Wednesday, January 26, 2022
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सुधरेगा मेडिकल सिस्टम ? कोरोना काल में खुल गई थी पोल, पटरी पर नहीं लौटा मेडिकल का सिस्टम

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना काल में मेडिकल में सिस्टम की कलई खुल गई थी। मृत्यु दर मृत्यु ने हर किसी को हिलाकर रख दिया था। सिस्टम के खिलाफ आवाज उठी तो लखनऊ तक पहुंची। प्राचार्य तक उस बीच में बदल दिये गए, लेकिन फिर भी मेडिकल का सिस्टम पटरी पर नहीं लौटा।

जिन्होंने परिवार के लोगों को खोया, वह इस मेडिकल की अव्यवस्था शायद ही कभी भूल पाएंगे। बड़ा सवाल यह है कि कोरोना चला गया। अब डेंगू का कहर चल रहा है। मेडिकल में फिर भी व्यवस्थाएं इतनी खराब है कि कोई मरीजों का दर्द सुनने को तैयार नहीं है। सिटी स्कैन, एक्सरे पर पन्द्रह दिन की वेटिंग हैं। एक माह भी हो सकता है।

डॉक्टर ओपीडी में समय से बैठते नहीं है। निर्धारित समय से पहले उठकर चले भी जाते हैं। मरीज चक्कर लगाते रहते हैं। सरकार ने शानदार बिल्डिंग बनाकर दी हैं। फर्नीचर भी शानदार हैं,लेकिन मरीजों को देखने वाले डॉक्टर लापरवाह बने हुए हैं। आखिर बेलगाम डॉक्टरों पर लगाम कौन लगाए?

प्राचार्य ने चाबुक चलाई तो डॉक्टर हड़ताल पर जाने की धमकी दे देते हैं। पिछले दिनों सफाई कर्मी हड़ताल पर चले गए थे। सिस्टम बिगड़ गया था। संक्रमण का खतरा बढ़ गया था। मेडिकल वेस्ट तक नहीं उठा था। जनप्रतिनिधि है कि कोरोना काल में थोड़ा हल्ला मचाया था, वो भी अब चुप हैं। फिर कोई बीमारी आएगी तो बवाल मचेगा, लेकिन सिस्टम कौन सुधारे? यह सबसे बड़ा सवाल है।

दवा के लिए घंटों इंतजार नतीजा सिफर                                                        

डेंगू का संक्रमण जिले में तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मेडिकल कलेज में आसपास के दर्जनों जिलों के डेंगू संक्रमित मरीज भर्ती है। दिन प्रतिदिन डेंगू का संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ लोग डेंगू को वायरल बुखार समझकर हल्के में ले रहे है। जिससे क्षेत्र में डेंगू का पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में डेंगू के रोज नए मरीज मिल रहे हैं।

डेंगू वायरस शहर से गांवों तक फैल चुका है। पिछले दस दिनों में गांवों में डेंगू बुखार के मरीज तीन गुना बढ़ गए हैं। जबकि पहले शहर में डेंगू संक्रमण ज्यादा मिल रहा था। डेंगू से बचाव के लिए सर्तकता बरतना जरूरी है। वहीं मेडिकल में आ रहे मरीजों को दवा लेने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

मरीजों का कहना है कि दवा काउंटर पर गर्मी में घंटों लाइन में खड़े होकर इंतजार करने के बावजूद उन्हें दवाई नहीं मिल पा रही है। कई दिनों से दवा लेने के लिए मेडिकल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन यहां दवा उपलब्ध नहीं है। जिससे मरीज बहुत परेशान है।

केस-1                                               

मेडिकल कलेज में इलाज के लिए पहुंचे जलालपुर गांव निवासी अजय ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से काउंटर पर दवा लेने के लिए लाइन में लगे हैं। लाइन में खड़े-खड़े पूरे पांच घंटे हो गए, लेकिन जब उनका नंबर आया तो दवा न मिलने के कारण निराश होना पड़ा। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें हाथ का एक्स-रे भी कराना था। जिसके लिए वह मेडिकल के कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वह भी नहीं हो पाया। उन्हें रोज कोई न कोई बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। उनका कहना है कि वह बहुत दूर से आए हैं। हाथ में बहुत दर्द है मगर यहां कोई सुनने वाला नहीं है।

केस- 2                                       

वहीं, मेडिकल पहुंची बड्ढा गांव निवासी महिला चुन्नी ने बताया कि वह पिछले चार पांच दिन से मेडिकल के चक्कर काट रहीं है, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिली। घंटों इंतजार करने के बाद जब उनकी बारी आई तो उन्हें जरूरी दवा नहीं मिल पाई। डॉक्टर ने पर्चे में जो दवा लिखी है उनमें से सिर्फ दो गोली ही मिल पाई है। उन्हें दवा का पर्चा वापस देकर बाहर मेडिकल स्टोर से दवा लेने के लिए वापस भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि यह बहुत परेशान है। उनके पति की भी मृत्यु हो चुकी है। घर में आर्थिक तंगी है। ऐसे स्थिति में बार मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने में असमर्थ है। घर में छोटे बच्चे है कोई कमाने वाला भी नहीं है। चुन्नी के साथ दवा लेने आई मुन्नी ने बताया कि उनके साथ भी यही समस्या है। उन्हें भी मेडिकल में दवा नहीं मिल पाई।

