Friday, January 28, 2022
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हाल बेहाल: गैस चैम्बर में तब्दील हो रहा शहर

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में वायु प्रदूषण दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते लोगों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल होता जा रहा है। लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद मेरठ सहित एनसीआर के सभी जिलों में हालात काफी खराब हो चुके हैं। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ जैसे जिलों में स्थिति खराब होती जा रही है। दिल्ली में स्कूल-कालेज तक बंद हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मेरठवासी सुधरने को तैयार नहीं हैं।

लगातार बढ़ते प्रदूषण से सांस और दमा के रोगियों की परेशानी और बढ़ रही है। इन सबके बावजूद मेरठ में बिल्डिंग मटीरियल खुले में सड़क किनारे बेचा जा रहा है। जबकि नगर निगम की ओर से इसे लेकर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन हालात जस के तस हैं। दुकानदारों में इसका कोई डर नहीं दिखाई दे रहा है।

मेरठ में एक्यूआई वर्तमान में 300 के आसपास है। यहां भी गंगानगर, शास्त्रीनगर, बेगमपुल समेत सभी इलाकों में अलग-अलग आंकड़े मिल रहे हैं। वायु प्रदूषण के स्तर को रोकने के लिये दिल्ली में जहां तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। जैसे आॅफिसों में वर्क फ्रॉम होम किया जा रहा है। स्कूलों में छुट्टियां कर दी गयी  हैं।

यहां मेरठ में भी ऐसे हालात न हो इसके लिये अभी बेहतर प्रयास करने की जरूरत है। यहां वायु प्रदूषण कम करने के लिये कोई विशेष कार्य नहीं किया जा रहा है। यहां अब भी सड़कों पर खुलेआम बिल्डिंग मटीरियल बेचा जा रहा है। जबकि दो दिन पूर्व नगर निगम की ओर से अभियान चलाकर कई दुकानों पर कार्रवाई की गई थी, उन पर खुले में बिल्डिंग मटीरियल जैसे रोड़ी, बदरपुर, रेत आदि बेचने को लकर जुर्माना लगाया गया था, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई के बाद भी हालात सुधरने को तैयार नहीं है।

शुक्रवार और शनिवार को भी शहर में गढ़ रोड, बागपत रोड, दिल्ली रोड समेत कई जगहों पर खुले में बिल्डिंग मटीरियल बिकते मिले। हापुड़ रोड की बात करें तो यहां लोहियानगर रोड पर जुबैर ट्रैडर्स के यहां खुले में यह सब बेचा जा रहा है। जिस कारण समस्या बनी है। यही हाल मंगलपांडेनगर का भी है। यहां भी मंगलपांडेनगर में मेन रोड पर खुले में बिल्डिंग मटीरियल रखा हुआ है। यहां न तो पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही उसके ऊपर कोई पॉलीथिन आदि ढककर रखा जा रहा है।

उधर, मेरठ में रोजाना के एक्यूआई की बात करें तो यहां 305 एक्यूआई चल रहा है। मौसम विभाग की मानें तो जब हवा की रफ्तार में तेजी नहीं आती तो तब तक प्रदूषण का असर घटना मुश्किल है। उधर, नगर निगम की ओर से गाड़ियों से छिड़काव भी कराया जा रहा है, लेकिन हालात नहीं सुधर पा रहे हैं।

डिवाइडरों के दोनों ओर जमा है धूल-मिट्टी

शहर में कई मुख्य मार्गों जैसे दिल्ली रोड, बागपत रोड, गढ़ रोड सभी पर मार्ग के बीच में स्थित डिवाइडर के दोनों ओर धूल काफी मात्रा में जमा है। जब भी यहां से वाहन तेजी से गुजरते हैं तो यह धूल लोगों को नुकसान पहुंचाती है। मेरठ में रैपिड का कार्य चल रहा है। जिस कारण समस्याएं और भी बढ़ गई हैं।

रैपिड रेल के कार्य के कारण दिन भर धूल मिट्टी उड़ रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसके कंस्ट्रक्शन के कार्य पर रोक लगाने का कार्य नहीं किया जा रहा है। सभी मुख्य मार्गों में धूल मिट्टी के कारण लोगों को निकलना वहां से मुश्किल हो रहा है।

बागपत रोड की बात करें तो यहां हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां दिन भर धूल और मिट्टी उड़ती रहती है। यहां बागपत रोड बाइपास के पास तो हालात और भी ज्यादा खराब हो चुके हैं, लेकिन यहां पानी का छिड़काव तक नहीं कराया जा रहा है।

