Wednesday, January 19, 2022
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किसानों की कामयाबी, संपूर्ण बंद

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  • कृषि विधेयक कानून के विरोध में किसानों का हाइवे पर चक्का जाम, जाम से हाइवे पर परेशान रहे यात्री

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: कृषि विधेयक कानून एवं किसानों की अन्य मांगों को लेकर सोमवार को भारत बंद को लेकर मिला-जुला असर देखने को मिला। किसानों ने हाइवे पर चक्का जाम किया। परंतु, व्यापारियों ने इस बंद का समर्थन न करते हुए बाजार खोला। कहीं-कहीं बाजार बंद दिखाई दिया। हाइवे पर जाम के दौरान वाहन चालक परेशान दिखे। हालांकि, किसानों ने एंबुलेंस को निकालने की व्यवस्था रखी। लेकिन, अन्य वाहन चालक किसानों के हाथ जोड़ते नजर आए।

सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के ऐलान को सफल बनाने के लिए किसान सुबह दस बजे से हाइवे पर जुटने शुरू हो गए। सिवाया टोल प्लाजा पर पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी, बबलू जिटौली आदि के नेतृत्व में जाम लगाया गया। जाम के दौरान वाहन चालकों का बुरा हाल रहा। किसानों ने हाइवे के बीच में ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी जाम लगाया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

दौराला पुलिस ने दौराला चौराहे से ट्रैफिक डायवर्ट करते हुए लावड़ और सरधना नहर की पटरी से निकाला। जाम के दौरान किसानों ने एंबुलेंस के लिए अलग जगह बनाई और परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों को भी जाने दिया। वहीं, जाम के दौरान किसानों की वाहन चालकों से जमकर नोकझोंक हुई। परंतु, किसानों ने वाहन चालकों को नहीं जाने दिया। पल्लवपुरम पुलिस ने एटूजेड के सामने वाहनों को रोककर रूट डायवर्ट किया।

इसके अलावा सकौती में भाकियू के जिला सचिव प्रशांत व संजय दौरालिया के नेतृत्व में चक्का जाम किया गया। जाम के दौरान किसानों ने हाइवे पर ही टैंट लगा दिया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रशांत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में 25 रुपये बढ़ोतरी कर ऊंट के मुंह में जीरा डालने वाली कहावत को सिद्घ किया है। संजय दौरालिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि कानून लागू कर किसानों की रीढ़ तोड़ने का कार्य किया है।

किसानों का धरना जब तक चलता रहेगा जब तक भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार सत्ता से बाहर नहीं हो जाती। जाम के दौरान एसडीएम सरधना अमित कुमार भारतीय पुलिस बल के साथ मौके पर डटे रहे। उन्होंने पुलिस बल के साथ आने वाले वाहनों को रूट डायवर्ट कर निकलवाया। वहीं, चक्का जाम के दौरान किसानों के लिए व्यापारी जय कुमार ने खाने की व्यवस्था की। सकौती में कुछ दुकाने बंद रही तो कुछ खुली रही। किसानों ने जिला उद्यान अधिकारी गंगपाल सिंह को प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

कृषि कानूनों के विरोध में किया प्रदर्शन

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कृषि कानूनों के विरोध में कमिश्नरी पर प्रदर्शन कर जिलाधिकारी कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा। सपा नेता सचिन यादव के नेतृत्व में छात्र जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां छात्रों ने कहा कि पिछले 10 माह से किसान धरने पर बैठे हैं, लेकिन किसानों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है। अगर यही हाल रहे तो किसान बर्बाद हो जाएंगे जिसका असद पूरे देश पर होगा। उन्होंने कार्यालय में दिये ज्ञापन में कृषि कानूनों को रद किये जाने की मांग की। उन्होंने तीनों कानूनों के कारण होने वाले नुकसान से विस्तार में बताया और इन कानूनों को खत्म करने की मांग की।

