Wednesday, February 28, 2024
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दंगा कराकर दहलाने के मंसूबे बना रहा था मोटा तहसीन

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  • लाहौर में भी ठहरा था 15 दिन, आईएसआई के था संपर्क में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: करीब 25 दिन पहले जिस तहसीन मोटा को मेरठ एसटीएफ की फिल्ड यूनिट ने दबोचा था, वो भी शातिर व खतरनाक था। वक्त रहते मेरठ एसटीएफ ने उसे ना दबोचा होता तो वह दंगे कराने के अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता। एसटीएफ की मेरठ यूनिट के हत्थे चढेÞ तहसीम उर्फ मोटा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे।

हालांकि अधिकारिक रूप से कुछ भी अभी नहीं किया गया है लेकिन माना जा रहा है कि रूस स्थित दूतावास के अफसर सत्येंद्र का कुछ न कुछ कनेक्शन हो सकता है। क्योंकि दोनों का गृह जनपद पासपास है। तहसीन मोटा ने जो खुलासे किए थे उसके खुलासों के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौंकस हो गयी।

दंगे कराने के मंसूबे थे पाले

पूछताछ में तहसीम ने हैरान व परेशान कर देने वाली जानकारी दी थीं। उसने बताया कि उसका भाई कलीम भी पाकिस्तान आते-जाते हैं। वहां पर इसके आईएसआइ के कुछ हैंडर से जान पहचान हो गयी थी। जिसके द्वारा उन्हें कुछ पैसों का लालच दिया गया। इनसे कहा गया कि तुम भारत में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए अपने लोगों को तैयार को तैयार करो।

जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दंगा व फसाद कर विध्वसंक गतिविधियों को अंजाम देंगे। जिससे कि भारत में शरीदयत कानून के तहत नए सिस्टम को स्थापित कर भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाया जा सके। इस पर तहसील व इसका भाई कलीम फजी सिम प्राप्त कर वाट्सऐप से पाकिस्तान में आईएसआई एजेंट दिलशाद उर्फ मिर्जा कर संपर्क कर संवेदनशील सूचनाएं भेजते थे।

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नफीस जो कांधला का रहने वाला है, से नकली करेंसी लेकर इमरान के साथ आसपास के जनपदों में सप्लाई का काम करता था। इसके भाई कलीम के गिरफ्तार होने के पश्चात यह अपना फोन छोड़कर फरार हो गया था। तहसीम साल 2002 में पाकिस्तान गया। लाहौर में 15 दिन रुका।

लाहौर में कई दिन रुका था तहसीन मोटा

तहसील पाकिस्तान भी जा चुका है। वह लाहौर में कई दिन तक ठहरा और आईएसआई के एजेंटों के संपर्क में था। उसके परिवार के भी लोग अक्सर पाकिस्तान आते जाते रहते हैं। एएसपी एसटीएफ बृजेश कुमार सिंह के निर्देशन में फील्ड यूनिट मेरठ के इंस्पेक्टर सुनील कुमार के नेतृत्व में भेजी गयी टीम ने आईएसआई एजेंटों के संपर्क में रहने के आरोपी शामली के तहसीम को मेरठ करनाल हाइवे से पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

नकली नोट प्रकरण में भी आरोपी

तहसीम नकली नोट प्रकरण में भी फरार चल रहा था। कांधला के नफीस के साथ मिलकर वह शामली और आसपास के जिलों में नकली नोटों की सप्लाई करता था। पूर्व में बताया गया था कि पहले गिरफ्तार किए गए कलीम के भाई तहसीम भी आईएसआई के संपर्क में रहे। वाट्सऐप पर भारत के सैन्य क्षेत्रों और अन्य स्थानों के फोटो भी भेजे थे। जांच में सामने आया था कि सहारनपुर का रहने वाला यूसुफ भी दोनों भाइयों के संपर्क में रहकर फर्जी सिम उपलब्ध करा रहा था। एसटीएफ ने दावा किया था कि कलीम पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंट दिलशाद मिर्जा के संपर्क में था। उस समय से तहसीम और यूसुफ फरार चल रहे थे।

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