- आजादी के समय का है शहर में खंदक बाजार
- खंदक में होता था खादी का उत्पादन, इसलिए पड़ा नाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्रांतिधरा न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक 1857 की आजादी की लड़ाई के लिये विश्वविख्यात है, अपितु खादी उद्योग में भी मेरठ ने अपनी ‘धाक’ जमा रखी हैं। मेरठ का खंदक बाजार आजादी के समय का बाजार है। इस बाजार का नाम खंदक इसलिये पड़ा क्योंकि यहां खादी का उत्पादन हुआ करता था। पूरे भारत में खादी उत्पादन में उत्तर प्रदेश का 84 प्रतिशत योगदान रहा हैं। अध्ययनों के अनुसार पूर्व सिंधु सभ्यता 2800 ईसा में कपड़ों के बुनकरों का विकास हुआ।
मेरठ का खंदक बाजार खादी का हिंदुस्तान में सबसे पुराना बाजार माना जाता हैं। खादी का उत्पादन गांधी के समय से चरखे पर होता था, फिर पावरलूम आये और अब शटल लेस मशीनों द्वारा किया जाता है। इस समय मेरठ शहर में 5000 से ज्यादा शटल लेस मशीन हैं और 10000 पावरलूम फैक्ट्री हैं। मेरठ में करीब 70 प्रतिशत अंसारी बिरादरी इस कपडे के उत्पादन से जुड़ी है।
शहर का होलसेल मार्केट
खंदक बाजार मुख्य रूप से बेडशीट, गद्दे के कवर, सोफा कवर, खादी के कपड़े, पर्दे, दोहर, रजाई, गिलाफ के लिये जाना जाता है। पूरे बाजार में लगभग 480 दुकानें हैं। ये पूरा बाजार 95% होलसेल में काम करता है, पर 5% दुकानें ऐसी भी हैं जो रिटेल का काम करती है और खुले में कपड़ों के पीस बेच देती हैं।
अन्य राज्यों तथा देशों में जाता है सामान
मेरठ के खंदक बाजार से कपड़ा उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागो में तथा राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, असम, साउथ, बिहार, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों में भेजा जाता है। साथ ही नेपाल और भूटान तथा अन्य देशों में भी निर्यात होता है।

अपना उचित मुकाम तलाशता शहर का खंदक बाजार
इतना पुराना होने के बावजूद शहर का खंदक बाजार देश में उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाया है। जहां आज गुजरात का सूरत या जयपुर जैसे मार्केट है। इसका मुख्य कारण कभी शहर में फैली हिंसा रही तो कभी राजनीतिक उपेक्षा का शिकार बन गया मेरठ का खादी उद्योग।
व्यापारियों के लिए चुनौतियां
‘जनवाणी’ टीम ने जब व्यापारियों की समस्या जानी तो उन्होंने कहा कि व्यापारियों को सस्ता लोन मिलना चाहिए, सब्सिडी मिलनी चाहिए जोकि 33% ही मिल रही है। सरकार द्वारा शहर को एक इंडस्ट्रियल एरिया मिलना चाहिए।
जिसमें कपड़े का कारोबार हो सके। व्यापारियों के लिए आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है, बिजली का कनेक्शन व्यापारियों का कहना है कि पावर लूम पर रीडिंग के हिसाब से बिल आने के वजह से उनको मुनाफा नहीं हो पता। इसलिये एक निर्धारित रेटिंग तय कर देनी चाहिए। जिससे की उनका बिल कम आये।
तीसरी पीढ़ी चला रही कारोबार
अनुज हैंडलूम फैक्ट्री के मालिक अनुज गोयल बताते है कि उनकी तीसरी पीढ़ी यह कारोबार चला रही है। ये दुकान उनके दादा मिठल लाल गोयल ने 1978 में खोली थी। इसके बाद उनके पिताजी रतनलाल गोयल ने इस कारोबार को संभाला और अब उनके बड़े भाई अंकुर गोयल जोकि इस समय के प्रधान हैं, दोनों मिलकर संभाल रहे हैं।
थोक का यूपी का सबसे बड़ा मार्केट
शिवम टैक्सटाइल के मालिक पूर्व प्रधान प्रवीण अरोड़ा बताते हैं कि ये थोक का उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा मार्केट है। उनका साल का टर्नओवर 6 से 7 करोड़ आता है। उनके यहां खादी की चादर और कपड़ा बनने से लेकर पैकिंग तक की सारी सुविधाएं हैं।
पर्दे का काम
कृष्णा हैंडलूम के मालिक प्रवेश मित्तल बताते हैं कि इस बाजार में पर्दों का काम आये अभी 10 वर्ष हुए हैं। इस बाजार में कुल 15 से 20 दुकानों पर पर्दा बनाने का काम किया जाता है।
डिजिटल नहीं आया
हरी टैक्सटाइल के मालिक आशीष मिश्रा बताते हैं कि मेरठ में सोफा कवरेज के लिये डिजिटल प्रिंटिंग की सुविधा अभी नहीं आयी है।

