Monday, May 17, 2021
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प्रशासन के लाख दावों के बावजूद आक्सीजन सिलेंडर की किल्लत जस की तस

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  • सरकारी हो या निजी पहले तो बेड ही मिलना मुश्किल, फिर आॅक्सीजन सिलेंडर के भी लाले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अपनों को सांस देने के लिए तीमारदार अलसुबह से ही प्लांटों में लाइन में लग जाते हैं। दिल में दर्द और आंखों में आंसू लिए बस इसी आस में रहते हैं कि बस किसी तरह से एक आॅक्सीजन सिलेंडर मिल जाए। भैया! सुबह से ही लाइन में लगा हूं बस किसी भी तरह एक सिलेंडर मिल जाए नहीं तो मेरे चाचा दम तोड़ देंगे। यह हाल था उद्योग पुरम स्थित अग्रवाल गैस प्लांट का।

कोई अपनी मां तो कोई अपने पिता और चाचा के लिये यहां आॅक्सीजन का इंतजाम करने आया था। आॅक्सीजन तो यहां मिल रही थी, लेकिन लोगों को डर सता रहा था कि कहीं देर न हो जाये। यहां लाइन में लगे लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने आॅक्सीजन को लेकर अपनी जद्दोजहद के बारे में बताया।

अग्रवाल गैस प्लांट पर लोग मंगलवार सुबह पांच बजे से ही लाइन में लगकर आॅक्सीजन लेने का इंतजार कर रहे थे। इनमें कुछ अपने पिता की सांसों के लिये इंतजाम में लगा था तो कोई अपने चाचा। किसी की आंख में आंसू थे तो कोई अपने बच्चे को गोद में लिये आॅक्सीजन का इंतजाम कर रहा था।

खरखौदा निवासी नकुल ने बताया कि वह अपने चाचा के लिये आॅक्सीजन का इंतजाम करने आया है। उसके चाचा खरखौदा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती है। सिलेंडर नहीं मिल पाने के कारण वह दम तोड़ देंगे। मैं उनके लिये ही यहां आॅक्सीजन सिलेंडर लेने आया हूं। मुझे डर सता रहा है कि कहीं अधिक देर न हो जाये।

ढढरा निवासी सर्वेश ने बताया कि उनकी मौसी की तबीयत कई दिनों से नाजुक चल रही है। रीता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टर का कहना कि जल्द ही अगर आॅक्सीजन की व्यवस्था नहीं की गई तो उनकी तबीयत और खराब हो जाएगी। वह भी आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

किठौर निवासी शहजाद ने बताया कि एक दिन पूर्व ही उनके भाई को किठौर स्थित अमन अस्पताल में भर्ती कराया था। आॅक्सीजन लेवल की कमी हो रही है। जिसके चलते उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। भाई की जिंदगी बचाने के लिये आॅक्सीजन की आवश्यकता है जिसके लिये यहां लाइन में लगा हूं।

लावड़ निवासी शहीद उत्कल ने बताया कि उनकी मां का उपचार चार दिन से मोदीपुरम स्थित एक अस्पताल में चल रहा है। उन्हें आॅक्सीजन की आवश्यकता है। डॉक्टरों ने आॅक्सीजन जल्द से जल्दी लाने के लिये कहा है। उन्हीं के लिये मैं आॅक्सीजन की व्यवस्था करने में लगा हूं।
माहेश्वरी आॅक्सीजन प्लांट पर गाजियाबाद से पहुंचे लोग

आॅक्सीजन प्लांट पर व्यवस्था बनाने को की गई बैरिकेडिंग

मंगलवार को सभी आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन वितरित की गई। इस दौरान दूसरे शहरों से भी मेरठ लोग आॅक्सीजन लेने पहंचे। यहां कुछ लोग ऐसे भी थे जो बीच लाइन में से ही आॅक्सीजन लिये बिना वापस लौट गये। इस बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जिसके लिये आॅक्सीजन चाहिए थी, जब वो ही नहीं रहे तो आॅक्सीजन का क्या करेंगे। यह एक नहीं कई लोगों के साथ ऐसा हो रहा है। कोई सही व्यवस्था न होने के कारण लोगों को समय पर आॅक्सीजन नहीं मिलती और व बीच में ही दम तोड़ देते हैं।

शहर में सभी प्लांटों पर मंगलवार को आॅक्सीजन वितरित की गई। माहेश्वरी प्लांट पर सैकड़ों की संख्या में लोग आॅक्सीजन लेने पहुंचे। यहां लोग लाइन में लगे थे और इस उम्मीद में थे कि आज तो सिलेंडर मिल ही जाएगा। दो दिन हंगामा होने के बाद मंगलवार को यहां पुलिस प्रशासन की व्यवस्था की गई थी और प्लांट के बाहर बैरिकेडिंग भी गई। जिससे यहां जाम की स्थिति न बने और लोग लाइन में लगकर परेशान न हो।

