
हाल ही में दिल्ली में झुग्गियों को लेकर सियासत गरमाई हुई है। जहां विपक्ष इस बात लेकर सरकार को घेर रहा हैं वहीं दूसरी ओर सरकार अपना पक्ष रखकर जनता को समझाने में लगी हुई है। बीते रविवार को केजरीवाल ने एक बार फिर बैक किया व आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में झुग्गियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी की गारंटी झूठी, फर्जी और नकली है। आगे कभी जिंदगी में मोदी की गारंटी पर भरोसा मत करना। केजरीवाल ने यह भी कहा कि चुनाव के समय मोदी ने आपको गारंटी दी थी, ‘जहां झुग्गी-वहां मकान।’ उनका मतलब था-‘जहां झुग्गी-वहां मैदान।’ वो ये कहना चाहते थे मुझे वोट दे दो, मैं सारी झुग्गियां तोड़ दूंगा और मैदान बना दूंगा। इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी का कहना है कि केवल अवैध झुग्गियों पर ही कार्यवाही हो रही है। जिन लोगों ने रेलवे लाइन से बिल्कुल सटाकर व ऐसी जगह जहां उनकी जान को खतरा है उन झुग्गियों पर ही डेमोलेशन होगा वो भी कोर्ट के आदेश के अनुसार। इस मामले को लेकर दिल्ली के गृहमंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार किसी भी गरीब का आवास नहीं उजाड़ेगी। उन्होंने कहा कि समाज के सबसे गरीब व्यक्ति का कल्याण करना भाजपा का लक्ष्य है।
अब सवाल यही है कि क्या पक्ष-विपक्ष केवल झुग्गियों में उलझ कर अपनी राजनीति करेगी या अन्य योजनाओं पर बात व काम भी होगा। जैसे कि केजरीवाल सरकार की मोहल्ला क्लीनिक योजना अब आगे नहीं बढ़ रही। बीजेपी ने मोहल्ला क्लीनिक को आयुष्मान आरोग्य मंदिर रखा लेकिन अब तक वह कहीं भी शुरू होते नहीं दिखे। हालांकि बीते लगभग दो वर्षों से अधिकतर मोहल्ला क्लिनिक बेहाल अवस्था में ही थे, जिसको लेकर दिल्ली की जनता बहुत नाराज थी लेकिन बीजेपी ने इसमें परिवर्तन करके आगे संचालित करने की बात कही थी और इस पर शुरुआत से काम करने को लेकर कहा गया था लेकिन यह विफल होती दिख रही है। इसके भी तमाम अहम व महत्वपूर्ण योजनाएं हैं जिस पर काम होना था, लेकिन अभी सब शून्य है। जैसा कि दिल्ली में बीजेपी की सरकार बने लगभग पांच महीने हो चुके हैं और सरकार का हनीमून पीरियड खत्म हो गया। अब सरकार को अपनी वादों के अनुसार काम करना चाहिए क्योंकि दिल्ली एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां बीजेपी को ढाई दशक से भी अधिक समय बाद अपनी सत्ता काबिज करने का मौका मिला है।
बीजेपी के अनुसार 2500 रुपये हर महीने मिलने वाली योजना उन महिलाओं के लिए है जिनको सालाना 3 लाख से कम सैलरी मिलती है और वो टैक्स स्लैब में नहीं आती हैं। ऐसी महिलाएं जो सरकारी नौकरी नहीं करतीं और उनकी उम्र 18 से 60 साल के बीच है। जिन महिलाओं को सरकार से कोई भी वित्तीय सहायता नहीं मिलती है। इसके अलावा जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे हैं, उन्हें हर महीने 2500 रुपये वाली योजना का फायदा नहीं होगा। इस पर भाजपा सरकार ने कडेÞ नियम लाने की बात भी कही थी। हालांकि इस योजना को लेकर बीजेपी ने 5100 करोड़ रुपये का बजट पारित किया भी किया हुआ है। इसको लेकर विपक्ष ने तंज मारते हुए कहा कि एक तरफ संघ के कुछ नेता हिंदुओं को दस बच्चे पैदा करने के लिए लोगों के लिए प्रेरित करते हैं तो यह योजना तो किसी के काम नहीं आने वाली। ज्ञात हो कि बीजेपी सरकार ने शपथ भी नहीं ली थी और सबसे पहले यमुना की सफाई शुरू करते ही वहां आरती भी शुरू कर दी थी, जिसको लेकर जनता बहुत प्रभावित हुई लेकिन उसके बाद कुछ खास काम होता नहीं दिखाई दिया। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने बीजेपी की रेखा गुप्ता सरकार को काउंटर करते हुए कहा कि यमुना की सफाई को लेकर किए गए दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। यादव ने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार ने यमुना सफाई को अपनी प्राथमिकता बताया था, परंतु पानी की गुणवत्ता जांच ने सच्चाई बता दी। दिल्ली के सातों स्थानों पर जल गुणवत्ता खराब पाई गई है।
बहरहाल, समय के रहते बीजेपी को धरातल पर काम करना होगा। गुणवत्ता व भरोसे के आधार पर जनता ने वोट दिया है तो उसके विश्वास को बनाए रखने के लिए योजनाओं व विकास पर काम होना चाहिए। अब सावन का मौसम आने आ गया और दिल्ली मे जल भराव से पूरा शहर ठप पड़ जाता है और मानव जीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त सा होने लगता है इसको लेकर अभी तक कोई रणनीति नही दिख रही वहीं अभी भी कई इलाकों में पानी की आपूर्ति को लेकर परेशानी जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा तो सबसे बड़ी चुनौती सर्दियां आते ही शुरू होगी, जिससे दिल्ली की सबसे बड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ेगा और वो है प्रदूषण चूंकि जैसे दिल्ली में सर्दियां आती है वैसे ही प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि लोगों को जीना मुहाल होता जाता है।

