Tuesday, April 28, 2026
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Tag: बाबा नागार्जुन

हाशिये के आदमी की दु:ख-तकलीफों का आख्यान

19वीं सदी के अमेरिकी कवि व्हिटमैन ने अपनी एक कविता ‘सांग ऑफ माई सेल्फ’ में लिखा है: सारे दुख मेरे लिए वस्त्र परिवर्तन के...

मंजिल की जुस्तजू में कारवां

किसी शायर ने क्या खूब कहा है: मंजिल मिले, मिले, न मिले, कोई गम नहीं, मंजिल की जुस्तजू में मेरा कारवां तो है। हिन्दी...
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