- परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सहभागिता बढ़ाने की जरूरत : सीएमओ
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: विश्व जनसंख्या दिवस के साथ (11 जुलाई से) जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा शुरू हो गया है। इस पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आशा और एएनएम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। खासकर परिवार को नियोजित रखने के लिए विभिन्न साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें छाया-अंतरा से लेकर अन्य साधनों यहां तक कि कंडोम के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सहभागिता को बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है। उन्होंने कहा- महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों को भी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। छोटा परिवार सुखी परिवार की अवधारणा बिना पुरुष के अधूरी है। उन्होंने कहा – परिवार की खुशहाली, शिक्षा, स्वास्थ्य और तरक्की तभी संभव है, जब परिवार सीमित होगा।
विकास के उपलब्ध संसाधनों का समुचित वितरण और बढ़ती जनसंख्या दर के बीच संतुलन कायम करने के उद्देश्य से आज सबसे अधिक जरूरत जनसंख्या स्थिरीकरण की है। परिवार को सीमित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास बास्केट आॅफ च्वाइस का विकल्प मौजूद है, जिसमें स्थायी और अस्थायी साधनों को शामिल किया गया है। इन अस्थायी साधनों में से अपनी पसंद का साधन चुनकर शादी के दो साल बाद ही बच्चे के जन्म की योजना बना सकते हैं। दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर भी रख सकते हैं।
दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखना मां और बच्चे दोनों की बेहतर सेहत के लिए बहुत जरूरी है। जब परिवार पूरा हो जाए तो स्थायी साधन के रूप में नसबंदी का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने कहा पुरुषों को यह भ्रम है कि नसबंदी से कमजोरी आ जाती है। यह बात सरासर गलत है, ऐसा कुछ नहीं होता बल्कि पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी के मुकाबले काफी आसान है। फिर भी पुरुष नसबंदी के मामले में पीछे रहते हैं।
आंकड़ों के आधार पर देखे तो साल 2020-21 में 2072 नसबंदी हुई। इसमें 1828 महिलाएं थीं। जबकि 24 पुरुष नसबंदी के लिए अस्पताल पहुंचे थे। इसके बाद 2021-22 में कुल नसबंदी 2302 हुईं। इससे 2194 महिलाएं थीं, जबकि 108 पुरुष। 2022-23 में अप्रैल से जून तक 108 महिला और 25 पुरुषों ने नसंबदी कराई। इसी तरह इस अवधि में 11,874 महिलाओं ने इंट्रा यूटेरीन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (आइयूसीडी) लगवाई। 9292 महिलाओं ने पोस्ट पार्टम इंट्रा यूटेरीन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआइयूसीडी) का इस्तेमाल किया। 38,197 महिलाओं ने परिवार नियोजन के लिए गर्भ निरोधक दवाएं इस्तेमाल कीं। जिला अस्पताल से पुरुषों ने इस अवधि में करीब 10 लाख कंडोम लिए हैं। गर्भनिरोधक अस्थाई साधन – अंतरा इंजेक्शन- हर तीन माह में एक बार।

