- चार प्रवेश और निकास द्वारों के साथ 16 एस्कलेटर्स होंगी
- स्टेशन की डी वॉल और छत का निर्माण कार्य भी पूरा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश की पहली रैपिड रेल के सभी स्टेशन इतने भव्य होंगे कि लोग ट्रेन में सफर करने के साथ ही साथ इनके स्टेशनों को निहारेंगे भी। इसी कड़ी में शहर का दिल कहे जाने वाले बेगमपुल का रैपिड स्टेशन बेहद ही भव्य होगा। रैपिड के बेगमपुल स्टेशन की डी वॉल का निर्माण कार्य मंगलवार को पूरा हो गया। यह भूमिगत स्टेशन है जिसमें ग्राउंड, कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म तीन लेवल हैं।
डी वॉल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद स्टेशन का निर्माण कार्य अब अपने अगले चरण में पहुंच गया है। रैपिड रेल अधिकारियों के अनुसार डी वॉल का निर्माण कार्य पूर्ण होने के साथ साथ स्टेशन की ऊपरी छत का निर्माण कार्य भी मंगलवार को लगभग पूरा कर लिया गया।

अधिकारियों के अनुसार नॉर्थ शॉफ्ट की ओर से बेगमपुल स्टेशन तक टनल बनाने का जो कार्य चल रहा है उसके अन्तर्गत सुदर्शन मशीन को अब बेगम पुल स्टेशन में ही बनाई गई रिट्रीविंग शॉफ्ट से बाहर निकाला जाएगा। बता दें कि इस छत का निर्माण टॉप डाउन तकनीक के आधार पर किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत स्टेशन का निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया जाता है।
इसके अलावा कॉनकोर्स लेवल बनाने के लिए खुदाई का कार्य भी साथ साथ जारी है। बेगमपुल स्टेश्न की लम्बाई 246 मीटर है जबकि चौड़ाई 25 मीटर है। इसके अलावा स्टेशन की गहराई लगभग 22 मीटर है। इसके अलावा मेरठ में मेरठ सेंट्रल व भैंसाली स्टेशन भी भूमिगत हैं। इस स्टेशन का पहला प्रवेश व निकास द्वार आबूलेन की ओर बनाया जाएगा। दूसरा प्रवेश व निकास द्वारा लालकुर्ती मार्केट को स्टेशन से जोड़ेगा।
तीसरा प्रवेश व निकास द्वार जीरो माइल से कनेक्ट होगा जबकि चौथा प्रवेश व निकास द्वार जीरो माइल की दूसरी साइड को कनेक्ट करेगा। इस स्टेशन के एक लेवल से दूसरे लेवल पर आने व जाने के लिए अलग अलग जगहों पर 16 एस्कलेटर्स लगाए जाएंगे।
इसके अलावा स्टेशन में हाईफाई लिफ्ट की सुविधा भी होगी। मेरठ में रैपिड व मेट्रो के कुल 13 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। सभी स्टेशन आरआरटीएस के बुनियादी ढांचे पर ही डिजाइन किए गए हैं। रैपिड अधिकारियों के अनुसार मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल व मोदीपुरम स्टेशनों पर रैपिड के साथ साथ मेट्रो टेÑेन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
ये हैं मेरठ के सभी 13 स्टेशन
- मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, डौरली, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम स्टेशन, मोदीपुरम डिपो।
भूमिगत स्टेशन
- मेरठ सेंट्रल
- भैंसाली
- बेगमपुल
बेफिक्री! कांवड़ियों को हापुड़ रोड पर नहीं होगी कोई दिक्कत
हापुड़ रोड से गुजरने वाले कांवड़ियों को कमेला पुल निर्माण के चलते किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी। प्रशासन भी इस पूरे मामले पर बेहद संवेदनशील है। आला अफसर भी इस पूरे निर्माण कार्य की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उधर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार यहां कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और 10 जुलाई तक इस पुल के एक भाग में स्लैब डालने की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
हापुड़ अड्डे चौराहे से लेकर बिजली बम्बा बाइपास के चौड़ीकरण से पूर्व कमेले वाले इस पुल को नए सिरे से बनाया जा रहा है। इसके चलते उक्त मार्ग सात मई से तीन माह के लिए बंद कर दिया गया था। इसी बीच कांवड़ियों की आमद भी शुरू हो रही है। गौरतलब है कि जिस जगह निर्माण कार्य चल रहा है वहां से कांवड़ यात्रा के दौरान कई लाख कांवड़िये गुजरते हैं। हापुड़, खुर्जा, बुलन्दशहर, आगरा व अलीगढ़ की ओर जाने वाले लाखों कांवड़िये यही मार्ग इस्तेमाल करते हैं।
दरअसल, इस मार्ग को क्रॉस करने के लिए कांवड़ियों के लिए कोई अलग वैकल्पिक सम्पर्क मार्ग नहीं है। उधर, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि इस पुल पर हालांकि कांवड़ियों की सहुलियतों को देखते हुए स्लैब डालने की प्रक्रिया शीघ्र शुरु कर दी जाएगी और 10 जुलाई तक स्लैब डाल भी दिया जाएगा, लेकिन फिर भी पीडब्ल्यूडी इस प्रकार की व्यवस्था बनाने में जुटा है कि पुल के बराबर में एक और अस्थाई मार्ग तैयार हो जाए ताकि कांवड़ियों को यहां से गुजरने में कोई असुविधा न हो।
अभी हमने कोई टाइमलाइन नहीं दी: शर्मा
इस पूरे निर्माण कार्य को देख रहे पीडब्ल्यूडी गाजियाबाद के अभियंता एससी शर्मा ने बताया कि इस मार्ग को खोलने के लिए हमने कोई टाइमलाइन अपनी तरफ से नहीं दी है, लेकिन हमारी पूरी कोशिश है कि हम 10 जुलाई तक इस पर स्लैब डाल दें। जिस पर से कांवड़िये गुजर सकें।

