Tuesday, March 10, 2026
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आरटीओ में ‘दागदार’ बैठे है सीटों पर

  • आरटीओ आफिस में बढ़ रहा भ्रष्टाचार, इसका जिम्मेदार कौन?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: संभागीय परिवहन विभाग (आरटीओ) में ‘दागदारों’ को भी जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठा दिया हैं। यही वजह है कि आरटीओ आॅफिस में भ्रष्टाचार बढ़ रहा हैं। फर्जी एनओसी तक जारी कर दी गई हैं। ये मामले पकड़ में आने के बाद भी कार्रवाई आरटीओ की तरफ से नहीं की गई हैं, जिसके चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा हैं। गैर राज्यों से आने वाले ट्रक और बसों की एनओसी को लेकर फर्जीवाड़ा चल रहा हैं।

इसमें बड़ा घालमेल किया जाता हैं। ये तथ्य सामने आ चुका हैं, फिर भी कार्रवाई आरटीओ की तरफ से नहीं की जा रही हैं। आरटीओ में वर्ष 2017 में पुलिस ने छापेमारी की थी, जिसमें 17 लोग पकड़े गए थे। इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज भी किया गया था। तब आरटीओ आॅफिस में जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, उनसे काम नहीं लिया गया। उन पर एक तरह से आरटीओ की तरफ से रोक लगा दी थी।

धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होती चली गई, जिसके बाद जिन लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज थे, उनको फिर से आरटीओ आॅफिस में एंट्री दे दी गई। इनमें महत्वपूर्ण पद कोषागार का हैं, जिसमें प्रवीण कुमार की तैनाती कर दी गई। ये लंबे समय से प्राइवेट आदमी की तैनाती चल रही हैं। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हैं। कोर्ट में पूरा मामला विचाराधीन हैं।

फिर भी इनकी खराब छवि होने के बाद कैसे तैनाती कर दी? ये बड़ा सवाल हैं। इस बात को संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी भी जानते हैं, लेकिन फिर भी इनकी तैनाती आरटीओ आॅफिस में क्यों दी गई? इसके लिए आखिर आरटीओ की क्या मजबूरी हैं, जो ‘दागदार’ प्राइवेट लोगों से काम ले रहे हैं।

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