Friday, January 28, 2022
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करोड़ों के सरकारी आवास हुए खंडहर

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  • रक्षापुरम में वाणिज्य कर विभाग ने ग्रेड वन अधिकारियों के लिये 2001 में बनाये थे आवास
  • 100 वर्ग मीटर से भी अधिक जमीन में बने हैं 30 से अधिक फ्लैट
  • फ्लैटों के दरवाजे और खिड़कियां तक ले गये असामाजिक तत्व
  • अनदेखी के चलते हो रहा करोड़ों का नुकसान, कर्मचारियों ने की यहां रहने की मांग

ऋषिपाल सिंह |

मेरठ: जहां लोगों को सिर छुपाने के लिये एक कमरा तक नहीं मिल पाता हैं। वहीं, वाणिज्य कर विभाग के ग्रेड वन आॅफिसरों के लिये 20 साल पहले 32 फ्लैट रक्षापुरम में बनाये गये थे, लेकिन आज तक इन फ्लैटों में कोई रहने नहीं आया। हालात ये हैं कि इन फ्लैट के खिड़कियां दरवाजे तक असामाजिक तत्व ले गये।

करोड़ों रुपये के फ्लैट विभागीय लापरवाही से खंडहर में तब्दील हो गये हैं, लेकिन कोई इनकी सुध लेने वाला नहीं है। इसके लिये सरकार के करोड़ों रुपये इनके निर्माण में खर्च हुए, लेकिन इसकी जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है।

बता दें कि वर्ष 2001 में वाणिज्य कर विभाग के ग्रेड वन रैंक के आॅफिसरों के लिये गंगानगर क्षेत्र के रक्षापुरम में 32 फ्लैटों का निर्माण एमडीए द्वारा कराया गया था। इन फ्लैटों के निर्माण में जमीन समेत विभाग के करोड़ों रुपये खर्च हुए थे। यह फ्लैट तीन बीएचके में हैं, जो कि सवा सौ वर्ग मीटर से भी अधिक में बने हुए हैं।

गंगानगर क्षेत्र की पॉश कालोनियों में आता है। वर्तमान की बात करें तो यहां जमीन के रेट आसमान छू रहे हैं। इन फ्लैटों की बात की जाये तो 20 साल पहले बनाये गये इन फ्लैटों में अभी तक कोई अधिकारी नहीं रहने आया। किसी भी क्लास वन आॅफिसर ने यहां रहना पसंद नहीं किया। जबकि अधिकारी मंगलपांडे नगर स्थित वाणिज्यकर विभाग के आसपास ही किराये पर रहना पसंद कर रहे हैं।

फ्लैटों की खिड़कियां, दरवाजे तक उखाड़ ले गये चोर

इन फ्लैटों की वर्तमान स्थिति की बात करें तो यहां फ्लैटों पर लोहे की खिड़कियां और दरवाजे लगे थे। मोटी रकम खर्च कर इन्हें बनाया गया था, लेकिन आज इनकी देखरेख करने वाला भी कोई नहीं है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण फ्लैटों की खिड़कियां और दरवाजे तक चोर ले गये।

आसपास के लोगों की मानें तो यहां शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। शराब आदि खरीदने के लिये लोग यहां खिड़कियों तक को चुराकर ले गये हैं। फ्लैटों के अंदर झाड Þफूंस और बड़े पेड़ हो गये हैं। जिनसे दीवारों में दरार तक आनी शुरू हो गई है। इनमें जहरीले सांप और अन्य आवारा जानवर तक रहते हैं। जिससे लोगों की जान के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

करोड़ों की कीमत के हैं फ्लैट, लेकिन रखरखाव नहीं

इन फ्लैटों को अधिकारियों को रहने के लिये बनाया गया था। इनकी वर्तमान कीमत का अंदाजा लगाये तो यहां के रेटों के आधार पर एक फ्लैट की कीमत ही एक करोड़ से ऊपर की होगी, लेकिन विभाग की ओर से ये फ्लैट न तो किसी अधिकारी को रहने के लिये दिये गये और न ही किसी अन्य कर्मचारी को दिये गये। करोड़ों रुपये की लागत से बनाये गये फ्लैट खंडहर हो गये हैं। जिससे सरकार को भी करोड़ों रुपये का चूना लगा, लेकिन इस ओर कोई देखने वाला नहीं है और न ही कोई इनके सुधार में कार्य करना चाहता है।

कर्मचारियों ने जताई थी रहने की इच्छा

यह फ्लैट ग्रेड वन अधिकारियों के लिये थे, लेकिन वह इनमें नहीं रहना चाहते, लेकिन यहां वाणिज्य कर विभाग में तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी काफी संख्या में कार्य करते हैं और वह इन फ्लैटों मेें रहने की इच्छा भी कई बार जता चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से इन कर्मचारियों को फ्लैट रहने के लिये नहीं दिये गये।

बता दें कि तृतीय श्रेणी कर्मचारी को ही सरकार की ओर से प्रतिमाह 3400 रुपये एचआर के रूप में मिलते हैं। अगर इन्हीं कर्मचारियों को यह फ्लैट रहने के लिये सौंप दिये जाएं तो इससे प्रतिमाह विभाग को भी राजस्व की प्राप्ति होगी और कर्मचारियों को रहने के लिये फ्लैट भी मिल जायेंगे। इसके साथ ही इन फ्लैटों की स्थिति और अधिक खराब होने से भी बच सकेगी।

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