- ड्रोन की निगरानी में नमाज़ के लिये उमड़ा जनसैलाब
- गाइडलाइन और उलेमा की अपील का दिखा असर
- पहली बार फैज-ए-आम के मैदान हुई नमाज़
- शिया समुदाय के लोगों ने ईदगाह मनसबिया में पढ़ी ईद की नमाज़
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शाही ईदगाह दिल्ली रोड व फैज-ए-आम के विशाल मैदान सहित शहर क्षेत्र की सैकड़ों मस्जिदों में लाखों मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मंगलवार को पुरसुकून माहौल एवं रूहानी कैफियत के साथ ईद-उल-फितर की नमाज़ अदा की। शाही ईदगाह पर सुबह निर्धारित समय के मुताबिक 7:45 बजे शहर काजी जैनुस साजिद्दीन की इमामत में बड़ी संख्या में मुसलमानों ने नमाज़ पढ़ी।
ईद की नमाज़ के लिये आसपास के मुस्लिम बाहुल इलाकों से मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह छह बजे से शाही ईदगाह आना शुरू हो गए और नमाज़ के लिये सिफे बिछा बैठकर नमाज़ का इंतजार करने लगे, देखते-देखते पूरा ईदगाह परिसर नमाज़ियों से भर गया, लेकिन इस दौरान नमाज़ियों का यहां आना जारी रहा। यह मंज़र देख शाही ईदगाह की सफील से उनके लिये ऐलान किया गया कि वह फैज-ए-आम कॉलेज ईद की नमाज़ के लिये पहुंचे, लेकिन वहां सुबह 7:15 बजे ईद की नमाज़ हो चुकी थी।

यहां पर मुफ्ती हसन साहब ने ईदुल फितर की नमाज़ पढ़ाई। कॉलेज के मैदान में लगभग 50 हजार लोगों ने नमाज़ अदा की। बाकी लोगों ने आसपास के मस्जिदों में ईद की नमाज़ अदा की। इस बीच ईदगाह के बाहर दिल्ली मुख्य मार्ग एवं अन्य मार्ग की बजाए ईदगाह के अंदर व उसकी दीवार से सटे स्थान पर ही लोगों ने ईद की नमाज़ अदा की। यह शासन-प्रशासन की गाइडलाइन और उलेमा की अपील का ही असर रहा।
नमाज़ के बाद शहर काजी ने अमनो अमान, इंसाफ, मुल्क की खुशहाली, सभी की हिफाजत और आपसी भाईचारे की दुआ कराई। नमाज़ से पहले उन्होंने ईदगाह में मौजूद सभी लोगों को ईद-उल-फितर की नमाज़ का तरीका बताया। उधर, ईदगाह बाले मियां, ईदगाह नूरनगर, ईदगाह लोहिया नगर हापुड़ रोड पर भी ईद की नमाज़ में भी बड़ी संख्या में लोग उमड़े।
शहरकाजी ने खुतबे में कहा
शहरकाजी जैनुस साजिद्दीन ने खिताब में फरमाया कि हिंदुस्तान लोकतंत्र एवं जम्हूरियत का मुल्क है। यहां हर मजहब के मानने वालों को अपने धर्म के मुताबिक जिंदगी गुजारने का हक हासिल है। हर समुदाय के लोगों को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है।

उन्होंने हर वर्ग के लोगों को आपसी भाई चारा एवं सौहार्द का वातावरण बनाये जाने का संदेश दिया। कारी शफीक ने कुरान और हदीस की रोशनी से लोगों को रूबरू किया। उन्होंने कहा नौजवान बुराइयों से बचे और मां-बाप का हुकम माने उनसे ऊंची आवाज में भी न बोलें। नेक जिंदगी गुजारने के लिये कुरान और हदीस पर अमल करना बहुत जरूरी है।
शिया समुदाय ने भी पढ़ी ईद की नमाज़
शिया समुदाय के लोगों ने भी ईदगाह मनसबिया रेलवे रोड पर ईद-उल-फितर की नमाज़ पड़ी। मौलाना मेहजर आब्दी ने नमाज़ पढ़ाई। उन्होंने नमाज़ से पहले कहा कि किसी का हक नहीं मारना चाहिए। इससे अल्लाह नाराज़ होता है। उन्होंने इल्म हासिल करने पर भी जोर दिया।
आखिर पुरानी परंपरा खत्म हुई
मेरठ: पचासों साल से परंपरा चली आ रही है कि ईद और बकरीद के मौके पर ईदगाह पर होेने वाली नमाज के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग पंडाल लगाते थे और इसी बहाने लोगों से मिलकर अपना वोट बैंक बढ़ाते थे। दो साल से कोरोना के कारण विस्तार से नमाज नहीं हुई। इस बार नमाज हुई तो किसी भी राजनीतिक दल ने पंडाल नहीं लगाया। ईदगाह में नमाज को लेकर प्रशासन ने गाइड लाइन जारी की थी कि सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी।
लाउडस्पीकर की ध्वनि भी कम करने को कही गई थी। यही कारण था कि इस बार सपा, बसपा, कांग्रेस और औवेसी की पार्टी अपना पंडाल लगाती थी। नमाज के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पंडालों में जाकर मिलती थी। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ और जिन जगहों पर पंडाल लगते थे वहां बच्चों के खिलौनों की दुकानें लगी हुई थी। हर कोई हैरान था कि इस बार प्रशासनिक पंडाल जहां डीएम और एसएसपी बैठे थे वहां कोई भी नेता नजर नहीं आया।

