Tuesday, April 21, 2026
- Advertisement -

ई-रिक्शा, आटो बिगाड़ रहे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था

  • जनवाणी संग कचहरी में अधिवक्ताओं ने ट्रैफिक व्यवस्था पर दागे कई सवाल, पब्लिक परेशान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: वर्तमान में शहर में अगर कोई समस्या है तो सबसे पहले ट्रैफिक की समस्या लोगों की जुबान पर आती है। चूंकि इस समस्या से हर कोई व्यथित है। शहर की सड़कों और चौराहों पर गौर किया जाये तो यहां ई-रिक्शाओं और आॅटो का जमावड़ा और उनका बेतरबीब से चलना ट्रैफिक की सबसे मुख्य समस्या के रूप में जाना जाता है। इन ई-रिक्शाओं के जरिये शहर की सड़कों पर लगने वाले जाम से हर कोई आहत है।

शहर में ट्रैफिक की समस्याओं को अधिवक्ताओं ने गंभीर माना है। इसके लिए उन्होंने भी हर तरफ ई-रिक्शाओं और ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की लापरवाही को जिम्मेदार माना है। वहीं, किसी हद तक लोगों द्वारा सड़कों पर ट्रैफिक नियमों का पालन न करना भी एक कारण बताया है। शहर की सड़कों और चौराहों पर लगने वाले जाम और बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्थाओं के लिए अधिवक्ताओं ने भी ई-रिक्शाओं व आॅटो की अधिकता और उनका नियम विरुद्ध चलना सबसे बड़ा कारण बताया है।

01 3

अधिवक्ताओं ने शहर की ट्रैफिक समस्या के लिए ट्रैफिक पुलिस कमियों की लापरवाही पर भी सवाल दागे। वहीं उनके द्वारा वाहन चालकों से लिये जाना सुविधा शुल्क भी एक बड़ी समस्या माना है। जिसकी वजह से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था तो बिगड़ती ही है। वहीं, जाम लगने पर लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

ट्रैफिक पुलिस कर्मी करते हैं लापरवाही

मेरठ बार एसोसिएशन अध्यक्ष रोहताश अग्रवाल से जब शहर में बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था के बार में बात की गई तो उनका कहना था कि जब तक ट्रैफिक पुलिसकर्मी लापरवाह रहेंगे। तब तक इस समस्या से निजात पाना मुश्किल है। शहर के ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए होमगार्ड का सहारा लिया जाता है। जिनसे शहर का ट्रैफिक पूर्णरूप से कंट्रोल नहीं हो पाता है।

बिना लाइसेंस के चल रहे ई-रिक्शा व आटो

पूर्व महामंत्री बार एसोसिएशन के अधिवक्ता संजीव त्यागी ने शहर में बिगड़ी ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में बताया कि जो अवैध कट हैं। उसमें ई-रिक्शा वाले घुस जाते हैं और वहां से निकलकर दूसरे वाहनों के सामने लेकर खड़े हो जाते हैं। जो जाम लगा देते हैं। बिना लाइसेंस के ई-रिक्शा चल रहे हैं। जिससे शहर में जाम की समस्या ने एक बड़ा रूप ले लिया है।

सुचारू रूप से नहीं जलती ट्रैफिक लाइट

प्रदीप गौतम एडवोकेट ने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्थित होना चाहिये। ट्रैफिक लाइट खराब हैं। सुचारू रूप से नहीं चलती हैं। ट्रैफिक पर पुलिस का नियंत्रण नहीं है। यही वजह है कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था अत्यंत खराब स्थिति में है। अगर इनके लाइसेंस चेक करवा लिये जाये तो जाम की समस्या से बहुत निजात मिल सकती है और पब्लिक को परेशान नहीं होना पड़ेगा।

पार्किंग की होनी चाहिए व्यवस्था

संजय शर्मा पूर्व महामंत्री बार एसोसिएशन का कहना है कि शहर में वाहनों की पार्किंग के लिए जब तक व्यवस्था नहीं होगी। तब तक ट्रैफिक व्यवस्था का हाल ऐसा ही रहेगा। सड़कों के किनारे खड़े हॉकर्स भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। उनके लिए उचित व्यवस्था बैठने की होनी चाहिये। वहीं शहर की सड़कों पर होने वाला अतिक्रमण भी इसके लिए उत्तरदायी है। चौराहों का चौड़ीकरण होना चाहिए।

02 3

ई-रिक्शा चालक नहीं करते नियमों का पालन

तरुण ढाका पूर्व महामंत्री ने कहा कि ई-रिक्शा जो चल रही है, ये ट्रैफिक रुल फॉलो नहीं करते। कोई भी व्यक्ति ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करता। रुल जब तक फॉलो नहीं होंगे। तब तक व्यवस्था सही नहीं होगी। ई-रिक्शा किसी भी गाड़ी और कार के सामने आकर खड़े हो जाते हैं। जिससे सड़कों पर भयंकर जाम लग जाता है।

ट्रैफिक कंट्रोल हो तो बने कुछ बात

राजपाल सिंह अधिवक्ता ने भी शहर की ट्रैफिक समस्या के लिए ई-रिक्शाओं को बेहद जिम्मेदार मानते हुए इन पर कंट्रोल करने की बात कही है। वो बिल्कुल इनएक्टिव है। होमगार्ड ट्रैफिक कंट्रोल नहीं कर सकते। ट्रैफिक पुलिसकर्मी जब तक सुविधा शुल्क लेना बंद नहीं करेंगे। तब तक व्यवस्था बिगड़ी रहेगी। जो लोग रांग साइड से आ रहे हैं, उन्हें रोका नहीं जाता, ऐसे ही जाम लगता रहेगा।

ट्रैफिक कर्मी नहीं निभाते ड्यूटी धर्म

स्वर्ण सिंह अधिवक्ता ने भी शहर की ट्रैफिक समस्या के लिए उचित पार्किं ग व्यवस्था का न होना और ट्रैफिक पुलिस द्वारा सही तरह से अपनी ड्यूटी नहीं निभाना। इसके लिए मुख्य कारक हैं। ट्रैफि क पुलिस जो सड़कों पर रहती है। उधर ई-रिक्शा चलाने वालों के पास भी लाइसेंस नहीं है। इस समस्या के लिए ई-रिक्शा वाले जिम्मेदार हैं।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

अगली पीढ़ी के एआई का खाका

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने उल्लेखनीय प्रगति की है। ध्वनि...

12वीं के बाद खुलेंगे कॅरियर के द्वार

डॉ विजय गर्ग भारत में छात्र अक्सर 12वीं कक्षा पूरी...

विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष खुश क्यों है?

पहले भक्त अपने दिमाग का इस्तेमाल करते थे लेकिन...

सड़कें न बनें मौत के रास्ते

सड़कें जीवन को जोड़ने के लिए बनाई जाती हैं,...
spot_imgspot_img