Tuesday, April 28, 2026
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गन्ने के खेत बन रहे तेंदुओं के पसंदीदा आरामगाह

  • पूरे प्रदेश में मानव और तेंदुओं के बीच निकटता बढ़ने से वन अधिकारी खासे चिंतित

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: वेस्ट यूपी में तेंदुओं के आबादी वाले इलाकों में आने का सिलसिला कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वन क्षेत्र से जुड़े इलाकों में स्थित गन्ने के खेत इनके पसंदीदा आरामगाह बनते जा रहे हैं। वैसे तो पूरे प्रदेश में तेंदुए और इंसानों के बीच संघर्ष चल रहा है, लेकिन वेस्ट यूपी इससे ज्यादा प्रभावित होने लगा है।

जहां जिम कार्बेट पार्क या पूर्वी उत्तर प्रदेश के जंगलों में रहने वाले बाघ प्राकृतिक आहार की कमी के कारण तेंदुओं को जंगल से खदेड़ रहे हैं। वहीं, हस्तिनापुर के आसपास के इलाकों में तेंदुए खाने की तलाश में आ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मेरठ और मुजफ्फरनगर में सेंचुरी से लगे गन्ने के खेतों के कारण इस जानवर का शहरी प्रेम बढ़ता जा रहा है।

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तेंदुआ और इंसानों के बीच आए दिन हो रहे संघर्ष से अब परंपरागत तरीकों से निपटना मुमकिन नहीं रह गया है। लिहाजा तेंदुओं के लिए जंगल से बाहर कम्युनिटी रिजर्व विकसित करने होंगे, जहां उन्हें सुरक्षित वास स्थान और भोजन मिल सके। वन विभाग के अधिकारी इस बाबत योजना तो बना रहे हैं, पर उस पर अमल की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई होती हुई नहीं दिख रही है।

वहीं, दूसरी ओर घनी आबादी वाले इलाकों में तेंदुए के आने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में आने वाले तेंदुओं को जंगल में छोड़ने से काम नहीं चल रहा है। वे दोबारा जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों और गांवों में आ जाते हैं। लिहाजा इनके लिए कम्युनिटी और कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाएं। जहां से ये दोबारा आबादी क्षेत्र में लौट न सकें।

कम्युनिटी रिजर्व ग्राम सभा या निजी भूमि पर बनाए जा सकते हैं। डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि मेरठ में रेस्क्यू सेंटर बनाये जाने हैं। यहां डॉक्टर के साथ रैपिड रिस्पांस फोर्स भी होगी, जो कहीं तेंदुए के होने की सूचना मिलने पर उसे तत्काल पकड़ेंगे। फिर रेस्क्यू सेंटर में कुछ दिन रखने के बाद तेंदुए को जंगल में छोड़ा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2018 में तेंदुओं की संख्या 12,852 थी जबकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार वाले शिवालिक और गंगा के मैदानी इलाकों में 1,253 तेंदुए पाए गए। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया था कि जंगलों के तेजी से कटने के कारण तेंदुओं के रहने की जगह कम हो ररही है। मेरठ में तीन बार तेंदुआ आया। इसके अलावा किठौर और परीक्षितगढ़ में तेंदुओं को कई बार देखा गया। मुजफ्फरनगर में तो तेंदुए कई बार देखे जा चुके हैं।

एक अद्द जाल और सरकारी सिस्टम पर सवाल

शुक्रवार को जनपद के वन विभाग की टीम के दावों की पोल खुल गई। वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के च लते पांच मिनट की देरी दस घंटे तक रेस्कयू आपरेशन विभागीय अधिकारियों को चलाना पड़ा। तेंदुए को पकड़ने के लिए मात्र एक जाल लेकर वन विभाग की टीम पल्लवपुरम पहुंची। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का तेंदुए ने भी फायदा उठाया और जाल से बाहर निकलकर भाग गया।

