- कौन हटवायेगा ये अतिक्रमण, लंबी चौड़ी टीम फिर भी नहीं होती कार्रवाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हापुड़ रोड की तस्वीर देखिये, यह रोड 80 फीट चौड़ी है। बीच में डिवाइडर भी है। एक तरफ 40 फीट चौड़ाई बैठती है, लेकिन यहां सड़क पर अतिक्रमण के चलते वाहनों का निकलना दूभर है। हापुड़ स्टैंड से लेकर आरटीओ आॅफिस मोड तक रोड पर अतिक्रमण है, लेकिन इसको कौन हटायेगा? यह अभी शायद विभाग ही तय नहीं कर पा रहा है।
नगर निगम में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रवर्तन दल का गठन कर रखा है। इस दल पर नगर निगम प्रत्येक माह लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद शहर का अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। हापुड़ रोड शहर की एंट्री का प्वांइट है, मगर यहां पर हाल तो देखिये किसी तरह से सिंगल वाहन भी नहीं निकल पाता है, जबकि दो वाहन एक साथ निकलन सकते हैं। उसके बराबर में भी दुपहिया वाहन निकल सकता है।
हालात इतने खराब हो गए है कि जो मिस्त्री है, वो कार व अन्य वाहनों को ठीक करने के लिए वाहनों को सड़क पर लगाये रहते हैं, वहीं पर वाहनों को ठीक किया जाता है, ऐसे में बड़ी दिक्कत आवागमन में होती है। सड़क जाम हो रही है तो होने दो, इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
आखिर सड़क पर अतिक्रमण करने वालों पर चाबुक नगर निगम कब चलाएगा? या फिर भगत सिंह मार्केट की तरह से लोग जब हाईकोर्ट पहुंच जाएंगे, तभी नगर निगम अफसरों की आंखें खुलेंगी। अतिक्रमण से हापुड़ रोड का बुरा हाल है। 80 फीट चौड़ी तो सड़क है, उसके बाद भी दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट के लिए जगह छोड़ी गई है।
मगर इस जगह पर अतिक्रमण कर जमीन को कब्जा लिया गया है। नगर निगम की प्रवर्तन दल पर लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है, मगर प्रवर्तन दल को अतिक्रमण हटाने के लिए कब होश आयेगा?
बागपत रोड पर ग्रीन बेल्ट में फिर चलेगा बुलडोजर, नोटिस भेजे
बागपत बाइपास पर फिर से मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) का बुलडोजर चलेगा। यह बुलडोजर ग्रीन बेल्ट में बने निर्माणों पर चलाया जाएगा। इसके लिए एमडीए इंजीनियरों की तरफ से नोटिस जारी कर दिये गए हैं। बागपत बाइपास पर ग्रीन बेल्ट में दो दर्जन से ज्यादा मकान व दुकानें बनी हुई है। इसका मामला एनजीटी में भी विचाराधीन है। एमडीए की तरफ से एनजीटी में यह शपथ पत्र व फुटेज दिये है कि ग्रीन बेल्ट में बने अवैध निर्माणों को गिरा दिया गया है। बाकी पर भी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रीन बेल्ट में बागपत बाइपास स्थित सर्विस लेन पर प्रधानजी विवाह मंडप भी बना हुआ है। इस पर भी कोई कार्रवाई अभी एमडीए ने नहीं की है। इस तरह से यहां पर दर्जन भर से ज्यादा मकान व दुकानें ग्रीन बेल्ट में बनी हुई है। सड़क के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट की जमीन में मकान बनाकर खड़े कर दिये गए हैं। एमआईईटी से व बागपत बाइपास के बीच में करीब 60 दुकानों का निर्माण ग्रीन बेल्ट में कर दिया गया है। बिल्डर ग्रीन बेल्ट में दुकानों का निर्माण कर भोले-भाले लोगों को बेचकर चला गया। अब दिक्कत आम आदमी को हो रही है।
एमडीए की तरफ से यहां दुकानदारों व बिल्डर को भी नोटिस दिया गया है। नोटिस में साफ किया है कि बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। ग्रीन बेल्ट बागपत बाइपास ही नहीं, बल्कि एनएच-58 पर हाइवे के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट मौजूद है, जिस पर लोगों ने कब्जे कर मकान व दुकानें बनानी शुरू कर दी है। डाबका व लाला मोहम्मदपुर के पास में अवैध तरीके से ग्रीन बेल्ट में दुकानों का निर्माण कर दिया है।
दुकानों के निर्माण होने के बाद भी एमडीए के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। एमडीए के अधिकारियों को भी इसकी शिकायत मिली है, मगर ग्रीन बेल्ट में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। इस मामले में एमडीए उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने भी कार्रवाई करने के आदेश दिये हैं।

