Tuesday, June 23, 2026
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मैं दर्द भरे गीतों का गायक हूं, बोलो मेरी बोली कितने में बोलोगे

  • बॉलीवुड में अपने गीतों से धूम मचायी स्वर्गीय राम अवतार त्यागी ने
  • नजीबाबाद की मिट्टी से था बहुत लगाव

जनवाणी संवाददाता |

नजीबाबाद: एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले, मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले यह गीत आज भी जब फिल्म जिंदगी और तूफान का बजता है तो सैकड़ों लोगों के दिलों में गीतकार स्वर्गीय राम अवतार चाहिए का नाम गूंजने लगता है।

स्वर्गीय राम अवतार त्यागी का यह गीत जिसको फिल्मी गायक मुकेश ने अपना स्वर दिया वह एकदम रातोंरात चर्चित हो गया। गीतकार राम अवतार त्यागी का जन्म भले ही मुरादाबाद के संभल में हुआ हो लेकिन उनके अनुज नजीबाबाद निवासी वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र त्यागी के कारण स्वर्गीय राम अवतार त्यागी का नजीबाबाद की मिट्टी से काफी लगाव रहा है। यही कारण है कि साहित्य क्षेत्र में सभी साहित्यकार स्वर्गीय राम अवतार त्यागी को अपने दिल में बसाए हुए हैं।

25 जुलाई 1925 को मुरादाबाद के संभल क्षेत्र के ग्राम कुरकावली में जन्मे श्री त्यागी हिंदी गीत विधा के चर्चित व्यक्तित्व रहें है।उन्होंने जहां एक और मंच पर भावनात्मक गीतों के कारण ख्याति प्राप्त की, वहीं उन्होंने सामाजिक विसंगतियों और मानवीय आकांक्षाओं को भी अपने गीतों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाने में काफी सफलता हासिल की।

उन्होंने जब कहा मेरी हस्ती को तोल रहे हो तुम, कौन तराजू जिस पर तौलोगे, मैं दर्द भरे गीतों का गायक हूं, बोलो मेरी बोली कितने में बोलोगे। उनका यह गीत आम आदमी के जीवन के दर्द को परिलक्षित करता है ,वही समाज में साहित्य के नाम पर खोखली लफ़्फ़ाज़ी पर भी व्यंग करता है। बचपन से ही साहित्य में रुचि रखने वाले राम अवतार त्यागी बहुत ही संवेदनशील साहित्यकार रहे।

उनके गीतों में कितनी पीड़ा झलकती थी उतनी ही मिठास भी लोगों के दिलों में छा जाती थी। मेरा दर्द दो नशों का गुलाम हो गया है, कभी गीत बन गया है कभी जाम हो गया है। लगभग 35 वर्षों तक नवभारत टाइम्स में राम अवतार त्यागी ने अपनी सेवाएं दी।

उनके काव्य संग्रह गुलाब और बाबुल गाता हुआ दर्द सहित तमाम साहित्यिक रचनाओं व काव्य संग्रह के अलावा चरित्रहीन सहित कई उपन्यास प्रकाशित हुए। श्री त्यागी एक गंभीर सोच के धनी थे और आम आदमी के दर्द को भली-भांति समझते थे। इसी लेखन के कारण आपको उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा साहित्य सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है। 12 अप्रैल 1965 को श्री राम अवतार जी का निधन हो भले ही हो गया हो परन्तु आज भी उनके गीतों को याद किया जाता है।

राजेंद्र त्यागी साहित्य की जलाए हुए हैं मशाल

स्वर्गीय राम अवतार त्यागी के पद चिन्हों पर चलते हुए उनसे से प्रेरणा लेकर उनकी विरासत को उनके अनुज राजेंद्र त्यागी नजीबाबाद में साहित्य की मशाल जलाए हुए है। स्वर्गीय राम अवतार त्यागी की स्मृति में सम्मान समारोह के माध्यम से साहित्य की मशाल जलाए हुए है।जिस में प्रतिवर्ष साहित्य से जुड़े हुए लोगों को सम्मानित किया जाता है।

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