Wednesday, January 26, 2022
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विधानसभा चुनाव 2022: मुजफ्फरनगर में बसपा प्रत्याशी बिगाड़ सकते हैं गठबंधन का समीकरण

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6 विधानसभा सीटों में से 4 पर घोषित किये गया मुस्लिम प्रत्याशी

एक बार फिर बसपा ने इस्तेमाल की सोशल इंजीनियरिंग

नगर सीट से पाल प्रत्याशी पर लगाया दांव


जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: विधानसभा चुनाव 2022 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। बहुजन समाजवादी पार्टी ने मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभा सीटों में से 4 पर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देकर पासा फेंक दिया है। बसपा के इस पासे से गठबंधन के समीकरण बिगड़ने के आसार बन गए हैं।

गौरतलब है कि बहुजन समाजवादी पार्टी सोशल इंजीनियरिंग के लिए जानी जाती है। इसी इंजीनियरिंग के चलते ही बसपा ने यूपी विधानसभा में एक बार बड़ी जीत हासिल भी की थी। इस बार भी बसपा सोशल इंजीनियरिंग को इस्तेमाल कर रही है, जिसके चलते मुजफ्फरनगर में 4 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है, जबकि एक सीट पर पाल प्रत्याशी तथा दूसरी सीट पर दलित प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।

बता दें कि मुजफ्फरनगर में बसपा का पुराना दबदबा रहा है परंतु गत चुनाव में भाजपा की लहर के चलते जनपद से बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था। बसपा अपनी पुरानी फ़ॉर्म हासिल करने के लिए एक बार फिर सोशल इंजीनियरिंग इस्तेमाल कर रही, जिस सीट पर जिसका दबदबा है उसी को टिकट थमाया जा रहा है।

जनपद की विधानसभा सीटों की बात करें तो बुढ़ाना विधानसभा सीट पर मुस्लिमों का दबदबा है और यहां पर मुस्लिमों की वोट के सहारे विधायक बनते आये हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर बसपा ने हाजी अनीस को अपना प्रत्याशी बनाया है। चरथावल विधानसभा सीट से पूर्व राज्यमंत्री सईदुजमा के पुत्र सलमान सईद पर अपना दांव लगाया है।

खतौली विधानसभा सीट से भी माजिद सिद्दीकी को टिकट दिया गया है तो नहीं मीरापुर विधानसभा सीट से भी मोहम्मद सालीम को प्रत्याशी बनाया गया है। इसी तरह मुजफ्फरनगर सदर सीट पर पाल वोट बैंक का दबदबा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए बसपा ने पुष्पांकर पाल को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि पुरकाजी विधानसभा सीट पर सुरेंद्र पाल सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है।

बसपा द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा किए जाने के बाद गठबंधन के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं, क्योंकि रालोद-सपा गठबंधन से एक भी मुस्लिम प्रतयाशी नहीं है। माना जा रहा है कि चुनाव के समय मुस्लिम प्रत्याशियों के मैदान में होने के कारण मुस्लिम वोट में ध्रुवीकरण हो सकता है, जिसका सीधा-सीधा नुकसान गठबंधन को पहुंचेगा।

चंद्रशेखर कि गठबंधन से नहीं बन सकी बात                                

भीम आर्मी के संस्थापक व आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर की सपा-रालोद गठबंधन से बात नहीं बन सकी है, जिसके चलते वह भी अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारेंगे। जिला पंचायत चुनाव में चंद्रशेखर द्वारा उतारे गए प्रत्याशियों में अच्छी खासी जीत हासिल की थी, जिसके बाद उनका राजनीतिक वजूद भी बनना शुरू हो गया था। चंद्रशेखर ने भी बसपा की तरह सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया था और अधिकतर अपनी पार्टी से मुस्लिमों को प्रत्याशी बनाया था। अब देखना है विधानसभा चुनाव में चंद्रशेखर क्या रणनीति अपनाएंगे।

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