- गिरजाघरों में पादरियों ने कराई क्रिसमस की विशेष प्रार्थना
- सभी धर्मो के लोगों ने मनाई यीशु के जन्म की खुशियां
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सांस्कृतिक विविधताओं से परिपूर्ण भारतीय समाज शनिवार को क्रिसमस की खुशियों से गुलजार रहा। मसीह समाज के साथ समाज के अन्य वर्गो के लोग प्रभु यीशु के जन्मोत्सव में शामिल हुए और चारों ओर क्रिसमस का उल्लास सतरंगी छठा के साथ बिखरा। सुबह की प्रार्थना के बाद गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए लोगों का तांता लगा रहा। हाथ मिलाकर और गले लगकर लोगों ने एक दूसरे को मैरी क्रिसमस कहा और केक से मुंह मीठा कराया।

ठंड के मौसम में हल्की धूप ने पर्व की खुशियों को और बढ़ा दिया। गिरजाघरों के साथ शॉपिंग मॉल और बाजारों में क्रिसमस की रौनक छाई रही। पवित्र क्रास और यीशु की मूर्ति के सम्मुख लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर दुआ मांगी। ऐसे में उल्लास और मस्ती का आलम रहा। रुड़की रोड स्थित सेंट जोसेफ कैथ्रेडल में विशप फ्रासिंस कलिस्ट ने कहा कि प्रभु यीशु हमारा उद्धार करने के लिए आ गया है।
फादर जॉन चिम्मन ने सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी। गिरजाघरों में धर्म गुरुओं ने बतिस्ता (बच्चों का नामकरण) की रीति भी निभाई। बच्चा पार्क स्थित सेंट थॉमस चर्च में मेरठ के डीन पादरी परितोष नोयल ने कहा कि भगवान यीशु बालक नहीं बल्कि हमारा उद्वारक है। हमें अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए उनकी शरण में जाना चाहिए। सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च लालकुर्ती में फादर चमन कंफर्ट में प्रार्थना सभा कराई गई।

रेवरेंट कमलेश कंफर्ट ने प्रभु यीशु की जन्म की घटना का वृतांत सुनाया। सिटी मेथोडिस्ट चर्च में फादर इमानुएल मसीह ने कहा कि नन्हा फरिश्ता शांति का राजकुमार जन्म ले चुका है। ब्रदर ललित स्टीफन ने शांति का संदेश दिया। सेंट लुक चर्च में फादर राज ने प्रार्थना कराई और मिस्सा बलिदान पर प्रकाश डाला। गिरजाघरों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा।
त्योहार मना किया खुशियों का इजहार
ऐसी मान्यता है कि प्रभु यीशु की जन्म की खुशी में ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस का त्योहार मनाकर अपनी खुशी जाहिर करते है। कहते है प्रभु यीशु का जन्म गौशाला में हुआ था। जिस तरह जन्माष्टमी पर घरों में श्री कृष्ण झांकी बनाई जाती है उसी तरह प्रभु यीशु की याद में कुछ लोग घरों में गौशाला बनाते है। इन झांकियों में यीशु की देखभाल करने वाले गडरियों को भी दर्शाया जाता है।
धर्मगुरुओं ने रखे बच्चों के नाम
गिरजाघरों में धर्मगुरुओं ने बतिस्ता (बच्चों का नामकरण) की रीति भी निभाई गई। बच्चा पार्क स्थित सेंट जोजफ चर्च में मेरठ के डीन पादरी परितोष नोयल ने कहा कि हमें अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए प्रभु यीशु क शरण में जाना चाहिए।

