Saturday, September 19, 2026
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Tag: अमृतवाणी

अमृतवाणी: उपदेशामृत

अमृतवाणी  उपदेशामृत एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा मांगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगाई, ‘जय जय रघुवीर समर्थ!’...

अमृतवाणी: अधूरा कार्य

अमृतवाणी  अधूरा कार्य एक मकड़ी थी। उसने आराम से रहने के लिए एक शानदार जाला बनाने का विचार किया। सोचा की इस जाले में...

अमृतवाणी: पछतावा

अमृतवाणी  पछतावा एक दिन राजा वीर सिंह शिकार खेलते हुए घने जंगल में भटक गए। जंगल से बाहर अिनकलने की कोई राह न सूझ...

अमृतवाणी: धार्मिक शिक्षा

अमृतवाणी  धार्मिक शिक्षा कॉलरिज महान चिंतक थे। वह मानते थे कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए बच्चों के चरित्र को गढ़ने पर शुरू...

अमृतवाणी: लगन का मूल्य

अमृतवाणी लगन का मूल्य यूनान के किसी गांव का एक लड़का लकड़ियां काटकर गुजारा करता था। वह दिन भर जंगल में लकड़ियां काटता और...

अमृतवाणी: अमर फल

अमृतवाणी  अमर फल पिता ने अपने नन्हे बेटे को कुछ पैसे देकर फल लाने के लिए बाजार भेजा। वह जब बाजार में गया, तो...
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