Tuesday, May 19, 2026
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गेहूं की दस किस्मों से मिलेगी भरपूर पैदावार

गेंहू की किस्मों से सूखी और नम दोनों जमीनों पर मिलेगी बेहतरीन पैदावार रबी सीजन के दौरान किसान अधिक उपज पाने के लिए ऐसी गेहूं की किस्में खोजते रहते हैं, जो कम लागत में बेहतर उत्पादन दें। अच्छी किस्म चुनना ही अधिक पैदावार और लाभ का पहला कदम होता है। ऐसे में गेहूं की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जो न केवल उच्च उपज देती हैं, बल्कि रोगों के प्रति सहनशील, जल्दी पकने वाली और गुणवत्ता में भी श्रेष्ठ हैं।

यहां हम आपको गेहूं की टॉप 10 उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिनकी पैदावार किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

एच आई 8759 (पूसा तेजस)

यह किस्म मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान के कोटा और उदयपुर क्षेत्र, तथा उत्तर प्रदेश के झांसी मंडल के लिए उपयुक्त है।

उपज क्षमता: 56.9 से 75.5 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता समय: लगभग 117 दिन

खासियत: यह किस्म काले और भूरे रतुए जैसे फफूंद रोगों से अच्छी तरह लड़ पाती है तथा उच्च तापमान को भी सहन कर लेती है।

एच डी 3236

यह किस्म पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए लाभकारी है।

उपज क्षमता: 57.5 से 79.6 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता समय: 142 दिन

गुणवत्ता: इसमें लगभग 12.8 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है।

रोग प्रतिरोध: यह किस्म कनाल बंट, फ्लैग स्मट आदि रोगों का सामना करने में सक्षम है।

एच डी 3249

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के किसान इस किस्म से अच्छा लाभ उठा सकते हैं।

उपज क्षमता: 48.8 से 65.7 क्विंटल/हेक्टेयर

पकने का समय: मात्र 122 दिन

पोषण महत्व: इसमें 10.7 प्रतिशत प्रोटीन और 42.5 पीपीएम आयरन पाया जाता है, जिससे यह पोषक की दृष्टि से काफी उपयोगी है।

एच आई 1636 (पूसा वकूला)

यह किस्म मुख्यत: मध्य भारत के कृषि क्षेत्रों में अधिक सफल है।

उपज क्षमता: 56.6 से 78.8 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता: लगभग 119 दिन

खासियत: यह रोग प्रतिरोधी होती है तथा इससे बनी चपाती और बिस्कुट का स्वाद व गुणवत्ता बेहतरीन होती है।

एच डी 3406 (उन्नत एचडी 2967)

उपज क्षमता: 54.7 से 70.4 क्विंटल/हेक्टेयर

रोग प्रतिरोध: करनाल बंट, पत्ती झुलसा और पीली रतुआ जैसे रोगों से सुरक्षा

विशेषता: दाने बड़े, चमकदार और भरे हुए होते हैं, जिससे आटे की गुणवत्ता बढ़ जाती है।

एच डी 3369

यह विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में आसानी से अनुकूल हो जाती है।

उपज क्षमता: 50.6 से 71.4 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता समय: 149 दिन

रोग प्रतिरोध: यह पत्ती झुलसा, करनाल बंट और रतुआ रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है।

एच आई 1650 (पूसा ओजस्वी)

उपज क्षमता: 57.2 से 73.8 क्विंटल/हेक्टेयर

पकने का समय: केवल 118 दिन (कम अवधि वाली किस्म)

गुणवत्ता: दाने चमकदार और मोटे होते हैं, जिससे आटा बहुत अच्छा बनता है।

एच आई 1653 (पूसा जागृति)

उपज क्षमता: 51.1 से 69.3 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता समय: लगभग 148 दिन

रोग प्रतिरोध: करनाल बंट, पत्ती झुलसा, भूरे और पीले रतुए से सुरक्षा प्रदान करती है।

एच आई 1654 (पूसा आदिति)

उपज क्षमता: 51.8 से 72.9 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता: 148 दिन

खासियत: कम सिंचाई में अधिक उपज देती है तथा सूखा सहनशील है।

एच आई 8826 (पूसा पौष्टिक)

उपज क्षमता: 48.8 से 73.7 क्विंटल/हेक्टेयर

पकने का समय: केवल 108 दिन

पोषण महत्व: इस किस्म में जिंक, आयरन और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।

रोग प्रतिरोध: करनाल बंट, पत्ती झुलसा और रतुआ रोगों से फसल की रक्षा करती है।
सही किस्म का चयन, उचित समय पर बुवाई, संतुलित खाद प्रबंधन और रोग नियंत्रण अपनाकर किसान प्रति हेक्टेयर 70 से 80 क्विंटल तक गेहूं की उपज प्राप्त कर सकते हैं। इन उन्नत किस्मों का उपयोग कर किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि बाजार में अच्छी गुणवत्ता का दाना प्राप्त कर बेहतर लाभ अर्जित कर सकते हैं।

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