Wednesday, April 29, 2026
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गरबा का सेहत से नाता

सभी ऋतुओं में कुछ न कुछ दोष शरीर में संचय होते हैं जो ऋतु परिवर्तन के समय प्रकट होकर कभी-कभी परेशान करते हैं। ऐसे अवसर पर नवरात्र मनाया जाता है। देवी उपासना की जाती है। उपवास किया जाता है। फलाहार ग्रहण किया जाता है। यह उपवास, फलाहार एवं गरबा लोकनृत्य शरीर के संचित दोष का दमन कर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है। व्यक्ति को प्रसन्न, चुस्त-दुरूस्त और स्वस्थ बनाता है। वैज्ञानिक एवं चिकित्सक भी इसके महत्त्व को स्वीकारते हैं। वे इस नृत्य से मिलने वाले चिकित्सकीय स्वास्थ्य लाभ को मानते हैं।

सीतेश कुमार द्विवेदी

देवी आराधना के पर्व क्वांर नवरात्र में नौ रात्रि तक गरबा करने की परंपरा है। गरबा गुजरात का एक प्रमुख व प्राचीन नृत्य है। इसमें रंग-संगीत की धुन पर लयबद्ध नाचने की प्रथा है। यह नृत्य गुजरात से ऊपर उठकर आज देश के कोने-कोने में प्रचलित एवं प्रिय हो गया है। विश्व में जहां भी गुजराती हैं, वहां यह पहुंच चुका है। इसकी लोकप्रियता ने इसे एक व्यवसाय का रूप दे दिया है।

ऋतु परिवर्तन के अवसर पर वर्ष भर में 4 बार नवरात्रियां मनाई जाती हैं जिनमें से चैत्र एवं क्वांर नवरात्र जागृत एवं शेष दो नवरात्र सुप्त हैं। इनमें से क्वांर के जागृत नवरात्र के अवसर पर गरबा लोकनृत्य नौ रात्रि तक करने की परंपरा है। इससे नर्तक-नर्तकी को अनेकानेक स्वास्थ्य लाभ मिलता है। सभी ऋतुओं में कुछ न कुछ दोष शरीर में संचय होते हैं जो ऋतु परिवर्तन के समय प्रकट होकर कभी-कभी परेशान करते हैं। ऐसे अवसर पर नवरात्र मनाया जाता है। देवी उपासना की जाती है। उपवास किया जाता है। फलाहार ग्रहण किया जाता है। यह उपवास, फलाहार एवं गरबा लोकनृत्य शरीर के संचित दोष का दमन कर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है। व्यक्ति को प्रसन्न, चुस्त-दुरूस्त और स्वस्थ बनाता है। वैज्ञानिक एवं चिकित्सक भी इसके महत्त्व को स्वीकारते हैं। वे इस नृत्य से मिलने वाले चिकित्सकीय स्वास्थ्य लाभ को मानते हैं।

गरबा से सेहत का गहरा नाता

नवरात्र आते ही स्त्री पुरूष, आबाल वृद्ध सभी गरबा को लेकर उत्साहित हो जाते हैं। गरबा में माता की भक्ति का फल तो मिलता ही है, साथ ही स्वास्थ्य को सही रखने के लिए भी यह बहुत लाभदायी माना जाता है। इस अवधि में प्रत्येक रात 3-4 घंटे गरबा करने से मोटापा तो कम होता ही है, साथ ही पूरे शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है जिससे बीपी, शुगर व हृदय रोग नियंत्रण रहता है। पाचन ठीक रहता है। पेट की बीमारियां दूर होती हैं। भूख खुलकर लगती है। भोजन भली प्रकार से पचता है। त्वचा कांतिमय व शरीर लचीला बनता है।

यह हाथ, पैर, हड्डी एवं मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। जोड़ों के दर्द को दूर करता है। मन को प्रसन्न रखता है। शरीर चंचल हो जाता है। इसका संगीत तनाव दूर कर मस्तिष्क सही रखता है। नृत्य के बाद थकावट से नींद भी भरपूर व गहरी आती है। गरबा हर दृष्टि से सेहत के लिए लाभदायी है। इसका मधुर संगीत तनावमुक्त करता है।

शारीरिक व्यायाम

गरबा हो या कोई भी नृत्य हो, वह एक प्रकार से शारीरिक एक्सरसाईज का काम करता है। जो लोग योग आदि करने से कतराते हैं, उनके लिए यह बहुत बढ़िया होता है। इस नृत्य में लगातार हाथों व पैरों की गतिविधि से शरीर के समस्त अंगों में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। इससे सभी अगों में रक्त पहुंच जाता है जिससे त्वचा, चेहरे में चमक आती है। साथ ही चयापचय बढ़ जाता है। इस अवधि में भूख अच्छी व अधिक लगती है। खानपान पर ध्यान रखने से शरीर को सही ऊर्जा मिलती है। शरीर लचीला हो जाता है, जोड़ खुल जाते हैं।

बढ़ा वजन कम होना

गरबा नृत्य से भरपूर शारीरिक व्यायाम होता है जिससे शरीर में जमा वसा, खर्च होकर मोटापा कम होता है। शरीर की सक्रि यता से बाडी फिट रहती है। नवरात्र में उपवास से खानपान में संयम बनता है। वजन कम करने में यह सहायक होता है। गरबा नृत्य के दौरान हाथ, पैर, कमर की गतिविधि में जमा वसा दूर होती है। व्यायाम की दृष्टि से पैदल चलना भी लाभप्रद होता है। फिर गरबा तो भरपूर श्रम वाले व्यायाम जैसा है। इससे तो और अधिक लाभ मिलता है।

तनाव होता है कम

गरबा नृत्य के दौरान व्यक्ति पूरी तरह उसमें मग्न हो जाता है। स्वयं को इसमें व्यस्त रखता है। वहां पर मधुर धुन के साथ गीत संगीत बजता रहता है जिससे हर प्रकार का तनाव व चिंता दूर होती है। गीत, संगीत, नृत्य एवं हंसी आनंद व सुख प्रदान करते हैं। व्यक्ति स्वयं गाता, गुनगुनाता है जिससे कंठ खुलता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। हृदय एवं फेफड़े का व्यायाम होता है जो इन अंगों को स्वस्थ बनाता है। अतएव नवरात्र के अवसर पर गरबा नृत्य करने का अवसर मिले तो उसमे शामिल जरूर हों और स्वास्थ्य लाभ पाएं।

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