Sunday, October 17, 2021
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeUttar Pradesh NewsMeerutनियोजन में खेल: रास्ता है नहीं, फिर भी स्वीकृत कर दिया मानचित्र

नियोजन में खेल: रास्ता है नहीं, फिर भी स्वीकृत कर दिया मानचित्र

- Advertisement -
  • खैरनगर में पांच मंजिला आवासीय टावर निर्माण का है मामला

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: खैरनगर स्थित पांच मंजिला आवासीय टावर के स्वीकृत मानचित्र पर सवाल उठ रहे हैं। जिस स्थान से आवासीय टावर के लिए 40 फीट चौड़ा रास्ता दर्शाया गया हैं, वहां पर 50 वर्ष से दुकानें बनी हुई है। जब वहां पर दुकानें बनी हुई है तो फिर मानचित्र कैसे स्वीकृत कर दिया गया? यह बड़ा सवाल है।

मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) में नियोजन अनुभाग में क्या खेल हो रहे हैं,यह उसका जीता जागता उदाहरण हैं। यह हाल तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिपार्टमेंट का हैं,जहां पर नियमों के विपरीत क्या खेल कर दिया जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

यह तथ्य तो अलग है कि मानचित्र के विपरीत बिल्डिंग बना दी गई। बेसमेंट बना दिया, लेकिन मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया। बड़ी खबर तो यह है कि बिल्डर मुकेश अग्रवाल ने जो मानचित्र एमडीए में दाखिल किया है,उसमें साफ किया है कि बिल्डिंग का रास्ता खैरनगर बाजार से हैं, जो चालीस मीटर चौड़ी सड़क हैं।

यहां पर दो दुकानों को आन रिकॉर्ड ध्वस्त कर रास्ता होना दर्शाया गया हैं, लेकिन वर्तमान में मौके पर पहुंचकर देखा तो रास्ता कहीं नहीं हैं। मौके पर दुकानें बनी हुई हैं। दुकानों का निर्माण हुए करीब 50 वर्ष बीत गए हैं। दुकान वर्तमान में भी बनी हुई हैं।

हर रोज दुकान खुलती है और पूरा दिन कारोबार किया जाता है, लेकिन एमडीए के दस्तावेज में दुकान तोड़कर रास्ता दर्शाया गया हैं। इतनी बड़ी हेराफेरी मानचित्र स्वीकृत कराने में की जा सकती हैं,जो हैरत में डालने वाली बात हैं। प्राधिकरण इंजीनियर वैसे तो नगर निगम व प्रशासन की एनओसी मिले बिना मानचित्र तक स्वीकृत नहीं करते हैं।

आम आदमी को छह-छह माह तक चक्कर कटवाये जाते हैं, लेकिन इस मानचित्र को कैसे स्वीकृत कर दिया है, यह बड़ा सवाल है। इस प्रकरण की जांच पड़ताल कराई जाए तो प्राधिकरण के इंजीनियर व मानचित्र स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। एटीपी व टीपी ने मानचित्र स्वीकृति के लिए कैसे रिपोर्ट लगा दी? मौके पर गए भी थे या फिर नहीं। यह हालात मुख्यमंत्री के विभाग के है, बाकी विभागों के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल होगा।

What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
1

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

- Advertisment -spot_img

Recent Comments