- कार्यकर्ताओं ने विधायक के काफिले के आगे लगाए रालोद के जिंदाबाद के नारे
- विरोध के बावजूद आगे बढ़ा विधायक की गाड़ियों का काफिला
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पश्चिमी यूपी में भाजपा का ग्रामीण स्तर पर विरोध थम नहीं रहा हैं। सिवालखास (मेरठ) में भाजपा प्रत्याशी मनिंदरपाल का लगातार विरोध हो रहा हैं, अब सरधना से भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम का भी विरोध शुरू हो गया। किसान भाजपा के खिलाफ मैदान में उतर आये हैं, जिसके चलते भाजपा प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार करना भारी पड़ रहा है। भाजपा के फायर ब्रॉड नेता संगीत सोम को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं।

जाट बहुल गांवों में संगीत सोम का विरोध हो रहा है। रविवार को दौराला में सरधना से भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम का जैसे ही गाड़ियों का काफिला पहुंचा। तभी कुछ किसानों ने आरएलडी के झंडे लहरा दिये तथा संगीत के खिलाफ नारेबाजी कर दी। अचानक माहौल गरमा गया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम व उनके समर्थकों ने कोई प्रतिक्रिया विरोध करने वालों के खिलाफ नहीं की तथा गाड़ियों का काफिला शांत तरीके से आगे बढ़ गया।
सरधना विधानसभा से भाजपा के विधायक ठाकुर संगीत सोम का रविवार को दौराला गांव में किसानों ने विरोध कर दिया। इस दौरान किसानों ने जयंत चौधरी जिंदाबाद के नारे भी लगाए। नारेबाजी के दौरान विधायक की गाड़ियों का काफिला गांव में आगे निकल गया। विधायक के विरोध का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दरअसल, मेरठ जनपद ही नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में जगह-जगह से भाजपा प्रत्याशियों के विरोध की खबर सामने आ रही है। भाजपा आक्रोशित किसानों की मान मनोव्वल नहीं कर पाई हैं, जिसके चलते इस तरह से विरोध बढ़ता जा रहा है। किसानों ने अब आरएलडी का झंडा व डंडा थाम लिया है, जिसके बाद इस तरह से विरोध प्रदर्शित किया जा रहा है।
आचार संहिता का उल्लंघन
जो वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई हैं, उसमें देखने में आया कि करीब बीस गाड़ियों का काफिला सरधना से भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम के साथ चल रहा था। यह आचार संहिता का खुला उल्लंघन हैं, लेकिन इसमें कोई कार्रवाई प्रशासनिक अफसरों की तरफ से संगीत सोम के खिलाफ नहीं की जा रही हैं।
पांच से दस लोग ही प्रचार कर सकते हैं। सिर्फ टोलियों में नुक्कड़ सभाएं की जा सकती हैं, लेकिन यहां तो प्रत्याशी के साथ बीस गाड़ियों का काफिला चल रहा हैं, जो आचार संहिता का सीधे उल्लंघन हैं, मगर कार्रवाई कोई नहीं की जा रही हैं। ये गाड़ियों का काफिला विपक्ष के किसी नेता के साथ रहा होता तो अब तक मुकदमा दर्ज हो गया होता, लेकिन यहां पर कोई कार्रवाई नहीं। इसकी वीडियो भी वायरल हो रही हैं, फिर भी पर्यवेक्षक व प्रशासनिक अफसर मौन साधे हुए हैं। कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं? क्या इसे ही निष्पक्ष चुनाव कहा जाता हैं? इस पर सवाल उठ रहे हैं।

