जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भारतीय डाक विभाग शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखता है। जिसमें की खत भेजने हो या फिर किसी भी प्रकार की डाक हो डाकियों के माध्यम से सुदूर से सुदूर क्षेत्र में पहुंचायी जाती हैं। कई बार डाक समय पर न पहुंचने को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायत देखने को मिलती हैं, लेकिन डाक विभाग के अधिकारी इस बात को कभी नहीं मानते कि डाक विलंब से पहुंचती है।
वहीं अब डाक विभाग द्वारा भेजी गई खुद की डाक भी कार्यक्रम पूरा होने के एक सप्ताह बाद पहुंच रही है। वो भी तब जब डाक शहर के शहर में भेजी गई। अब इस बात से खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम उपभोक्ताओं की डाक कैसे समय पर पहुंचती हैं।
दरअसल, डाक विभाग द्वारा 19 दिसंबर को महालोगिन डे बनाया गया था। जिसके लिए डाक विभाग द्वारा निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन डाक लेकर आने वाले डाकिए को एक सप्ताह तक भी पता नहीं मिल पाया। बता दें कि 18 दिसंबर को मिलने वाली डाक 29 दिसंबर को पहुंची।
इस अंतराल में द्वितीय शनिवार को भी डाक विभाग का आधार विशेष शिविर लग चुका था। हालांकि अब उपभोक्ता डाक द्वारा भेजी गई डाक का ट्रैंस कर उसका पता लगा लेते है। कि उनकी डाक कब तक उनके पास पहुंचगी। मेरठ मंडल से संबंधित डाकघरों के कार्य की समीक्षा करने के लिए बुधवार को बरेली से डाक अधिकारी मेरठ पहुंचेगें। जो डाक विभाग के कार्यो की समीक्षा कर अन्य बिंदुओं पर निर्देश देंगे।

