- मेडिकल और जिला अस्पताल में शुरू नहीं हो सकी आनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा
- ड्रिपकेस अप के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन करके मिल पाता है केवल टोकन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल हॉस्पिटल में हजारों की संख्या में आने वाले रोगियों को अपना पर्चा बनवाने के लिए घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है। आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए किए जा रहे तमाम दावों के बावजूद रोगियों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है प्रचार प्रसार और जागरूकता के अभाव में लोग क्यूआर कोड स्कैन करके टोकन लेने तक की सुविधा का बहुत कम लाभ ले पा रहे हैं।
मेडिकल हॉस्पिटल में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए औसतन हर रोज ढाई से तीन हजार मरीज पहुंचते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि सोमवार, मंगलवार, बुधवार को अधिक रोगी आते हैं। जबकि अपेक्षाकृत गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को रोगियों की संख्या कम रहती है। इन मरीजों के लिए अस्पताल में आठ पर्चा काउंटर बनाए गए हैं। सीधा सा अर्थ है कि हर काउंटर पर एक दिन में 300-400 रोगी पहुंचकर डॉक्टर के पास जाने के लिए पर्चा बनवाते हैं।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कतार में रोगियों की संख्या को कम करने के लिए आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन की बार-बार कोई न कोई व्यवस्था लागू की जाती है। लेकिन प्रचार प्रसार और जागरूकता क्या भाव में हर बार आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था निरर्थक बनकर रह जाती है। बताया गया है कि करीब साढ़े पांच साल पहले प्रदेश स्तर पर ई-हॉस्पिटल पोर्टल लॉन्च किया गया।
जिसके माध्यम से रोगियों को 20 से ज्यादा मॉड्यूल की सुविधा प्रदान करने की बात कही गई। इस पोर्टल का उद्देश्य यह रहा की रोगियों को उनके पंजीकरण के समय ही एक यूआईडी नंबर प्रदान किया जाएगा। जिसके आधार पर रोगियों की आॅनलाइन हिस्ट्री का परीक्षण करते हुए उचित परामर्श दिया जाना संभव हो सके। बाद में यह तमाम सुविधाएं आभा ऐप के माध्यम से देने का प्रयास किया गया।

लेकिन इस ऐप का प्रयोग आम आदमी के लिए सरल नहीं रह गया। जिसके कारण आभा ऐप बहुत अधिक प्रचलन में नहीं आ सकी। अभी करीब दो महीने पहले जनवरी 2024 में ड्रिपकेस के नाम से एक और ऐप लॉन्च की गई। फिलहाल जिला अस्पताल और मेडिकल अस्पताल में ड्रिपकेस ऐप के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद रोगी को एक टोकन नंबर अलर्ट किया जाता है जिसके आधार पर उन्हें तत्काल एक हरे रंग की पर्चा बनाकर दे दिया जाता है।
इस हर पर्चे को दिखाकर मरीज डॉक्टर से मिलने और जांच आदि जल्दी करा पाने में भी लाभ ले पाता है। इस ऐप का यही एकमात्र लाभ है कि इसके माध्यम से पर्चा बनवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ता। लेकिन इस ऐप का बहुत ज्यादा प्रचार प्रसार न होने के कारण मरीजों को ज्यादा लाभ नहीं हो पा रहा है। मेडिकल हॉस्पिटल की अगर बात की जाए,
तो प्रतिदिन यहां आने वाले करीब तीन हजार मरीजों में से केवल 150 के आसपास मरीज ही ऐप के माध्यम से हरा पर्चा बनवा कर डॉक्टर तक पहुंच पाते हैं। सारांश यह है कि घर बैठकर डॉक्टर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेने की सुविधा देने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
क्यूआर कोड स्कैन करके हर पर्चा बनवाने की सुविधा लेने के लिए भी रोगी को काउंटर तक पहुंचना पड़ता है। इस सिलसिले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन के स्तर से मीडिया प्रभारी डॉ. अरविंद कुमार की ओर से मरीज के घर बैठे रजिस्ट्रेशन कराने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। उन्होंने आभा और ड्रिपकेस ऐप के बारे में ही बताया है।