जिसके बाद लगभग 10 घंटे तक तेंदुए को पकड़ने के लिए आपरेशन चलाया गया। दिन भर जहां वन विभाग की टीम परेशान रही। वहीं, स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी परेशान दिखाई दिए। हालांकि बाद में वन विभाग की टीम को मात्र एक तेंदुए को पकड़ने के लिए 15 जाल बिछाने पड़े और दस घंटे के बाद आपरेशन को सफलता मिली।
वन विभाग की टीम तमाम तरह के दावे करती है, लेकिन यह दावे सिर्फ शुक्रवार को हवा-हवाई साबित हुए। वन विभाग की टीम की लापरवाही साफ उजागर हुई। टीम की लापरवाही के कारण ही यह आपरेशन 10 घंटे तक चलाना पड़ा। दिल्ली, बिजनौर और नोएडा से टीम बुलानी पडी।

अगर टीम का स्थानीय लोग साथ न देते तो शायद यहां भी टीम को कामयाबी न मिलती। वन विभाग की टीम के पास पर्याप्त मात्रा में साधन न होने के कारण आम जनमानस में भी विभागी अधिकारियों की बेहद फजीहत हुई। वन विभाग की से ओंकार सिंह द्वारा ट्रेंक्यूलाइजर गन से तेंदुए को बेहोशी का शॉट दिया गया। जिसके बाद तेंदुआ टीम की गिरफत में आ सका।

दो इंजेक्शन और पिंजरे में ‘कैद’

घर में घुसे तेंदुए को वन विभाग की टीम ने पकड़ने का प्रयास भी किया था, लेकिन वह जाल को तोड़कर भाग गया था। जिसके बाद वह पल्लवपुरम में एक खाली प्लाट की झांड़ियों में जाकर छिप गया। तेंदुए को पकड़ने के लिए मेरठ वन विभाग की सात टीमों और दिल्ली की दो टीमों ने करीब नौ घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया। रेस्क्यू के लिए हस्तिनापुर से बड़े जाल मंगाए गए जिनकों प्लाट में बिछाकर तेंदुए को पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन वह जाल में नहीं फंसा। जिसके बाद डा. आरके सिंह द्वारा ट्रेंकुलाइजर गन से दो इंजेक्शनों का वार तेंदुए पर किया गया और वह बेहोश हो गया। दिल्ली से रेस्क्यू के लिए डा. पलाश को भी बुलाया गया था।

तेंदुए को पकड़वाने में स्थानीय लोगों का भी रहा भरपूर सहयोग

पल्लवपुरम में तेंदुए को पकड़ने के लिए जहां वन विभाग की टीम भ्रसक प्रयास कर रही थी। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी टीम का भरपूर सहयोग किया। खाली पड़े प्लाट में चारों और टेंट स्थानीय लोगों द्वारा लगवाया गया। इसके बाद ही वन विभाग की टीम ने जाल बिछाने शुरू किए। क्षेत्रीय पार्षद विक्रांत ढाका सुबह से लेकर शाम तक वन विभाग के इस आपरेशन में जुटे रहे। लगभग 10 घंटे तक चले इस आपरेशन में टीम को कामयाबी जरूर मिली, लेकिन इस आपरेशन में स्थानीय लोगों का भरपूर सहयोग रहा। इस आपरेशन में स्थानीय लोगों में गौरव चौहान, मनिंदर विहान, दुर्गेश पांडेय, डा. विजय शर्मा आदि शामिल रहे।

सोशल मीडिया पर फैली आग की तरह सूचना

सोशल मीडिया पर तेंदुए के पल्लवपुरम में होने की सूचना आग की तरह फैल गई। फेसबुक और वाट्सऐप के अलावा अन्य साइटों पर भी लोगों ने वीड़ियों बनाकर डाली। दिन भर आसपास के लोग भी दहशत में रहे। जिसके चलते लोग एक-दूसरे से जानकारी लेते हुए फोन पर नजर आए।

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