Wednesday, May 25, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutजानकारी छिपाने वाले टीबी ग्रस्त मरीजों पर हो सकती है कार्रवाई

जानकारी छिपाने वाले टीबी ग्रस्त मरीजों पर हो सकती है कार्रवाई

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  • मेरठ में कुल मरीजों की संख्या 3391, 2649 सरकारी, 742 निजी अस्पतालों में करा रहे इलाज
  • सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का रखा लक्ष्य

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: टीबी के मरीज को अपनी बीमार छिपाना भारी पड़ सकता है, अगर किसी मरीज ने यह जानकारी छिपाई तो उसके खिलाफ कानूूनी कार्रवाई की जा सकती है। केन्द्र सरकार ने पूरे देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसको लेकर सभी राज्यों के हर जिलों में कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं।

मेरठ को भी टीबी मुक्त करनें के लिए जिला अस्पताल में राष्टÑीय क्षय रोग उन्मूलन (एनटीइपी) योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत जिले में टीबी मरीजों की पहचान करते हुए उनका इलाज करना व सरकार द्वारा चलाई जा रही मिक्षय योजना का लाभ मरीजों तक पहुंचाना है।

कुल मरीजों की संख्या

मेरठ में इस समय टीबी के कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 3391 है, इनमें से 2649 मरीज सरकारी अस्पतालों से अपना इलाज करा रहे है जबकि 742 मरीज निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।

हालांकि कोई भी मरीज किसी भी जगह अस्पताल में भर्ती नहीं है। सभी का इलाज उनके घरों पर ही चल रहा है।

मिक्षय पोषण योजना

इस योजना के तहत किसी भी मरीज में टीबी पाए जानें के बाद उसे सरकारी पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करानी होती है। जिसके बाद मरीज का इलाज शुरू होते ही सरकार उसके खाते में 500 रुपये प्रतिमाह भेजती है। इस पैसे से मरीज अपने लिए पोषित भोजन व फल आदि ले सकता है। इस योजना का लाभ सभी मरीजों को मिलता है। चाहे वह सरकरी अस्पतालों में इलाज करा रहे हो या निजी अस्पतालों में, लेकिन उनकी सरकारी पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज होना जरूरी है।

पूरे जिले में टीबी जांच के लिए 45 सेंटर

जिले के हर ब्लॉक व तहसील की सभी पीएचसी-सीएचसी में टीबी की जांच की सुविधा है। जिले को 20 टीबी यूनिटों में बांटा गया है। साथ ही आधुनिक चार सीबीनेट व ट्रू-नॉट जांच के जरिए मरीजों की पहचान की जाती है। जिसके बाद उनका सटीक इलाज किया जाता है।

जिले में गंभीर मरीज नहीं

पूरे जनपद में कोई भी टीबी का मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं है। यहां तक कि जिला अस्पताल का टीबी वार्ड भी खाली है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि टीबी को गंभीरता से न लिया जाए। जितने भी मरीज है उनको घरों पर ही इलाज दिया जा रहा है। मरीज टीबी सेंटरों तक आते हैं और अपनी पर्ची दिखाकर मुफ्त दवा ले जाते हैं।

मरीज को बीमारी की जानकारी देना जरूरी

कोई भी ऐसा मरीज जिसे जांच के बाद टीबी से ग्रस्त पाया जाता है। उसे अपनी बीमारी की जानकारी निक्षय ऐप पर दर्ज कराना अनिवार्य है। जिससे सरकार उसकी पूरी तरह निगरानी कर सके। बीमारी छिपाने पर मरीज के खिलाफ गंभीर धाराओं में कानूनी कार्रवाई की सकती है।

जिला अस्पताल के टीबी विभाग हेड डा. गुलशन रॉय का कहना है कि सरकार ने 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसके लिए हर तरह की योजाएं चलाई जा रही है। फिलहाल मेरठ में टीबी का कोई गंभीर मामला नहीं है, लेकिन बड़ी संख्या मरीज है। जिनका इलाज उनकी टीम द्वारा किया जा रहा है।

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