Friday, May 1, 2026
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अखलाक को किसी ने नहीं मारा

बहनो, भाइयो, यह योगी, आप को निश्चिंत करने आया है कि आप के बच्चों के साथ न्याय होगा, मोहम्मद अखलाक के मामले में उन्हें अब कोई तंग नहीं करेगा। क्यों? क्योंकि अखलाक को किसी ने नहीं मारा। अरे वही अखलाक जिसके बारे में कहते हैं कि दादरी में बिसाहड़ा गांव में रहता था और दर्जी का काम करता था। वही अखलाक जिसके बारे में अफवाह थी कि घर में फ्रिज में गोमांस होने के शक में गांव के ही लडकों ने उसे घर से बाहर घसीट कर, पीट-पीटकर मार डाला था। वही अखलाक, जिसके नाम पर विरोधियों ने देश-दुनिया में यह दुष्प्रचार किया था कि इसी के साथ मोदी जी के राज में मॉब लिंचिंग का सिलसिला शुरू हुआ था, जो ग्यारह साल बाद न सिर्फ बदस्तूर जारी है बल्कि खूब फल-फूल और फैल रहा है। लेकिन, यह पूरी तरह से झूठ है। अखलाक को किसी ने नहीं मारा! अनाम भीड़ ने भी नहीं। अखलाक तो मरा ही नहीं।
अखलाक या कोई भी, मारा तो तब जाता या मरता तो तब, जब वो होता।

किसी के भी मारे जाने के लिए उसका होना जरूरी है। पर हमारी सरकार की गहन जांच में अब यह सच सामने आ गया है कि मोहम्मद अखलाक तो कभी था ही नहीं। बिसाहड़ा में छोड़ दो, दादरी में भी नहीं बल्कि पूरे राजधानी क्षेत्र में ही नहीं। और जो था ही नहीं, उसे हमारे लडके कैसे मार सकते थे? सितंबर 2015 का किस्सा बताते हैं। तब की सरकार ने एक षडयंत्र रचा, इंटरनेशन लेवल का षडयंत्र, मोदी जी की राष्टÑभक्त सरकार को बदनाम करने के लिए। तब प्रदेश में डबल इंजन की सरकार जो नहीं थी। षडयंत्र के तहत तब की प्रदेश की सरकार ने ही अखलाक को पैदा किया और षडयंत्र के तहत ही उन्होंने उसके भीड़ के हाथों मारे जाने का हल्ला मचा दिया। अखलाक तो कोई था ही नहीं। बिसाहड़ा था, दादरी थी, दिल्ली थी, पर अखलाक नहीं था। जो कभी था ही नहीं, उसकी मॉब लिंचिग कैसे हो सकती है?

मीडिया के बहनो, भाइयो, एक बात आप से मैं खासतौर पर कहना चाहता हूंं। तब आप विरोधियों के झूठे प्रचार में आ गए तो आ गए, पर अब इस बार जरूर अपनी गलती दुरुस्त कर लीजिए। अखलाक की मॉब लिंचिंग के झूठे प्रचार को तार-तार कर दीजिए। आप ही सोचिए अदालत तक को अखलाक की जो कहानी सुनायी गयी, क्या उसमें यही दावा नहीं किया जा रहा था कि गोहत्या तो छोड़िए, गोमांस भी कहीं नहीं था। फ्रिज में भी नहीं। फिर भी हमारे बच्चों पर इल्जाम लगाया गया कि उन्होंने अखलाक को पीट-पीटकर मार डाला। जब गाय भी नहीं थी, गोमांस भी नहीं था। जैसे गाय नहीं थी, गाय के मारे जाने की सिर्फ अफवाह थी, वैसे ही अखलाक भी नहीं था, उसके भीड़ के हाथों मारे जाने की सिर्फ अफवाह थी। वैसे यह भी सेकुलरवादियों की फैलायी अफवाह ही है कि मोदी जी के राज में मॉब लिंचिंग की शुरुआत अखलाक से हुई थी। लिंचिंग वाली मॉब को मोदी जी के गद्दी पर आने के बाद साल भर लंबा इंतजार हर्गिज नहीं करना पड़ा था। उन्होंने तो लग्गा मोदी जी के सत्तारोहण के अगले महीने ही लगा दिया था, पुणे में मोइन शेख की लिंचिग के जरिए।

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