Tuesday, June 23, 2026
- Advertisement -

आचार्य चतुरसेन के मुरीद थे मुंशी प्रेमचंद

22 3
आचार्य चतुरसेन के मुरीद थे मुंशी प्रेमचंद 2

इसे हिंदी जगत की विस्मरण की प्रवृत्ति का विषफल ही कहा जाएगा कि उसे इतिहास की दृष्टि से लिखा गया उसका पहला उपन्यास (वैशाली की नगरवधू) देने वाले आचार्य चतुरसेन शास्त्री को (जो प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य भी थे) अब उनकी जयंतियों व पुण्यतिथियों पर भी याद नहीं किया जाता। और यह तब है, जब आचार्य के जीते जी ही उनकी झोली प्रशंसकों और प्रशंसाओं से भरी हुई थी। और तो और, कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद भी उनके मुखर प्रशंसक थे, जिन्होंने एक समय उनके सृजन पर रीझकर उनसे कहा था कि ‘लिखते तो आप हैं, मैं तो कलम रगड़ता हूं।’

यहां यह याद करना दिलचस्प है कि ‘वैशाली की नगरवधू’ को आचार्य स्वयं भी अपना ‘एकमात्र’ उपन्यास मानते थे। इसको लिखने के बाद उन्होंने घोषित कर दिया था कि यह उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना है। उन्हीं के शब्दों में ‘मैं अब तक की सारी रचनाओं को रद्द करता हूं और ‘वैशाली की नगरवधू’ को अपनी एकमात्र रचना घोषित करता हूं।’

इसकी रचना प्रक्रिया के बारे में उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मेरी आत्मकहानी’ में लिखा है कि 1938 में उन्हें उपचार के सिलसिले में बिहार जाना पड़ा तो वहां पहाड़ियों में भटकने और जलस्रोतों में घंटों स्नान के दौरान वे एक जागृत स्वप्न देखने लगे। ऐसा लगने लगा जैसे कोई ग्रंथ लिख रहे हों। आंखों के सामने दृश्य बनने लगे। पत्तों की बातचीत प्रत्यक्ष कानों में पड़ने लगी। यह नित्य होने लगा तो एकबारगी तो वे डर गए कि कहीं उनको किसी मानसिक व्याधि ने तो नहीं घेर लिया है। उन्होंने लिखा है, ‘मेरे शरीर के संपूर्ण जीवकोष कल्पना के वशीभूत हो गए और मैंने कहा-‘नाचो अम्बपाली (उपन्यास की नायिका) और अम्बपाली नाची। मैंने अपनी आंखों से उसे नील गगन में चंद्रमा के उज्ज्वल आलोक में नाचते देखा। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ, जैसे में भी आकाश में उसके निकट पहुंच गया हूं।…(फिर)…एकाएक… मैं वेग से नीचे आ गिरा।…मैं दृढतापूर्वक कहता हूं कि मैंने स्वप्न नहीं देखा था। मैंने जो कुछ देखा जागते हुए देखा, सब सत्य। उस समय रात्रि के दो बजे थे।… मैंने तुरंत उठकर उस नृत्य का वर्णन लिखा, जिसका संशोधित रूप ‘वैशाली की नगरवधू’ में कलमबद्ध है।’ उनके अनुसार वे यह उपन्यास लिखते थे तो उनको महसूस होता था कि आकाश से दो नेत्र उनके कंधों के पीछे से हर अक्षर को पढ़ रहे हैं।

1891 में 26 अगस्त को उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के चांदोख गांव में पिता केशवराम वर्मा के घर माता नन्हीं देवी की कोख से जन्म हुआ तो उनका नाम चतुर्भुज रखा गया था। आरंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने 1915 में आयुर्वेदाचार्य व संस्कृत में शास्त्री की उपाधि प्राप्त की थी। फिर आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में करियर आरंभ करने से पहले कुछ वक्त तक एक धर्मार्थ औषधालय में 25 रुपए महीने पर नौकरी की थी।

आलोचकों के अनुसार भले ही आचार्य ‘वैशाली की नगरवधू’ को अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास बता गए हैं और उसके लिए अपनी अन्य रचनाओं को खारिज कर गए हैं, उनकी ‘सोमनाथ’ और ‘वयं रक्षाम:’ जैसी औपन्यासिक कृतियों की चर्चा के बगैर उनकी चर्चा अधूरी रह जाती है। ‘सोमनाथ’ के केंद्र में सोमनाथ की ऐतिहासिक लूट और पुननिर्माण की गाथा है जबकि ‘वयं रक्षाम:’ का केंद्रीय पात्र राक्षसराज रावण है। यों, उनके खाते में आत्म दाह, बहते आंसू, दो किनारे, नरमेध, अपराजिता, बगुला के पंख, मोती, पूर्णाहूति, रक्त की प्यास आलमगीर, लाल पानी, हरण निमंत्रण, सोना और खून (चार खंड) जैसे अन्य उपन्यास भी हैं। इनके अतिरिक्त उन्होंने आयुर्वेद पर आधारित लगभग एक दर्जन ग्रंथों का लेखन किया है, जिनमें आरोग्यशास्त्र, स्त्रियों की चिकित्सा, योग चिकित्सा, नीरोग रहने के सरल उपाय और सुगम चिकित्सा आदि प्रमुख हैं। अपने समय में उन्होंने भारतीय औषध निर्माण बोर्ड बिल का प्रारूप भी तैयार किया था। मगर जब तक वह पास होता, वे दुनिया से चल बसे थे।

1936 में उन्होंने उस वक्त आयुर्वेद चिकित्सा की अपनी जमी जमाई प्रैक्टिस छोड़ दी थी, जब उन्हें उससे महीने में तीन हजार रुपए तक की आय हो जाती थी। उन दिनों यह बहुत बड़ी रकम थी। तिस पर उनकी व्यस्तता इतनी थी कि पुरुषोत्तमदास टंडन जैसे वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानियों को भी उनका परामर्श पाने के लिए की कई-कई दिन प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। लेकिन बाद में साहित्य और आयुर्वेद दोनों में से एक को चुनने का वक्त आया तो उन्होंने साहित्य चुन लिया और शुरुआती विफलताओं के बावजूद उसे त्यागने से इंकार कर दिया। उसी दौर में उनकी एक के बाद एक तीन पत्नियों के असामयिक देहांत और लेखन में वांछित प्रासंगिकता न पा सकने की पीड़ाओं ने उनका हाल बुरा कर रखा था। हां, चौथे विवाह के बाद उन्होंने ‘वैशाली की नगरवधू’ की रचना की तो जैसे उनका सोया हुआ सौभाग्य जाग गया।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Anushka Sen: अनुष्का सेन ने रचा इतिहास, कोरियन फिल्म में लीड रोल निभाने वाली पहली भारतीय बनीं

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Emraan Hashmi: इमरान हाशमी की हॉरर वापसी, ‘रूह’ का ऐलान, 5 साल बाद फिर डराने को तैयार

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Sunny Deol: ‘घायल’ के 36 साल पूरे, सनी देओल ने शेयर किया भावुक वीडियो, पिता धर्मेंद्र को किया याद

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Raj Babbar: जैकी श्रॉफ ने राज बब्बर को 74वें जन्मदिन पर दीं शुभकामनाएं, पुरानी तस्वीर साझा की

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...
spot_imgspot_img