केस-3                        

बुलंदशहर निवासी इकबाल ने बताया कि वह सुबह से दवा लेने के लिए दवा काउंटरों पर भटक रहे हैं। पहले पर्चा काउंटर पर इतनी गर्मी और भीड़ में घंटों लाइन में खड़े रहे। इसके बाद जब दवा काउंटर पर उनका नंबर आया तो उन्हें दवा भी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इतनी दूर से रोज-रोज आना संभव नहीं है। उन्होंने मेडिकल में पर्याप्त सुविधा न मिलने का विरोध जताते हुए अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही।

गर्मी में मरीज बेहाल, दवा के पर्चों से कर रहे हवा                                          

मेडिकल कॉलेज में नॉन कोविड इलाज का मैनेजमेंट पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। फ्लू ओपीडी में इलाज के इंतजार में बड़ी संख्या में मरीज बैठे हुए मिले। वहीं मरीजों ने बताया कि दवा लेने के लिए कुल चार काउंटर बने हुए है। जिसपर सुबह से ही काफी संख्या में मरीज दवा लेने के लिए लंबी कतार में खड़े हुए हैं, लेकिन तेज गर्मी और उमस में मरीजों का बुरा हाल है। मेडिकल कॉलेज में दवा काउंटर के बाहर पड़ा हुआ है। जहां पर न तो पंखे लगे हैं और न ही हवा की कोई सुविधा है। गर्मी और उमस से मरीज बेहाल है।

बे-पटरी इलाज का मैनेजमेंट                                                                         

मेडिकल कालेज में नान कोविड इलाज का मैनेजमेंट पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। फ्लू ओपीडी में इलाज के इंतजार में बड़ी संख्या में मरीज बैठे हुए मिले। वहीं, मरीजों ने बताया कि दवा लेने के लिए कुल चार काउंटर बने हुए हैं। जिस पर सुबह से ही काफी संख्या में मरीज दवा लेने के लिए लंबी कतार में खड़े हुए हैं। लेकिन तेज गर्मी और उमस में मरीजों का बुरा हाल है। मेडिकल कलेज में दवा काउंटर के बाहर टीन शेड पड़ा हुआ है। जहां पर न तो पंखे लगे हैं और न ही हवा की कोई सुविधा है। गर्मी और उमस से मरीज बेहाल है।

बिलखती धूप से बेबस होकर मरीजों को हाथ से हवा करने के लिए दवा के पर्चों का उपयोग करना पड़ रहा है। जबकि मेडिकल कलेज में न तो शारीरिक दूरी का पालन हो रहा है और न ही मास्क का प्रयोग किया जा रहा है। जिसके चलते बीमारी फैलने के आसार ओर बह गए हैं। मरीजों का कहना है कि यहां पर बैठने तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण मरीजों को पेड़ की छाया के नीचे बैठकर ही अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, मरीजों के साथ आए छोटे बच्चे धूप और गर्मी के कारण रोते बिलखते नजर आए। मरीजों के कहना है कि जिला अस्पताल में पंखे की सुविधा करनी चाहिए। जिससे उन्हें धूप और गर्मी से राहत मिल सके।

मेडिकल में पानी की टंकी के पास जलभराव                                                  

जिले में डेंगू वायरल का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। शहर व गांवों में काफी मरीजों की मौत हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज में कई मरीज भर्ती है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल परिसर में लगी पानी की टंकी के पास जलभराव है। इससे डेंगू, मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों के फैलने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है। मेडिकल परिसर में जलभराव के कारण यहां मच्छर पनप रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीजों के परिजन टंकी से पानी पीने आ रहे हैं।

जलभराव होने के कारण मरीजों के परिजनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। जलभराव के चलते मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों का टंकी से पानी पीना भी दुभर हो गया है। यदि मेडिकल में जल्द ही पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो संक्रमण से हालत बेकाबू हो सकते हैं। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि मेडिकल में सभी एंटी बॉयटिक दवाएं उपलब्ध है।

मरीजों को सभी सुविधाएं भी दी जा रही हैं, लेकिन कुछ मरीज मेडिकल में उपलब्ध सुविधाओं से हटकर अलग से दवाइयों की मांग करते हैं। यह संभव नहीं है। यदि किसी मरीज को मेडिकल में उपलब्ध दवाओं को देने से मना किया गया है तो वह स्वयं उनसे मिल सकते हैं जिससे उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।

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