Tuesday, April 28, 2026
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शहर में ई-रिक्शा के खिलाफ अभियान शुरू, 57 सीज

  • हापुड़ अड्डे से भूमिया पुल तक चलाया गया अभियान
  • दिवाली के चलते रोकी गई थी ई-रिक्शा के विरुद्ध कार्रवाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यातायात पुलिस ने अवैध और अपंजीकृत ई-रिक्शा के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। पहले दिन अभियान के दौरान 57 ई-रिक्शाएं सीज किए गए हैं। यह अभियान अब चलता रहेगा। हाईकोर्ट में केस, आईजी नचिकेता झा की फटकार और शहर के लोगों की रोजमर्रा की जाम की मुसीबत इन तमाम बातों के चलते ट्रैफिक पुलिस शुक्रवार के अवैध ई-रिक्शाओं के खिलाफ पूरे रंग में नजर आयी। उसने शहर में अभियान शुरू किया। पहले दिन हापुड़ अड्डे से भूमिया पुल के मार्ग को लिया गया और यहां धरपकड़ शुरू की गयी। यह धरपकड़ उन ई-रिक्शों पर शुरू की गयी है जो अपंजीकृत हैं या स्टीकर नहीं लगवाया है।

महानगर में इस वक्त करीब 60 हजार ई-रिक्शा सड़कों पर हैं। इनमें से ज्यादातर का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। यातायात पुलिस ने उन ई-रिक्शों पर स्टीकर नहीं लगाया जो अवैध हैं या फिर जिनके कागजात पूरे नहीं हैं। टैÑफिक पुलिस जानकारी की बात करें तो महज 3426 ई-रिक्शाएं ऐसी हैं जिन पर स्टीकर लगाए गए हैं तथा जिनको यह रूट आवंटन किया गया है। दरसअल, महानगर को जाम की मुसीबत से निकालने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने महानगर के चार जोन में बांट दिया है।

तय किया गया है कि केवल आवंटित जोन में ही ई-रिक्शाओं को सख्ती से संचालन कराया जाएगा। वहीं, इस संबंध में एसपी ट्रैफिक राघवेन्द्र मिश्रा का कहना है कि बगैर स्टीकर लगी व अपंजीकृत ई-रिक्शाओं के खिलाफ अभियान छेड़ दिया गया है। उधर, अवैध ई रिक्शाओं के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले मनोज चौधरी ने बताया कि वह रिजॉइंटर दायर करेंगे। संभवत 15 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट में सुनवाई

हाईकोर्ट में मेरठ की अवैध ई-रिक्शाओं को लेकर रिट दायर की गयी है। इसको लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई जारी है। यह सुनवाई भी चीफ जस्टिस की कोर्ट में चल रही है। कोर्ट ने मेरठी अफसरों से अवैध ई-रिक्शाओं की वजह से लगाने वाले जाम की मुसीबत से शहर को लोगों के निजात दिलाने के लिए रिपोर्ट तलब की है, लेकिन अब लग रहा है कि शीघ्र ही शहर जाम मुक्त होगा।

न उम्र की सीमा और न ही लाइसेंस का बंधन

महानगर की सड़कों को रौंद रहे ई-रिक्शा के हैंडल जिनके हाथों में नजर आते हैं। उनमें अक्सर वो होते हैं। जिनके लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। जैंडर की बात करना तो बेमान होगा। अक्सर भीड़ वाले इलाकों में किशारों के हाथों में ई-रिक्शा के हैंडल नजर आते हैं या फिर ऐसे उम्रदराज भी ई-रिक्शा दौड़ाते देखे जा सकते हैं जो जिंदगी के 70 से ज्यादा बसंत देख चुके हैं। उम्र के इतर कभी भी ई-रिक्शाओं के लाइसेंसों की चेकिंग होते नहीं देखी जाती।

हाइवे पर वापसी यात्रा का नहीं कोई विकल्प

मोदीपुरम: एनएच-58 स्थित सिवाया टोल प्लाजा पर आने-जाने के टोल शुल्क को लेकर बड़ा खुलासा आरटीआई के तहत हुआ। टोल प्रबंधन से मांगी गई जानकारी के अनुसार हाइवे पर यात्रा करते समय वापसी के विकल्प को सिरे से खारिज कर दिया है। यह जानकारी टोल प्रबंधन ने दी है। इतिहासकार अनिल गांधी ने बताया कि सिवाया टोल प्लाजा पर आने-जाने दोनों के लिए पूरा टोल लिया जाता है। जबकि एनएचएआई शुल्क नियम, 1997 के अनुसार, यदि एक दिन में एक से अधिक बार उस सड़क या पुल को पार करना हो

तो प्रयोक्ता के पास विकल्प है कि वह डेढ़ गुना टोल भरकर वापसी यात्रा के टोल में आधे टोल की छूट पा सकता है, लेकिन अब टोल को फास्टेग के माध्यम से काटा जाता है, इसलिए वाहन चालकों के पास यह विकल्प नहीं है। इस संबंध में मैंने आरटीआई डाली थी। जिसमें उन्होंने उत्तर दिया है कि वापसी यात्रा का कोई विकल्प नहीं है। केवल यही ऐसा टोल प्लाजा है, जो अनेक प्रयोक्ताओं से धोखाकर लूट रहा है। बाकी अन्य प्लाजाओं पर 24 घंटे में वापसी पर आधा टोल लिया जाता है।

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