बंद की सफलता से किसान नेताओं की बांछे खिली

बंद की सफलता से किसान नेताओं के चेहरे और बांछें खिल गई है। क्योंकि आंदोलन को इस बंद की सफलता से मजबूत धार मिलेगी। आंदोलन की सफलता सरकार उन आलोचना करने वालों के मुंह पर तमाचा के समान है। क्योंकि भारत बंद किसी एक इलाके में नहीं हुआ, बल्कि पूरे भारत में बंद का असर देखा गया। वेस्ट यूपी में तो गाड़ियों के पहिए जाम रहे।
पूर्वी यूपी से भी हाइवे जाम की खबर है।

यह आंदोलन एक क्षेत्र का कहा जा रहा था, लेकिन जिस तरह से भारत बंद का असर पूरे देश में हुआ है, उससे स्पष्ट हो गया है कि आंदोलन को बंद की सफलता से मजबूती मिली है। किसान आंदोलन की आलोचना करने वालों ने फ्लॉप करने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारत बंद में किसानों का जबरदस्त सहयोग रहा। यही वजह है कि हाइवे पूरी तरह से बंद रहे।

इसमें जनता को मुश्किलों का सामना अवश्य ही करना पड़ा, लेकिन भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आम जनता से यह कहते हुए माफी भी मांगी कि सरकार किसानों की सुन नहीं रही, जिसके चलते रोड जाम करने जैसे कठोर निर्णय लेने पड़ रहे हैं।

क्योंकि जाम की समस्या से सर्वाधिक आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। हर जगह हाइवे पर पश्चिमी यूपी के मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अमरोहा, अलीगढ़, हाथरस, बरेली, संभल, रायबरेली, चंदौसी, मथुरा, बाराबंकी, शाहजहांपुर आदि स्थानों पर सड़कों पर जाम लगाने की खबरें मिली है। इस तरह से संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर किया गया। भारत बंद से किसानों के आंदोलन को और ताकत मिली। बंद की सफलता से किसान नेताओं की बांछें खिल गई है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान दु:खी है और आहत भी है। रास्तों को जाम करने के सिवाय उसके पास कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि सरकार किसान नेताओं से बातचीत करने को तैयार नहीं है। ऐसे में और कड़े फैसले भविष्य में लेने पड़ेंगे। देश भर के किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुट हैं। इस भारत बंद की सफलता से स्पष्ट हो गया है।

सुबह से शाम तक थमे रहे रोडवेज के पहिए, 85 लाख का नुकसान

कृषि कानून के खिलाफ भारत बंद से रोडवेज विभाग को भारी नुकसान हुआ। रोडवेज के तीनों डिपो पर करीब एक दिन में 85 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सोमवार को कृषि कानून के विरोध में किसानों का भारत बंद का ऐलान रोडवेज विभाग को भारी पड़ा। सुबह से शाम तक बसें डिपो पर ही खड़ी रही। इस दौरान यात्री परेशान घूमते रहे।

अधिकारियों के अनुसार एक दिन बसों के संचालन नहीं होने से विभाग को बडा नुकसान हुआ है। बता दें कि भैंसाली बस डिपो में 235 बसें है। इनमें से 90 से 100 बसों का रोजना संचालन होता है, जो अलग-अगल रूट पर संचालित होती है। एक बस से 20 हजार रुपये के करीब आमदनी होती है। सोमवार को सुबह कुछ बसें यात्रियों को लेकर बस स्टैंड से निकली, लेकिन चक्का जाम होने की वजह से जाम में फंस गई और जो बसें संचालित होनी थी, वह बस अड्डे पर ही खड़ी रही। अधिकारियों ने बताया कि तीनोें डिपो पर रोडवेज को प्रतिदिन की आय 90 लाख होती है, लेकिन बंद के चलते सुबह और शाम को ही बसों का संचालन हो पाया। बाकी समय बस अड्डे पर खड़ी रही। संचालन नहीं हो पाने की वजह से विभाग को 80 से 85 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़।

