Friday, May 1, 2026
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मासूमों पर भी कहर बरपा रहा बदलता मौसम

  • मेडिकल में बच्चों का वार्ड फुल, क्षमता से ज्यादा भर्ती बीमार बच्चे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बदलता मौसम बुजुर्गो व बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। विशेषज्ञ पहले ही आगाह कर चुके है कि इस मौसम में कई तरह की वायरल बीमारियां फैल रहीं है जिनसे सबसे ज्यादा बच्चों व बुजुर्गो को खतरा है। यह बात सही साबित हो रही है

जब सामनें आया कि मेडिकल के बच्चा वार्ड में क्षमता से अधिक बच्चों का इलाज चल रहा है। वहीं पिछले तेरह दिनों के भीतर जन्म लेनें वाले नवजात बच्चों में भी गंभीर बीमारियां नजर आ रही है। कहा जा सकता है बदलते मौसम में जन्म लेने वाले ज्यादातर नवजात बच्चों पर मौसम की मार पड़ी है।

साहिल निवासी सिंघावली रोहटा रोड ने बताया उसका भांजा जिसका चार दिन पहले ही जन्म हुआ है उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। शुक्रवार को बच्चा मेडिकल में भर्ती कराया गया है जिसकी हालत जन्म के समय से ही नाजुक है। डाक्टरों ने बताया है इस बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है, इलाज जारी है। अभी बच्चे के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

नइम निवासी तारापुरी ने बताया तेरह दिन पहले वह नाना बने है। लेकिन नवजात बच्ची पैदा होने के बाद से ही वेंटिलेटर पर है। बच्ची को निमोनिया बताया जा रहा है, साथ ही उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। डाक्टरों का कहना है फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर है, और उसका इलाज जारी है। बच्ची बीमार ही पैदा हुई थी जिसे अब मेडिकल में भर्ती कराया गया है।

राशिद निवासी बड़ौत ने बताया उसकी पांच दिन की बच्ची को पैदा होते ही सांस लेने में परेशानी हो रही है। साथ ही बच्ची को दौरे पड़ रहें है व दिमागी बीमारी के साथ पेट में इन्फैक्शन बताया है। बच्ची की हालत में अभी सुधार नहीं हो रहा है इलाज जारी है। डाक्टरों की टीम इलाज तो कर रही है लेकिन बच्ची की हालत को लेकर कोई कुछ नहीं बता रहा है।

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दिलशाद निवासी कांच का पुल ने बताया उसकी आठ दिन की बच्ची को जन्म लेने के बाद से ही परेशानी है। मेडिकल में भर्ती कराया तो डाक्टरों ने बताया कि बच्ची के सिर में खून जमा है। इसको लेकर बच्ची ज्यादा हरकते नहीं कर रही है, फिलहाल उसका इलाज जारी है। लेकिन बच्ची स्वस्थ्य हो जाए हम डाक्टरों से यही गुजारिश कर रहें है।

मेडिकल के पिडियाट्रिक वार्ड के नीकू व पीकू वार्ड में 60-60 बैड है यानी कुल क्षमता 120 बैडों की है। लेकिन इस समय नीकू वार्ड में 60 बैड है जिनमें से 10 पर वेंटिलेटर है जबकि पीकू वार्ड में 60 बैड है जिनमें से 15 पर वेंटिलेटर है। दोनों वार्डो में इस समय कुल 130 बच्चे भर्ती है, कुछ बैडों पर दो बच्चों का इलाज चल रहा है यानी क्षमता से अधिक बच्चे इस समय यहां इलाज करा रहें है।

इन दिनों छह माह से एक साल तक के बच्चे निमोनिया, मेनेंजाइटिस, टाइफाइड, डायरिया व फ्लू से ग्रस्त पाए जा रहें है। जबकि नवजात बच्चे सबसे ज्यादा सांस लेने में परेशानी व डायरिया से ग्रस्त हैं। ऐसे में इन बच्चों को सही इलाज की जरूरत है जो मेडिकल में जारी है।

इस समय मौसम लगातार बदल रहा है, ऐसे में बच्चों में तमाम तरह की बीमारियां नजर आ रहीं है। बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चों में निमोनिया, टाइफाइड, डायरिया व फ्लू से ग्रस्त बच्चे है। यह सभी बीमारियां बदलते मौसम की वजह से ही हो रही है। क्षमता से अधिक बच्चे इलाज के लिए भर्ती है जिनकी पूरी देखभाल की जा रही है।
-डा. नवरतन गुप्ता, एचओडी, पीड्रियाटिक विभाग मेडिकल कॉलेज।

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