यहां लोगों को टोकन देकर सिलेंडर बांटे गये। बता दें कि यहां कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें तत्काल आॅक्सीजन की आवश्यकता थी, लेकिन उन्हें नहीं मिल पाई और उनके मरीज की मौत हो गई और वह बीच लाइन को छोड़कर ही वापस लौट गये। कुछ लोग ऐसे भी थे जो दूसरे जिलों से यहां सुबह से ही लाइन में लगे थे और आॅक्सीजन मिलने का इंतजार कर रहे थे। अमित और राजेश दोनों भाई हैं और वह यहां मेरठ में माहेश्वरी प्लांट पर गाजियाबाद से आॅक्सीजन लेने के लिये पहुंचे।

वह यहां जब पहुंचे तो काफी देर हो चुकी थी। शाम का वक्त हो चुका था और उनके पहले ही सैकड़ों की संख्या में लोग लाइन में लगे थे। अब उनका नंबर आ पाना मुश्किल था। इसके चलते उन्हें मंगलवार को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही थी जिसके लिये वह अब यहां रातभर रुकने को तैयार हो गये। उन्होंने कहा कि वह अब सुबह को यहां से आॅक्सीजन लेकर ही जाएंगे।

आम पब्लिक भी नहीं मान रही, स्टॉक करने में लगी आॅक्सीजन

आम पब्लिक और अस्पताल संचालक वर्तमान में आॅक्सीजन स्टॉक करने में लगे हैं जिस कारण उन लोगों को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही है जिन्हें उसकी अधिक जरूरत है। आॅक्सीजन प्लांटों पर सुबह ही लाइन लग जाती है आॅक्सीजन लेने के लिये। कुछ लोग बिना वजह ही आॅक्सीजन ले जाते हैं और कुछ ऐसे ही अपनी बारी का इंतजार करते रह जाते हैं। इसे लेकर प्रशासन की ओर से भी अस्पताल संचालकों और लोगों से आॅक्सीजन हॉल्ड न करने की अपील की गई है।

जिले में लगातार चल रही आॅक्सीजन की किल्लत को दूर करने के लिये प्रशासन एक्टिव मोड में है। जिसके चलते आॅक्सीजन अस्पतालों में आॅक्सीजन की आपूर्ति बहाल रखने के लिये प्रशासन की ओर से 24 घंटे कोशिश की जा रही है। एडीएम सिटी ने बताया कि जिले को निर्धारित किये गये आॅक्सीजन के कोटे के मुताबिक जिले में आॅक्सीजन की कोई कमी नहीं है, लेकिन लोग आॅक्सीजन को होल्ड कर रहे हैं।

जिससे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिलें में पांच आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन सिलेंडर रिफिल किये जा रहे हैं। जहां से जिले के सभी अस्पतालों को भी आॅक्सीजन की सप्लाई हो रही है। जिनमें से 32 कोविड अस्पताल सहित तीन नॉन कोविड अस्पताल भी हैं।

इसके साथ जिले में बनाये गये दो सेंटरों में से रोज 600 से 800 सिलेंडर ऐसे मरीजों को दिये जा रहे हैं, जो होम आइसोलेशन में हैं। जिले में पर्याप्त मात्रा में आॅक्सीजन हैं, लेकिन लोग दहशत के मारे आॅक्सीजन को हॉल्ड कर रहे हैं। जिससे उन लोगों को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही है, जो लोग वास्तव में आॅक्सीजन के हकदार हैं। लोगों ने कई-कई हजार में भी खरीदकर सिलेंडर अपने घरों में ले जाकर रख लिये हैं।

ब्लैक की जा रही आॅक्सीजन

बता दें कि कुछ लोगों ने इसे धंधा बना लिया है। लोग सुबह लाइन में लग जाते हैं और 500 रुपये में सिलेंडर लेकर उसे तीन हजार से चार हजार मुंह मांगे दामों में बेच रहे हैं। आॅक्सीजन की कालाबाजारी खुलेआम चल रही है। आॅक्सीजन की इस कालाबाजारी को रोकने के लिये प्रशासन ने भी सख्ती से कार्य करना शुरू कर रखा है। प्रशासन की ओर से इस तरह के मामलों पर नजर रखी जा रही है, लेकिन वह इसे रोकने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।

मेरठ बार ने आॅक्सीजन और बेड के लिए जिला जज को लिखा पत्र

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महावीर सिंह त्यागी ने जिला जज मेरठ को एक पत्र भेजा है। जिसमे उन्होंने बताया कि जिला गाजियाबाद में डीएम ने कोरोना पॉजिटिव अधिवक्ताओं के लिए हॉस्पिटल में 25-25 बेड रिजर्व किये जाने के आदेश पारित किए हुए है। महावीर सिंह त्यागी ने बताया कि मेरठ में वकील, न्यायिक अधिकारी व कचहरी न्यायालय स्टाफ कोरोना से लगातार पीड़ित हो रहे है।

