Friday, July 19, 2024
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सिलसिलेवार धमाके और चीत्कार, मानों कयामत आ गई

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  • यूक्रेन से किठौर के छात्रों ने वीडियो कॉल पर परिजनों को सुनाई आपबीती
  • शांति और सलामती के लिए की जा रही दुआएं

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: डाक्टर बनने का ख्वाब लेकर यूके्रन पहुंचे क्रांतिधरा के छात्रों की आंखों में सिलसिलेवार हो रहे हवाई हमलों का खौफ भी है और मुसीबत के पलों में अपनों से दूर रहने का दर्द भी। संकट में घिरे यह छात्र पिछले चार दिनों से भारतीय दूतावास से घर वापसी की गुहार लगाते थक गए, लेकिन नतीजा कुछ नही निकला। पेश हैं किठौर के ऐसे कई छात्रों से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट…

यूक्रेन के शहर डेनीपार की डेनीप्रो स्टेट यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस द्वितीय की पढ़ाई कर रहे किठौर के राधना निवासी अब्दुल खालिक पुत्र मौलाना शाहनवाज बताते हैं कि गुरुवार तड़के 5:00 बजे तमाम छात्र बेखबर हॉस्टल में सोए हुए थे। तभी एक जोरदार धमाका हुआ।

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अधिकतर छात्र जग गए इससे पहले कि वो कुछ समझ पाते दूसरा और फिर तीसरा धमाका हो गया। आसपास में चीत्कार मच गईं। इसी दिन रशियन सेना ने कीव, खारकीव, लुंगास और डेनेस्को समेत यूक्रेन के कई बड़े आर्मी बेसों पर बमबारी कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद यूक्रेन में मार्शल लॉ लगा दिया गया।

विवि प्रशासन अलर्ट, शहरों में खौफभरा सन्नाटा

बताया कि हमले के बाद हरकत में आए विवि प्रशासन के आदेश पर हॉस्टल के तमाम छात्र बंकर रूपी बेसमेंट में जा घुसे। वहीं, बाजार, एटीएम बंद, सड़कों पर सन्नाटा, खाना-पानी खत्म एकदम कयामत जैसे हालात बन गए। शुक्रवार दोपहर में विवि की ओर से एक वक्त का खाना छात्रों को उपलब्ध कराया गया। दहशतजदा छात्रों ने पूरी रात जागकर बिताई। शनिवार सुबह इक्का-दुक्का दुकानें खुलीं तो खरीदारी के लिए लंबी लाइनें लग गईं।

खाने के लिए लोगों में खूब खींचतान मची रही। शहर कीवी और पोलटावा विवि से एमबीबीएस कर रहे शारिक पुत्र मोहम्मद असलम और ताबिश पुत्र मुजाहिद ने बताया कि यूक्रेन के हालात बहुत बदतर हैं। रशियन सेना लगातर हवाई हमले कर रही है। चौतरफा दहशत का महौल है। ऐसे में छात्र भारतीय दूतावास से वतन वापसी की गुहार कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।

लाइट आॅफ जागकर बिताते हैं रात

यूक्रेन के लवीव विवि से एमबीबीएस द्वितीय की पढ़ाई कर रहे मुंडाली के शफियाबाद लोटी निवासी मोहम्मद वसीम, अब्दुल्ला ने बताया कि हमले के बाद से जिंदगी का रुटीन ही बदल गया। अब हॉस्टल के तमाम छात्र जागकर रात बिताते हैं और दिन में सोकर नींद पूरी की जाती है।

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बताया कि हमले के भय से शहर की तमाम लाइटें रात में बंद कर दी जाती हैं। पूरी तरह सन्नाटा रहता है। फिरोज आलम ने बताया कि शुक्रवार तड़के 6:00 बजे लवीव में अचानक सायरन बजा। जिस पर छात्र हॉस्टल के बेसमेंट की तरफ दौड़े। बेसमेंट में पहुंचते ही जोरदार धमाके के साथ चीत्कार मच गई। पूरा माहौल दहशतजदा हो गया। लगभग तीन घंटे बाद हालात सामान्य होने पर भारतीय एमबीसी को फोन किया।

एमबीसी ने 15 दिन का पोलैंड का वीजा देने की बात कहकर छात्रों को बॉर्डर पर बुलवा लिया। घर वापसी को आतुर छात्र शुक्रवार दोपहर से पोलैंड बॉर्डर के लिए 25 किमी कैब और फिर रातभर 30 किमी पैदल चलकर शनिवार सुबह पोलैंड बॉर्डर पहुंचे। बताया कि वहां पहुंचते ही एमबीसी ने यूक्रेन के खराब हालातों का हवाला देकर वीजा से मना कर दिया।

सलामती के लिए हो रही दुआएं

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शनिवार को किठौर, शाहजहांपुर, राधना, शफियाबाद लोटी आदि बस्तियों में यूक्रेन में शांति और वहां मौजूद लाडलों की सलामती के लिए दुआएं की गईं। बता दें कि किठौर से उरुज फातिमा, फैजान, शुऐब, ललियाना से फिरोज आलम, शाहजहांपुर से अहमद नवाज, फाईज खान, मुंडाली के शफियाबाद लोटी से मोहम्मद वसीम और अब्दुल्ला समेत कई छात्र यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। शनिवार शाम को यह तमाम छात्र पोलैंड बॉडर पर वीजा की उम्मीद में डटे हुए थे।

