- सुबह से लेकर देर शाम तक धीमी गति से हुआ मतदान
- गेहूं का कटान और जुमे की नमाज भी रही बड़ी वजह
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चुनाव को लेकर वोटरों की उदासीनता का यह आलम रहा कि वोटर अपनी वोट डालने के लिए ही नहीं पहुंचे। बूथों पर सुबह से लेकर देर शाम तक धीमी गति से मतदान होता देख सुरक्षा कर्मी तथा मतदान कराने आये अधिकारी भी हैरान रहे। मतदान को लेकर लोगों का कम रूझान होने की एक बड़ी वजह गेहूं का कटान और जुमे की नमाज भी बड़ी वजह रही। किसी भी बूथ पर भीड़ भाड़ न होने से सुरक्षा कर्मी भी आराम करते नजर आये। उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र में शुमार जिला बिजनौर की जनसंख्या 36 लाख बताई जाती है। जबकि वोटरों की संख्या 15 लाख के समक्ष है। इसमें 848606 पुरुष और 713459 महिला वोटर हैं। वर्ष-2011 की जनगणना के अनुसार, बिजनौर में कुल 55.18 प्रतिशत हिंदू और 44.04 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता अपने नेता का चयन करते हैं।
लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान की आज से शुरूआत हुई। एक ओर विभिन्न दलों के प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुट हुए थे, वहीं चुनाव आयोग भी मतदान प्रतिशत बढ़ाने की चुनौती के लिए प्रयास कर रहा था। मतदान में लोगों की अधिकतम भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए। इसके लिए नए प्रयोग हो रहे थे। वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ चुनाव आयोग ने भी प्रयास किये। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए पिछले एक वर्ष से जिले में जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे थे। नुक्कड़ नाटक, पोस्टर, स्कूली बच्चों में प्रतियोगिताएं आयोजित कर लोगों में मतदान के प्रति जागरुकता लाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद मतदान के मामले में राज्य की जनता उदासीन है। पिछले लोकसभा चुनाव के मतदान प्रतिशत से भी कुछ कम ही रह गया है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में महज 45.09 प्रतिशत वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। वर्ष-2019 के चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़कर 58.02 प्रतिशत तक पहुंच गया। लेकिन 2024 में मतदाता फिर से उदासीन हो गया है। मतदान के लिहाज से ये आंकड़े अच्छे नहीं हैं। इसीलिए पिछले एक वर्ष से केंद्रीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश पर स्वीप (सिस्टमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिशिपेशन) की टीम अधिक मतदान के लिए मतदाताओं को जागरुक करने का प्रयास कर रही थी, लेकिन 19 अप्रैल को हुए पहले चरण के हुए मतदान में वोटरों का रूझान बिल्कुल नहीं दिखा। बिजनौर लोकसभा के अन्तर्गत आने वाली मवाना व हस्तिनापुर विधान सभा के दर्जनों गांवो, कस्बों और तहसीलों पर बने बूथों पर सुबह 7 बजे से मतदान का सिलसिला शुरू हुआ।
सुबह सवेरे ठंड-ठंड में लगने वाली लाइनें कहीं भी नजर नहीं आर्इं। एक भी बूथ ऐसा नजर नहीं आया, जहां लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हों। बूथों तक मतदाताओं को लाने का चुनाव आयोग तथा प्रशासन के प्रयासों का कोई खास असर नजर नहीं आया। चुनाव के प्रति मतदाताओं के रूझान न लेने की एक बड़ी वजह गेहूं का कटान चलना दिखाई देता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस समय गेहंू की कटाई चरम पर चल रही है। गर्मी का तापमान बढ़ने के साथ-साथ किसान भी यह चाहता है कि समय से फसल की कटाई हो जाये। वह चुनाव को दूसरे नंबर पर रखता है। इसके अलावा मतदान के लिए केन्द्रों पर भीड़ न होने की दूसरी बड़ी वजह जुमे का दिन होना है। जुमे की नमाज होने की वजह से मुस्लिम मतदाता ने मतदान केन्द्रोें तक पहुंचने की जहमत नहीं उठाई। हां, महिलाएं जरूर अपवाद में दिखीं। जुमे की नमाज के समय कई बूथों पर बुर्कानशीं की भीड़ नजर आई।
पाला बदलने से जनता भी हुई नाराज
चुनाव में जनता के उदासीन होने की एक बड़ी वजह यह भी बताई जाती है कि जीत हासिल करने के बाद नेता अपने स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए किसी दूसरे दल में शामिल हो जाता है। मतदाता ऐसे में अपने को ठगा महसूस करता है। मतदाताओं का साफ कहना है कि जब हमने नाराज होकर किसी पार्टी विशेष के खिलाफ मतदान किया है और हमने अपनी स्वेच्छा से नेता और पार्टी का चयन किया है तो फिर यह नेता हमारे साथ विश्वासघात क्यों कर रहा है? जिस नेता या पार्टी की दिन-रात आलोचना करते हैं, कुर्सी पाने के लिए उसी को अपना नेता मान लेते हैं। देश के भीतर ऐसा लगातार हो रहा है। नेता सार्वजनिक रूप से यहां तक कहने से परहेज नहीं करते हैं कि राजनीति में सब कुछ चलता है। क्या सत्ता पाने के लिए विचारों को तिलांजलि देना राजनीति है?

