- नौचंदी परिसर में पहले कूड़ाघर बना तो अब अवैध बस स्टैंड का संचालन हुआ शुरू
- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर मार्ग पर चलने वाली बसों को स्थाई रूप से खड़ी करने के लिए नहीं कोई बस स्टैंड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरठ-हापुड़ मार्ग पर नौचंदी के तिरंगा गेट पर पुलिस के द्वारा बसों का स्टैंड खत्म कर दिए जाने के बाद से बस संचालकों द्वारा नौचंदी परिसर को नया अवैध बस स्टैंड बना लिया गया है। जिसमें कई महीनों तक तो सड़क के दोनों तरफ बसों को खड़ा किया जाता रहा। जिससे मार्ग पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती थी, लेकिन अब बस संचालकों के द्वारा नौचंदी परिसर को ही नए बस अड्डे के रूप में प्रयोग किया जाने लगा है। जिसमें लोगों का कहना है कि नौचंदी परिसर में पहले कूड़ा आदि डालकर सड़कों को खुर्द-बुर्द किया जाता था, अब बसों के संचालन से पेड़ पौधे आदि भी नष्ट हो सकते हैं।
नगर निगम के द्वारा नौचंदी मेले के दौरान करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष नौचंदी परिसर को समतल करने एवं पटेल मंडप की रंगाई पुताई के साथ सड़कों की मरम्मत पर खर्च किया जाता है, लेकिन नगर निगम एवं जिला पंचायत के पास नौचंदी परिसर के रखरखाव के लिए एक चौकीदार की व्यवस्था नहीं की गई। जिसके चलते नौचंदी परिसर मेले के बाद शरारती तत्वों के अड्डे के रूप में तब्दील हो जाता है। वहीं, नगर निगम द्वारा कूड़ा आदि भी नौचंदी परिसर मेंं डलवा दिया जाता है। जिससे परिसर व पटेल मंडप बदहाली में तब्दील हो जाता है।

वहीं, पटेल मंडप के अंदर कुछ शरारती तत्व क्रिकेट खेलने के नाम पर भवन में शीशे व खिड़की आदि में तोड़फोड़ करते हैं। उधर, पहले ही परिसर में बदहाली चरम पर थी, लेकिन अब मेरठ से वाया हापुड़-बुलंदशहर एवं अलीगढ़ आदि विभिन्न मार्गों पर चले वाली बसों का संचालन होता है। उन बसों को अब नौचंदी परिसर में खड़ा कराया जाने लगा है। जिसमें हाल ही में पुलिस के द्वारा बलपूर्वक बसों को तिरंगा गेट से हटवाया गया था, लेकिन कुछ दिनों तक तो बसें वहां खड़ी नहीं हुई, लेकिन बाद में पुलिस से सेटिंग के बाद बसों को फिर से खड़ा कराया जा रहा था,
लेकिन शिकायत हुई तो फिर से बसों को तिरंगा गेट से हटवा दिया गया। अब कुछ दिन तो सड़क के दोनों तरफ बसें खड़ी की जाने लगी, लेकिन अब बस संचालकों द्वारा नौचंदी परिसर को ही अपना नया बस अड्डा बना लिया है। लोगों का कहना है कि बसों को वहां खड़ा करने से परिसर में और भी बदहाली पैदा हो जायेगी, पहले ही कूड़ा करकट आदि डाला जाने से बदहाली चरम पर चल रही है।