देश वापसी को तड़फ रहा मिर्जापुर का इजहार

क्षेत्र के गांव मिर्जापुर का एक छात्रा अभी भी यूक्रेन में फंसा हुआ हैं। युद्ध की सूचना के बाद परिजन परेशान हैं और लाल की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यूक्रेन में फंसा छात्र इजहार मेडिकल की पढ़ाई करने गया था।

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मिर्जापुर निवासी एमबीबीएस के छात्र इजहार त्यागी ने फोन पर बताया कि बहुत डर लग रहा है, जाने सब कुछ कब तक सामान्य होगा। हम एयरपोर्ट भी गए, टिकट बुक तो हो रही हैं, लेकिन नो फ्लाइंग जोन होने से कोई भी फ्लाइट उपलब्ध नहीं है। छात्र के पिता इदरीश त्यागी ने बताया कि परिवार वाले भी बच्चों को फोन और वीडियो कॉल के जरिए यूक्रेन के हालात की लगातार जानकारी लेने में जुटे हैं, लेकिन वह जिस छात्रावास में रहता है, उसके पास धमाके हो रहे हैं।

परिवार वालों ने भारत सरकार से इजहार को सुरक्षित निकालने के लिए गुहार लगाई है। वह यूक्रेन के कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। उनके परिजन सुबह से टीवी से चिपके हैं तो मां का रो-रोकर बुला हाल है। परिजनों ने बताया कि इजहार पिछले साल से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस कर रहा हैं। उसने बताया कि उसके साथ मेरठ का एक छात्र अमन भी है। अब वहां हालत खराब होने से हम सभी परेशान हैं, लेकिन फ्लाइट बंद होने से उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही।

मां बूंदी बेगम का कहना है कि बेटे को लेकर वह बहुत चिंतित हैं। लगातार वीडियो काल से बात कर रही हैं। उनकी मांग है कि सरकार वहां फंसे सभी भारतीयों को सुरक्षित निकाले। इजहार त्यागी ने बताया कि वह दो दिन तक बिल्डिंग के बंकर में रहे। वहीं, शुक्रवार की दोपहर हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना हो गए थे।

गाजियाबाद की जसमीन बोलीं-अब नहीं लौटूंगी यूक्रेन

रूस व यूके्रन की बीच चल रही भीषण जंग के चलते यूक्रेन की खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्र पिछले 36 घंटे से बंकर में छिपे हैं। इनमें वैशाली के सेक्टर-छह में रहने वाले तेजेंद्र सिंह की भांजी जसमीन भी शामिल है। बंकर से ही जसमीन और उसके अन्य साथियों ने वीडियो जारी कर बताया है कि वे किन हालातों में वहां फंसे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी से कुछ ही दूरी पर बनाए गए बंकर में लाइट बहुत कम है, फोन में नेटवर्क नहीं आ रहा, राशन और पानी भी कम ही बचे हैं। बिना खाना तो रह लेंगे, लेकिन पानी के बिना रह पाना मुश्किल होगा। वहीं जसमीन यूक्रेन के हालात से बहुत ज्यादा डर चुकी है, उसका कहना है कि वह अब वापस लौटकर यूकेन नहीं जाएगी। उन्होंने बताया कि बाहर सभी दुकानें बंद हो चुकी हैं।

दूर-दूर तक कोई उम्मीद नहीं दिख रही। उन्होंने बताया कि सभी फ्लाइटें रद्द हो गई हैं। पोलैंड से आने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया गया है। स्कूल प्रबंधन कुछ भी बता पाने में अक्षम है। भारत वापसी के लिए मदद की वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वे मदद की मांग कर रहे हैं। उधर, भारत सरकार भी उन्हें वहां से लाने का प्रयास कर रही है।

अब यूक्रेन नहीं लौटना चाहती है जसमीन

समीन कौर अपने घर की अकेली लड़की है। वैशाली में उनके मामा तेजेंद्र रहते हैं। 2018 में ही यूक्रेन से एमबीबीएस करने का मन बनाया था। सेलेक्शन के बाद पढ़ाई के लिए चली गई थीं। एक छोटा भाई है। उनकी मम्मी का पिछले साल स्वर्गवास हो गया था। पिता पंजाब के एक स्कूल में प्रिंसपल हैं।

जसमीन का कहना है कि वह एक बार भारत आ जाए, फिर लौटकर नहीं जाएगी। बताया कि रूस की ओर से बमबारी हो रही है। कई बम गिर चुके हैं, जिनकी धमक और आवाज को बंकर के अंदर छिपे छात्र सुन रहे हैं। सभी को किसी अनचाही घटना दुर्घटना का डर सता रहा है।

जसमीन कौर ने बताया की बंकर की स्थिति बेहद खराब है। बेहद जर्जर हालत में है। चारों ओर से दीवारें चिटकी और प्लास्टर झड़ रहा है। 36 घंटे से सभी इसी में हैं। कोई बम गिरता है तो धमक के कारण जान निकल जाती है। जसमीन व उसके साथियों का पोस्ट अपलोड करने के बाद लोग उनके जल्द घर वापसी की कामना कर रहे हैं।

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