Tuesday, April 21, 2026
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चुनाव बाद जेब कटेगी सलीके से

  • खाद्य तेल के दाम अभी से बढ़ने हुए शुरू
  • पेट्रोल-डीजल के दामों में भी चुनाव बाद होगी बढ़ोतरी
  • डीजल के दाम बढ़ेंगे तो खाने की चीजों पर भी बढ़ेंगे दाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पहले कोरोना और अब रूस यूक्रेन युद्ध का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ना शुरू हो गया है। खाद्य तेलों के दामों में तो बढ़ोतरी हुई ही है अब पेट्रोल और डीजल के दामों में भी तेजी से वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कच्चे तेल का दाम दिन-पर-दिन बढ़ना शुरू हो गया है। उधर, चुनावी माहौल के चलते अभी पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन जानकारों की मानें तो आने वाले सात दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने वाले हैं जिसका असर खाद्य पदार्थों पर भी पड़ेगा।

कोरोना के बाद रूस और यूक्रेन के बीच चलते युद्ध का असर दिखाई देना शुरू हो गया है। इसके चलते खाद्य तेलों की कीमतों में इजाफा हुआ है। हालांकि सरसों के तेल के दाम पर अभी इसका असर नहीं पड़ा है, लेकिन जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में सरसों के तेल के दामों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। दरअसल, बाजारों में खाद्य तेलों के दामों में भारी उछाल देखा जा रहा है।

खासतौर पर रिफाइंड और सूरजमुखी तेल के दामों में बीते 15 दिन के अंदर ही करीब 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। 15 दिन पहले रिफाइंड जहां 140 रुपये लीटर था तो अब बढ़कर 165 रुपये लीटर हो गया है। सूरजमुखी तेल पहले 140 रुपये था, जो अब 170 रुपये हो गया है। वहीं देसी घी की कीमत पहले 360 रुपये लीटर थी, जो अब 420 रुपये और वनस्पति तेलों के दामों में भी 20 रुपये का इजाफा हुआ है।

गुप्ता ट्रेडर्स के सोनू गुप्ता ने बताया कि खाद्य तेलों में बढ़ोतरी हुई है और बीते 15 दिनों में काफी व्यापार प्रभावित हुआ है। बता दें कि रूस और यूक्रेन सूरजमुखी तेल के सबसे बड़े उत्पादक हैं। पहले कोरोना और अब युद्ध के चलते सप्लाई होने में समस्याएं आ रही हैं जिसका असर यहां भारत के बाजारों पर देखने को मिल रहा है।

कच्चे तेल के दामों से दिखेगा असर

यहां कच्चे तेल की बात करें तो कच्चे तेल की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ये जून 2014 के बाद से कच्चे तेल का उच्चतम स्तर है। बीते दो महीने से लगातार कच्चे तेल के दामों में तेजी देखी जा रही है। 1 दिसंबर 2021 को कच्चे तेल की कीमत 68.87 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। 2022 में कच्चे तेल के दामों में 40 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ चुका है। भारत को इस बढ़ती कीमत से ज्यादा परेशानी होने वाली है, क्योंकि हमारा देश अपनी जरुरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है।

पेट्रोल-डीजल के दामों में भी लगेगी आग

चुनावी माहौल की वजह से नवंबर 2021 के बाद से पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अनुमान लताया जा रहा है कि सात मार्च को जैसे ही पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों का मतदान संपन्न होगा, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल दिखेगा। माना जा रहा है कि चुनावों की वजह से सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल के दामों में जबरदस्त तेजी के बावजूद, पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलावन नहीं कर रही हैं, लेकिन सात मार्च के बाद सरकार, तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की हरी झंडी दे देगी और उसके बाद इनकी कीमतों में आग लग जाएगी।

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