फिजा में जहर घोल रहे ‘दबंग’ कोल्हू संचालक
कोल्हू में खुलेआम जलाया जा रहा प्रतिबंधित ईंधन

सरूरपुर: एक और जहां प्रदूषण के चलते मेरठ सहित वेस्ट यूपी प्रदूषण की चादर से ढका हुआ है और सुप्रीम कोर्ट एनजीटी ने प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए जहां तमाम फैक्ट्री, किसानों पर पराली जलाने पर शिकंजा कस रखा है। वहीं, दूसरी ओर बावजूद इसके क्षेत्र में कोल्हू संचालक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

प्रशासन और कोर्ट की आंखों में धूल झोंककर कोल्हू संचालक खुलेआम प्लास्टिक का कचरा और चमड़ा आदि जला रहे हैं। जिससे क्षेत्र बेहद जहरीले धुएं की चपेट में है और प्रदूषण का स्तर 500 के करीब पहुंच चुका है, लेकिन इन दबंग कोल्हू संचालकों पर सुप्रीम कोर्ट और प्रशासन की तिरछी नजर नहीं पड़ी है। जिसके चलते इनके हौसले बुलंद है और तमाम नियम कायदों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सरूरपुर क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी तथा प्रशासन की आंखों में खुलेआम धूल झोंककर कोल्हू संचालक दबंगई दिखा रहे हैं। खुलेआम दबंगई पर उतरे कोल्हू संचालक दिन में ही प्रतिबंधित खतरनाक प्लास्टिक, चमड़ा, रबर जलाकर खतरनाक जहरीला धुआं उड़ा रहे हैं।

जिससे क्षेत्र में बच्चों का सांस लेना तक दूभर हो चला है तो वहीं, प्रदूषण भी एक खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट एनजीटी और प्रशासन की रोक के चलते करनाल हाइवे पर मौजूद कई कोल्हू संचालक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं और कोल्हू में प्रतिबंधित प्लास्टिक का कचरा चमड़ा, लेदर व कपड़ा आदि खुलेआम चला रहे हैं।

इससे जहरीले धुएं का गुब्बार फिजाओं में घुल रहा है और लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, लेकिन तमाम नियम कायदे ताक पर रखते हुए इन दबंग कोल्हू संचालकों पर फिलहाल शासन-प्रशासन की नजर तिरछी नहीं हो पाई है।

जिसके चलते इनके हौंसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और प्रतिबंधित सामान जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसे लेकर क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से भी शिकायत की, लेकिन आरोप है कि कोई ठोस कार्रवाई इनके खिलाफ नहीं हो पाई।

जिसके चलते इनके हौंसले अब भी बुलंद बने हुए हैं और फिजा में जहर घोलने का कार्य खुलेआम कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में स्थानीय प्रशासन के नुमाइंदों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

  • शहर के साथ देहात की भी होने लगी आबोहवा खराब
  • देहात में कोल्हू उगल रहे जहरीला धुआं, घुट रहा दम
  • कोल्हुओं पर रबर, प्लास्टिक और पॉलीथिन जलाने से बढ़ा रहा वायु प्रदूषण

 मोदीपुरम: एक माह से वायु प्रदूषण ने लोगों का सांस लेना दूभर कर रखा है। देहात क्षेत्रों में कोल्हू भी जहरीला धुआं उगल रहे हैं, जिन पर खोई के साथ-साथ भारी मात्रा में रबर, पॉलीथिन और प्लास्टिक भी फुंकी जा रही है। एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का बहुत बुरा हाल हो गया है।

घर से बाहर निकलते ही प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। जहरीले धुएं में सांस लेने में दिक्कत होती है। ग्रामीण क्षेत्र में कोल्हू भी जहरीला धुआं उगल रहे हैं। नियम यह है कि कोल्हुओं पर प्लास्टिक, रबर और पॉलीथिन नहीं जलाई जा सकती, लेकिन कोल्हुओं पर खोई के साथ-साथ बिना रोक-टोक के जलाई जा रही हैं।

कोल्हू चलाने वाले प्लास्टिक, रबर आदि के साथ खोई को जलाते हैं, जिससे कोल्हू की चिमनियों से निकलने वाला धुआं बेहद ही जहरीला हो जाता है।