दिनभर यात्री रहे परेशान

सोमवार को भारत बंद के चलते रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यात्री बस अड्डे पर परेशान घूमते रहे। बसों की इंतजार में यात्री दोपहर की कड़ी धूप में इस आस में कि बस अड्डे पर खडे रहे कि शायद कोई बस आ जाए और वह दिल्ली गाजियाबाद आदि स्थानों के लिए जा सके। परिवार के साथ अड्डे पर परेशान घूम रहे यात्री ब्रजमोहन ने बताया कि उसे दिल्ली जाना है दो घंटे से अड्डे पर खडे हैं, कोई बस नहीं मिल रही है। एक अकेला ब्रजमोहन ही नहीं बल्कि कई ऐसे यात्री कोई धूप में तो कोई अड्डे पर लगी टीन शेड के नीचे बैठा बस का इंतजार करता दिखा।

भारतीय किसान यूनियन ने भारत बंद में झोंकी ताकत, कई जगह लगाया जाम

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में भारत बंद के आह्वान पर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी और कंकरखेड़ा में तीन जगह जाम लगाया। इस दौरान अग्निशमन दल की गाड़ी, एंबुलेंस और सेना की गाड़ी को निकालने का रास्ता दिया गया। अन्य किसी लोगों को ज्यादा परेशानी न हो इसके लिए समानांतर कुछ रास्ते की व्यवस्था भी की गई। उनका यह चक्का जाम उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को जगाने के लिए था। लेकिन भारतीय जनमानस के लिए परेशानी नहीं देने का भी संकल्प मानसिक रूप से लिया गया था।

इसी दृष्टि से एनएच-58 पर कैलाशी हॉस्पिटल के पास, मेरठ-करनाल मार्ग पर नंगलाताशी डिवाइडर रोड और जंगेठी गांव में जाम लगाया गया था। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान मोर्चा के पूर्व महानगर अध्यक्ष मेराज मलिक के नेतृत्व में नेशनल हाइवे पर कैलाशी हॉस्पिटल के निकट हाइवे पर जाम लगाया गया। उन्होंने दो टूक कहा कि भारतीय किसान यूनियन का मकसद लोगों को परेशान करना नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा पास के गए तीन कृषि बिल किसानों के हित में नहीं है। जिनको सरकार वापस नहीं ले रही।

किसान इन्हीं बिलों की वापसी और फसल का एमएसपी रेट की गारंटी के लिए आंदोलनरत है। यह मांग केंद्र सरकार मान ले तो आंदोलन समाप्त हो सकता है। लेकिन केंद्र सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान यहां पर आरती मालिक, गौरव तेवतिया, रफ्तार मलिक, गौरव ईलम और सतीश ईलम सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

मेरठ-करनाल मार्ग पर नंगलाताशी डिवाडर रोड के निकट अनुराग चौधरी और आकाश सिरोही के नेतृत्व में जाम लगाया गया। यहां नंगलाताशी डिवाइडर रोड के सामने काफी संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली और दोपहिया वाहन लगाकर रोड को जाम किया गया था। सेना के वाहन, एंबुलेंस और अग्निशमन दल की गाड़ी को आंदोलनकारियों द्वारा रास्ता दिया जा रहा था। वही स्कूल की गाड़ियों के लिए भी व्यवस्था की जा रही थी। यहां पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक जाम लगाया गया।

इसी मार्ग पर जंगेठी गांव के निकट भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी सत्यवीर के नेतृत्व में जाम लगाया गया। पुलिस अवस्था बनाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर गश्त करती रही। इस दौरान यहां पर आकाश सिरोही, वीरेंद्र सिंह, हैप्पी, विपुल, रोशन, पदम, हर्ष, सनी, सतेंद्र, छोटे, परवीन, बिजेंद्र आदि मौजूद रहे।

इंस्पेक्टर ने थाने का काम गाड़ी में निपटाया

इंस्पेक्टर तपेश्वर सागर ने अपने थाने के मुंशी कृष्ण शर्मा को सैकड़ों फाइल लेकर मेरठ करनाल मार्ग पर किसानों के जाम में ही बुला लिया और वहीं पर जीप में बैठकर थाने की फाइल को निपटाया। उधर, किसान नारेबाजी करते रहे तथा कुछ पुलिस वाले जाम के हालात को संभालने में लगे रहे और इंस्पेक्टर फाइल निपटाते रहे।

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