व चेहरों के भरोसे पर वोट पाना चाहते हैं।
इसके लिए नेता विभिन्न मनोवैज्ञानिक हथकंडे अपना रहे हैं जिससे मतदाताओं का मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर उनका वोट प्राप्त किया जा सके। मतदाताओं से अपील है कि दिल नहीं दिमाग से वोट देने का निर्णय करें। सभी अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें। हमारा वोट हमारे भविष्य, प्रदेश एवं देश की नीति एवं विकास की दिशा तय करता है।
डॉ मनोज कुमार तिवारी
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक
वाराणसी