ऐसी स्थिति में बेड व पर्याप्त आॅक्सीजन न मिल पाने के कारण मेरठ कचहरी के कई अधिवक्ताओं की मृत्यु हो चुकी है। इसको देखते हुए बार एसोसिएशन ने जिला जज मेरठ को एक पत्र लिखा है और उसमें डीएम मेरठ के. बालाजी से मेरठ बार एसोसिएशन को त्वरित मेडिकल इलाज में सहायता के लिए प्रतिदिन 25 आॅक्सीजन सिलेंडर व किसी भी हॉस्पिटल में बेड सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

जिला जज ने जमानत की सुनवाई के लिए बनाई बेंच

जिला जज मेरठ ने वकीलों द्वारा जो जमानत प्रार्थना पत्र ई-फाइल के द्वारा दाखिल हुए है उसको वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण/अपर जिला जज प्रभु नारायण पांडेय द्वारा किया जा रहा है। वहीं, वकीलों ने बताया कि 28 अप्रैल से पूर्व भौतिक रूप से जमानत प्रार्थना प्रस्तुत है। उनका निस्तारण नही हो पा रहा है। जिसको देखते हुए जिला जज मेरठ ने आदेश दिया है कि 28 अप्रैल से पूर्व दाखिल जमानत प्रार्थना पत्र के लिए जो भी तिथि नियत की जाएंगी उसका निस्तारण भी ई-फाइलिंग से प्राप्त प्रार्थना पत्रों के साथ किया जाएगा।

मेरठ-हापुड़ के अस्पतालों को आॅक्सीजन प्लांट के लिए एक करोड़ देंगे सांसद

सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने मंगलवार को मेरठ मंडल के आयुक्त सुरेंद्र सिंह से मुलाकात कर मेरठ और हापुड़ के अस्पतालों तथा होम आइसोलेशन के कोरोना मरीजों को आॅक्सीजन मिलने में हो रही परेशानी के संबंध में चर्चा की। आयुक्त ने आॅक्सीजन व्यवस्था को शीघ्र ठीक कराने का आश्वासन दिया है। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मेरठ तथा हापुड़ में पीएम केयर फंड से आॅक्सीजन प्लांटों को भारत सरकार ने स्वीकृत किया है।

इनकी स्थापना का कार्य आरंभ किया जा चुका है। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने मेरठ तथा हापुड़ में आॅक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए आॅक्सीजन जेनरेटर व अन्य उपकरण खरीदने के लिए सांसद निधि से एक करोड़ देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त सांसद ने मेरठ मेडिकल कॉलेज मैं कोविड-19 बेड की वृद्धि के लिए आयुक्त से चर्चा की।

अधिकारियों का दावा: रोजाना सप्लाई हो रहे 3000 सिलेंडर

शहर में एक तरफ जहां आॅक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। वहीं दूसरी ओर अधिकारी दावा कर रहे है कि शहर में आॅक्सीजन की कोई कमी नहीं है और प्रतिदिन तीन हजार सिलेंडर वितरित किए जा रहे है। एडीएम सिटी की मानें तो इस वक्त शहर में पांच स्थानों से आॅक्सीजन सप्लाई हो रही है। जिनमें दो जगहों से होम आइसोलेशन के मरीजों को आॅक्सीजन दी जा रही है।

एडीएम सिटी अजय कुमार तिवारी का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के अलावा इस वक्त शहर में 33 कोविड अस्पताल है। इन सभी कोविड सेंटरों के अलावा नॉन कोविड अस्पतालों में प्रतिदिन करीब तीन हजार आॅक्सीजन सिलेंडर वितरित किए जा रहे है। उन्होंने बताया कि जब यह अफवाह उड़ने लगती है कि आॅक्सीजन की सप्लाई नहीं होगी तो ऐसे में अस्पताल प्रबंधन और आम आदमी आॅक्सीजन सिलेंडर को होल्ड कर लेते हैं। जिस कारण आॅक्सीजन की कमी पड़ जाती है।

ऐसे में प्लांट से आॅक्सीजन सिलेंडर रिफिल होने व ट्रक में लोड होने से लेकर अस्पताल तक पहुंचने में लंबा समय लग जाता है, जिस कारण अस्पताल में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। एडीएम सिटी ने अपील करते हुए कहा कि ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दिया जाए और अस्पतालों में खाली सिलेंडर होल्ड न किया जाए। ताकि समय रहते आपूर्ति की जा सकें। उन्होंने कहा कि मेरठ से ही दिल्ली व हरियाणा में भी एक कोटे के तहत आॅक्सीजन भेजी जा रही है। ऐसे में शहर में फिलहाल आॅक्सीजन की कोई कमी नहीं है।

मंगलवार को हुई 3734 आॅक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति

शहर में मंगलवार को सभी आॅक्सीजन प्लांटों से 3734 आॅक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति हुई। इनमें कन्सल गैस एजेंसी से 1094, मेडिआॅक्सी बिजौली से 1387, अग्रवाल गैस एजेंसी से 305, कृष्ण एयर प्रोडक्ट से 285 व माहेश्वरी गैस एजेंसी से 683 आॅक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति निजी व अस्पताल संचालकों को की गई। इस तरह पांचों प्लांटों से कुल मिलाकर 3734 आॅक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति की गई।

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