- ऊर्जा भवन में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: केंद्र राज्य सरकारों के निजीकरण की नीति के विरोध एवं अन्य प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए बुधवार को ऊर्जा भवन में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
जिसमें विभिन्न मांगों को लेकर संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2020 एवं विद्युत वितरण के निजीकरण हेतु लाए जा रहे। इसलिए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट को नष्ट किया जाए। वहीं, निजीकरण की केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ एवं पुंड्डेचेरी व किसी भी प्रांत में चल रही प्रक्रिया वापस ली जाए। साथ ही ग्रेटर नोएडा निजीकरण व आगरा में फ्रंचाईजी करार रद करे।
सभी ऊर्जा निगम को एकृकित कर उत्पादन पारेषण को एक साथ रखते हुए केरल के केएसईबी लिमिटेड, हिमाचल प्रदेश के एचपीएसईबी लिमिटेड की तरह उत्तर प्रदेश में भी यूपीएसईबी लिमिटेड गठित करते हुए बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना वर्ष 2000 से लागू की जाए एवं नियमित पदों पर नियमित भर्ती करते हुए सभी रिक्त पदों विशेषताएं क्लास 3 क्लास 4 के सभी रिक्त भरे एवं संविदा कर्मचारियों का तेलंगाना की तरह नियमित किया जाए।
इसी प्रकार अन्य मांगो को मंच से उठाया गया। कार्यबहिष्कार सभा को संबोधित करते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संयोजक मेरठ इंजीनियर रोहित कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे निजीकरण से आम उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि निजीकरण के बाद तीव्र गति से बिल के रेट में बढ़ोतरी होगी। जिसका असर सीधे-सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संविदा कर्मियों को जितना वेतन दिया जा रहा है। उसमें घर का खर्चा चलाना संभव नहीं। इसलिए सरकार को तत्काल रुप से संविदा कर्मियों का वेतन बढ़ाना चाहिए। जिससे उनकों बढ़ती महंगाई में राहत मिल सकें। ई.रोहित कुमार ने कहा कि यह प्रदर्शन मेरठ हीं नहीं देश भर में लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियर, इंजीनियर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति केन्द्रीय आवाहन पर सभी जगह चल रहा है।
जिसमें उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने राजधानी लखनऊ सहित सभी जनपद एवं पर प्रदर्शन किया। कार्यबहिष्कार प्रदर्शन में सह संयोजक आरए कुशवाहा, मुख्य अभियंता ई-चिराग बसंल, अधीक्षण अभियंता इंजीनियर अनिल कुमार सिंह, इंजीनियर एके आत्रे, अधिशासी अभियंता इं केके तेवतिया एवं दिलमणि प्रसाद, मांगेराम, विवेक सक्सेना, विवेक वर्मा, एसके वर्मा आदि अन्य कर्मचारी एवं अधिकारी बड़ी संख्या में ऊर्जा भवन में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
विभाग को घाटे से उभारने के लिए सक्रिय रूप कार्य करें अधिकारी
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ऊर्जा विभाग को घाटे से उबारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बकायेदार उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बकाया जमा कराने के लिए भी प्रेरित कर है। जिसका उदाहरण एक मुश्त योजना थी। उसमें उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा एक बार में बिल जमा करने पर छूट प्रदान की जा रही।
एक मुश्त योजना लागू करने से सरकार रणनीति थी कि ज्यादा से ज्यादा बकायदार इस योजना का लाभ लेते हुए अपना बकाया जमा कराएं, लेकिन इस योजना का असर उतना देखनें को नहीं मिला जितना मिलना चाहिए थ। हालांकि ऊर्जा मंत्री के द्वारा दिए गए टारगेट को पूरा करने के लिए विभाग के अधिकारियों द्वारा भरपुर प्रयास किया गया था। उसके पश्चात भी उपभोक्ताओं ने इस योजना में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
इसी क्रम में विभाग को घाटे से उबारने के लिए ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने सख्त निर्देश जारी किए है। जिसमें उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अपने क्षेत्र में बकायेदारों से जल्द से जल्द बकाया जमा कराया जाए। ताकि विभाग को घाटे से निकालते हुए उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
बता दें कि लॉकडाउन अवधि से बिजली विभाग का बड़ा बकाया उपभोक्ताओं पर हैं। बिजली विभाग द्वारा बकाया राशि प्राप्त करने के लिए कई बार अभियान भी चलाए गए, लेकिन जिस प्रकार बकाया जमा होना चाहिए था। उस प्रकार नहीं हो पाया है।