पराली जलाने से वायु प्रदूषण के फैलने का हल्ला है, इसके साथ-साथ जिले में कुकुरमुत्ते की तरह लगे गन्ना कोल्हुओं का धुआं भी हवा को जहरीला बना रहा है। कोल्हुओं की चिमनी मानक के अनुरूप नहीं बनाई गई हैं, जिससे निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण में घुल जाता है।

शहर में बढ़ता प्रदूषण जहां शहर की फिजा को खराब कर रहा है। वहीं, अब धीरे-धीरे देहात की भी फिजा खराब होने लगी है, क्योंकि प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन देहात क्षेत्र में गन्ने के कोल्हू कहीं न कहीं शहर की आबोहवा खराब कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण गन्ने के कोल्हू ऊपर पॉलीथिन का जलना और प्लास्टिक का जलना मुख्य कारण बना हुआ है।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सर्दी के मौसम में प्रदूषण में इजाफा देखने को मिल रहा है। हाल ही में मेरठ प्रदूषण के लिहाज से सबसे खराब शहरों में अव्वल स्थान पर रहा है। मेरठ में बढ़ता प्रदूषण तमाम लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अगर समय रहते इस प्रदूषण की रोकथाम नहीं हुई तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे।

शहर के साथ-साथ अब देहात क्षेत्र की भी आबोहवा जहरीली होने लगी है। देहात क्षेत्र में जगह-जगह गन्ने के कोल्हू लगे हुए हैं। कुछ कोल्हुओं पर प्रदूषण विभाग के मानकों के अनुसार जलाई जा रही है, लेकिन कुछ कोल्हू पर पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे प्रदूषण में सबसे अधिक इजाफा होना शामिल है।

हालांकि प्रदूषण विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो देहात क्षेत्र के इंचौली और खरदौनी गांव में लगभग 52 गन्ने के कोल्हू लगे हुए हैं। विभाग का दावा है कि पांच पर पेनाल्टी लगाई गई है। जबकि कई कोल्हू को बंद करा दिया गया है। अब देखना है कि विभाग द्वारा इनके खिलाफ क्या क्या कार्रवाई की जाती है।

ये हो रही है परेशानी

कितने ही कोल्हू आबादी के बीच में संचालित हो रहे हैं, जिनसे निकलने वाले धुएं लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। कोल्हुओं से निकलने वाले जहरीले हुए से आंखों में जलन, एलर्जी और सांस लेने में परेशानी की समस्या उत्पन्न हो रही है। कोल्हुओं के धुएं के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।

फेफड़ों में आ जाती है सूजन

देहात में चारों ओर फैले कोल्हुओं के कारण यहां की आबोहवा में मानक से अधिक वायु प्रदूषणकारी कण की मात्रा बढ़ गई है। इसके अलावा हवा में मौजूद कण मानकों के अनुसार नहीं मिल रहा है। वायु प्रदूषण बढ़ने से लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा भी नसीब नहीं हो रही है। इससे ग्रामीणवासी तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उधर, सब कुछ जानते हुए भी विभागीय अधिकारी अंजान बने हैं।

जयभीमनगर में रहा सबसे अधिक प्रदूषण

शनिवार को जयभीमनगर में सबसे अधिक प्रदूषण रहा। जयभीमनगर का प्रदूषण 308 के करीब पहुंच गया। जिसके चलते लोगों को यहां सांस लेने में भी दिक्कत महसूस हुई है।

इंचौली और खरदौनी गांव में लगभग गन्ने के 52 कोल्हू लगे हुए हैं। कुछ कोल्हू पर पॉलीथिन और प्लास्टिक जलती हुई मिली। जिन्हें तुरंत बंद करा दिया गया है। जबकि पांच पर पेनाल्टी लगाई गई है। अन्य कोल्हू पर भी पॉलीथिन चलाई जा रही है। जो विभाग के मानक के अनुरूप है। जहा विभाग के मानक के अनुरूप कार्य होगा विभाग द्वारा तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।
-डा. योगेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी

इन शहरों में प्रदूषण का स्तर

  • मेरठ 285
  • गाजियाबाद 344
  • मुजफ्फरनगर 267
  • बागपत 337
  • ग्रेटर नोएडा 320
  • हापुड़ 317

मेरठ के इन स्थानों का प्रदूषण का स्तर

  • गंगानगर 277
  • पल्लवपुरम 271
  • जयभीमनगर 308
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